ज्यादा पेंशन स्कीम के लिए अप्लाई कर दिया है? जानिए हर महीने कितने मिलेगी पेंशन

EPFO ने ज्यादा पेंशन के लिए अप्लाई करने की समयसीमा बढ़ाकर 3 मई कर दी है। इसलिए एंप्लॉई के पास अप्लाई करने के लिए पर्याप्त समय है। उन्हें सोचसमझकर ज्यादा पेंशन की स्कीम के लिए अप्लाई करना चाहिए

अपडेटेड Mar 01, 2023 पर 6:02 PM
पहले से पेंशन के कैलकुलेशन के लिए एक फॉर्मूला तय है। इसमें पेंशनेबल सैलरी में पेंशनेबल सर्विस से मल्टीप्लाई करते हैं। फिर जो फिगर आता है, उसे 70 से डिवाइड करते हैं।

EPFO ने ज्यादा पेंशन स्कीम (Higher Pension Scheme) का फायदा उठाने का एक और मौका सब्सक्राइबर्स को दिया है। इसके लिए उसने 20 जनवरी को सर्कुलर जारी किया था। इसके बाद कंपनियों ने अपने एंप्लॉयीज को मेल भेजने शुरू कर दिए हैं। उन्हें कहा गया है कि अगर वे ज्यादा पेंशन का ऑप्शन सेलेक्ट करना चाहते हैं तो इसके लिए तय फॉर्म को भरकर कंपनी के पास जमा कर दें। कंपनी इस फॉर्म को EPFO के ऑफिस में जमा कराएगी। पहले इसकी अंतिम तारीख 3 मार्च थी। अब यह डेडलाइन बढ़ाकर 3 मई कर दी गई है। अगर आपने अब तक अप्लाई नहीं किया है तो आपके पास पर्याप्त समय है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

कोई एंप्लॉयी जो 1 सितंबर, 2014 को ईपीएफओ का सदस्य था वह इस स्कीम में अप्लाई कर सकता है। EPFO ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 20 फरवरी को सर्कुलर जारी किया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में एक आदेश जारी किया था। इसमें ईपीएफओ को उन लोगों को ज्यादा पेंशन की स्कीम का फायदा उठाने के लिए एक और मौका देने के कहा गया था, जो पिछले बार इसका फायदा नहीं उठा सके थे। इसके लिए कोर्ट ने ईपीएफओ को चार महीने का वक्त दिया था।

अभी क्या है सिस्टम?


अभी EPFO के पास एंप्लॉयी को अपनी बेसिक सैलरी का 12 फीसदी जमा करना पड़ता है। इतना ही पैसा एंप्लॉयर यानी आपकी कंपनी ईपीएफओ के पास जमा करती है। आपका पूरा पैसा EPF यानी प्रोविडेंट फंड में चला जाता है। लेकिन, एंप्लॉयर का पैसा दो हिस्सों में बंट जाता है। 8.33 फीसदी का पहला हिस्सा EPF में जाता है। बाकी 3.67 फीसदी EPS यानी पेंशन फंड में जाता है। EPS में कंट्रिब्यूशन के लिए अमाउंट का कैलकुलेशन 15,000 रुपये की फिक्स्ड मंथली सैलरी पर होता है। इसलिए पेंशन फंड में जाना वाला अमाउंट बहुत कम होता है।

क्या बदलाव होने जा रहा है?

पेंशन की नई स्कीम को सेलेक्ट करने के बाद एंप्लॉयल के 12 फीसदी अमाउंट के ईपीएस में जाने वाले हिस्से का कैलकुलेशन 15,000 रुपये की फिक्स्ड मासिक सैलरी की जगह एंप्लॉयी की वास्तविक सैलरी (बेसिक और डीए) पर होगी। कई एंप्लॉयीज की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा है। इसलिए उनके EPS में हर महीने जमा होने वाला अमाउंट बढ़ जाएगा। EPS में हर महीने ज्यादा पैसे जमा होने से उनके पेंशन फंड में जमा होने वाली रकम भी बढ़ जाएगी। इससे रिटायरमेंट के बाद उन्हें हर महीने ज्यादा पेंशन मिलेगी।

नई स्कीम में कितनी मिलेगी पेंशन?

पहले से पेंशन के कैलकुलेशन के लिए एक फॉर्मूला तय है। इसमें पेंशनेबल सैलरी में पेंशनेबल सर्विस से मल्टीप्लाई करते हैं। फिर जो फिगर आता है, उसे 70 से डिवाइड करते हैं। रिटायरमेंट के वक्त अंतिम पांच साल की औसत सैलरी को पेंशनेबल सैलरी माना जाता है। इसका मतलब है कि अगर आप 25 साल की उम्र में नौकरी शुरू करते हैं और 58 साल की उम्र में रिटायर करते हैं तो आपकी मंथली पेंशन 7071 रुपये होगी। इसके लिए उपर्युक्त फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया है। 15,000 अंतिम पांच साल की औसत सैलरी है। 33 साल पेंशनेबल सर्विस है।

अगर आप ज्यादा पेंशन की स्कीम को सेलेक्ट करते हैं तो रिटायरमेंट के बाद आपकी पेंशन का कैलकुलेशन आपकी वास्तिवक सैलरी के आधार पर होगा। उदाहरण के लिए अगर आपकी औसत पेंशनेबल सैलरी (बेसिक और डीए) अंतिम 60 महीने में 40,000 रुपये है तो आपकी पेंशन 18,857 रुपये होगी। इसके लिए भी उपर्युक्त फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया है।

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