सरकार के इस फैसले का असर लाखों लोगों पर पड़ सकता है। इस बात के पूरे आसार हैं कि सरकार जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स के इंटरेस्ट रेट में कटौती कर सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार छोटी बचत योजनाओं के ब्याज दर में 30 से 50 बेसिस अंक की कटौती कर सकती है। 100 बेसिस अंक यानी 1 फीसदी है।

केंद्र सरकार ने जनवरी से मार्च तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं के ब्याज दर में कटौती की थी। लोकसभा चुनावों से पहले अप्रैल-जून तिमाही के दौरान दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। हालांकि तब सरकारी बॉन्ड यील्ड में 29 बेसिस अंक की गिरावट आने के बावजूद सरकार ने दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। लेकिन सितंबर तिमाही में सरकार रेट कट कर सकती है।

डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स इस हफ्ते के अंत या अगले हफ्ते की शुरुआत तक नोटिफिकेशन भेज सकता है। मनीकंट्रोल स्वतंत्र रूप से इस खबर को वेरिफाई नहीं कर सका है।

लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने कम लागत पर पूंजी मुहैया कराने का वादा किया था। पेपर को एक अधिकारी ने बताया है कि प्रशासन का मकसद कम खर्च पर पूंजी मुहैया कराना है ताकि निवेश को बढ़ावा दिया जा सके। RBI ने लगातार तीन बार रेट कट करके अपना काम कर दिया है। अब सरकार की बारी है।

आरबीआई ने 2019 में अब तक तीन बार रेट कट कर दिया है। जून की शुरुआत में भी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने 0.25 फीसदी की कटौती की थी। कुल मिलाकर 2019 में 0.75 फीसदी इंटरेस्ट रेट घट चुका है। उस वक्त आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था कि छोटी बचत योजनाओं का ब्याज दर प्रीस्क्राइब्ड फॉर्मूला से ज्यादा है।

क्या हैं मौजूदा दरें?

फिलहाल 1 साल, 2 साल और 3 साल के एफडी की ब्याज दरें 7 फीसदी और पांच साल के एफडी की ब्याज दर 7.8 फीसदी है।

सरकार को उम्मीद है कि  छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर घटाने से बैंकों का खर्च कम होगा। इससे वे लोन का इंटरेस्ट रेट घटा पाएंगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।