आज युवाओं के लिए नौकरी के मौके पहले के मुकाबले ज्यादा हैं। करियर पर फोकस रखने वाले युवा एक ही नौकरी में लंबे समय तक नहीं बने रहना चाहते। ज्यादा अनुभव और अच्छे पैकेज के लिए वे कुछ साल के बाद नौकरी बदल देते हैं। करियर पर फोकस रखने में कोई खराबी नहीं है। लेकिन, नौकरी के दौरान बचत और इनवेस्टमेंट पर फोकस करना भी उतना ही जरूरी है।
अगर आपकी उम्र 20 या 30 प्लस है और आप अपनी पहली या दूसरी नौकरी कर रहे हैं तो आपको अपने फाइनेंस (Finance) को लेकर भी सीरियस होने की जरूरत है। आपको अपनी सैलरी का एक हिस्सा हर महीने शेयरों या निवेश के दूसरे विकल्पों में इनवेस्ट करना होगा।
फाइनेंशियल आर्टिस्ट्स के फाउंडर महर धामोदीवाला का कहना है कि उम्र होने पर जब आपकी जिम्मेदारियां कम होती है तो आप अपनी बचत का 60-80 फीसदी हिस्सा शेयरों में निवेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "लंबी अवधि में शेयरों का रिटर्न इनफ्लेशन के रेट के मुकाबले ज्यादा रहता है। जब आप 20 प्लस के होते हैं तो आपके पास शेयरों में ज्यादा से ज्यादा निवेश करने की गुंजाइश होती है।"
मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के खर्च ज्यादा होते हैं। घर के लिए ज्यादा रेंट चुकाने के साथ ही घर से ऑफिस आनेजाने पर भी उनका बड़ा अमाउंट खर्च हो जाता है। इसके बावजूद उन्हें इनवेस्टमेंट की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। उन्हें सैलरी का कुछ न कुछ हिस्सा शेयरों में जरूर डालना चाहिए।
गेनिंग ग्राउंड इनवेस्टमेंट सर्विसेज की को-फाउंडर क्षितिजा शेते ने कहा कि कम उम्र में रियल एस्टेट के बजाय शेयरों और डेट में निवेश करना फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि अगर आपके पास ऐसा पैसा है, जिसे आप कभी भी इस्तेमाल कर सकते हैं तो इससे आपका कॉन्फिडेंस हाई रहता है। आप बेहतर करियर के लिए जॉब बदलने का जोखिम ले सकते हैं। आप विदेश शिफ्ट होने के बारे में सोच सकते हैं।
उन्होंने कहा, "कम उम्र में रियल एस्टेट में निवेश करने से आप प्रॉप्रटी को लेकर बंध जाते हैं। इससे परिवार बढ़ने पर आपके लिए बड़ी प्रॉपर्टी में निवेश करना मुश्किल हो जाता है या दूसरे लोकेशन पर शिफ्ट होने में आपको दिक्कत आती है।"
मनी मंत्रा के फाउंडर विरल भट्ट ने कहा कि उन्होंने देखा है कि युवा लग्जरी आइटम्स पर काफी खर्च करते हैं। इनमें से कई ऐसे खर्च होते हैं, जिनसे बचा जा सकता है। उन्होंने कहा, "खर्च करने में खराबी नहीं है लेकिन ज्यादा खर्च करने में खराबी है।"
ज्यादा खर्च करने की आदत से व्यक्ति को कई बार कर्ज लेने के मजबूर होना पड़ता है। आज इंस्टैंट लोन ऐप (Instant loan App) आ जाने से छुट्टी मनाने से लेकर किराया चुकाने तक के लिए लोन मिल जाता है। लेकिन, ये लोन बहुत महंगे होते हैं। समय पर नहीं चुकाने पर कई बार यह आपके लिए बड़ा बोझ बन जाते हैं। आपको 'बाय-नाउ-पे-लेटर' (buy-now-pay-later) जैसे लोन ऑफर से भी बचना चाहिए।
लैडर7 फाइनेंशियल एडवाइजर्स के फाउंडर सुरेश सदगोपन ने कहा कि एजुकेशन के लिए लोन (Education loan) लेना ठीक है, क्योंकि इससे आपको करियर में फायदा मिलता है। लेकिन, मोबाइल खरीदने या छुट्टी बिताने के लिए लोन लेना ठीक नहीं। अगर आपको हर छोटे-बड़े काम के लिए लोन लेने की आदत लग गई तो फिर आप फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल नहीं कर पाएंगे।
फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब यह है कि आपका इनवेस्टमेंट नियमित रूप से बढ़ना चाहिए। यह तभी हो सकता है जब किसी तरह की इमर्जेंसी की स्थिति के लिए आपके पास इमर्जेंसी फंड होगा। आपको कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के लिए इमर्जेंसी फंड होना चाहिए। इससे आपको किसी भी इमर्जेंसी की स्थिति में आपको म्यूचु्अल फंड का अपना SIP नहीं रोकना पड़ेगा। आपको किसी से उधार भी नहीं मांगना पड़ेगा।
कम उम्र में इंश्योरेंस खरीदना भी बहुत फायदेमंद है। आपके पास लाइफ इंश्योरेंस के साथ हेल्थ इंश्योरेंस भी होना चाहिए। इससे बीमार पड़ने की स्थिति में आपको अपनी बचत के अमाउंट से पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। सदगोपन का कहना है कि अगर आपको कंपनी की तरफ से मेडीक्लेम पॉलिसी मिली हुई है तो भी आपको एक पर्सनल हेलेथ इंश्योरेंस जरूर खरीद लेना चाहिए।
सदगोपन का कहना है कि आपको शुरुआत में अपनी सैलरी का कम से कम 10 फीसदी लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट के लिए अलग कर देना चाहिए। धीरे-धीरे यह हिस्सा बढ़कर 30 फीसदी या इससे भी ज्यादा होना चाहिए। अगर आपको निवेश से जुड़े मसलों को समझने में दिक्कत आती है तो आप किसी फाइनेंशियल एडवाइजर की सेवाएं ले सकते हैं।