हम में से कई लोग अपने करियर की शुरुआत में ही अपने सपनों का अपार्टमेंट या घर खरीदने के बारे में सोचते हैं। देश के सभी शहरों में प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों को देखते हुए इस तरह के तकरीबन सभी मामलों में होम लोन लेना तय होता है। इसके अलावा होम लोन रीपेमेंट पर मिलने वाले टैक्स के फायदे भी लोगों को होम लोन लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

चूंकि बैंक और वित्तीय संस्थान हमारी मौजूदा आमदनी, कर्जों और दूसरी चीजों के आधार पर लोन देते हैं, ऐसे में एक अच्छा क्रेडिट रिकॉर्ड बेहद जरूरी हो जाता है।

यहां हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं जिनसे बैंक से आपको लोन मिलने के आसार बढ़ जाते हैं।

मौजूदा लोन चुका दें

भले ही आपकी मोटी कमाई हो, लेकिन आपको बैंक से मिलने वाला लोन आपकी सैलरी की एक सीमा तक ही सीमित होता है। आमतौर पर वित्तीय संस्थान यह सुनिश्चित करते हैं कि आपकी ईएमआई आपकी कमाई के 60 फीसदी (जिसमें होम लोन के लिए जाने वाली मासिक रकम भी शामिल है) से ज्यादा न हो।

आपकी होम लोन लेने की क्षमता तय करते वक्त वित्तीय संस्थान मंथली इनकम से कुल ईएमआई को काट देते हैं ताकि दिए जा सकने वाले लोन की कुल मात्रा तय कर सकें।

क्रिफ हाई मार्क में डायरेक्टर (सेल्स और मार्केटिंग) विल्फ्रेड सिगलर के मुताबिक, "होम लोन लेने की इच्छा रखने वालों को पहला कदम अपना डेट-टू-इनकम रेशियो सुधारने की दिशा में उठाना चाहिए। इन्हें होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपने मौजूदा लोनों को चुकाने पर विचार करना चाहिए।"

अपने सभी अन्य लोन अकाउंट्स बंद करते वक्त कर्जदाता से नो-ड्यूज सर्टिफिकेट लेना न भूलें। यह सर्टिफिकेट बताता है कि आप पर ईएमआई का बोझ नहीं है और आप अतिरिक्ति कर्ज ले सकते हैं। नो-ड्यूज सर्टिफिकेट इस वजह से भी जरूरी है कि यह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में लोन के बंद होने को दिखाता है।

पैसाबाजार.कॉम के CEO और को-फाउंडर नवीन कुकरेजा के मुताबिक, "सबसे पहले ऐसे कर्जों को खत्म करें जिन पर ज्यादा ब्याज लग रहा है क्योंकि होम लोन कम इंटरेस्ट रेट पर मिलते हैं।" पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, कार लोन जैसे ऊंची ब्याज लागत वाले मौजूदा कर्ज चुकाना ब्याज पर बचत करने के लिहाज से फायदेमंद रहता है।

ऐसे बैंक को चुनिए जो कि सबसे ज्यादा लोन-टू-वैल्यू रेशियो ऑफर कर रहा हो। यह सूचना सार्वजनिक नहीं है, ऐसे में आपको ज्यादा जानकारी के लिए बैंक के प्रतिनिधि से मिलना पड़ेगा। ज्यादा लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो का मतलब है कि आपको ज्यादा लोन मिलेगा।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने LTV रेशियो को 30 लाख तक के लोन के लिए 90 फीसदी, 30-75 लाख रुपये तक के लोन के लिए 80 पर्सेंट और 75 लाख रुपये तक के लोन के लिए 75 फीसदी पर सीमित किया है। होम लोन का एलटीवी रेशियो प्रॉपर्टी (लोकेशन, बिल्डर का रिकॉर्ड वगैरह) और आवेदक के क्रेडिट रिस्क पर निर्भर करता है।

कुकरेजा बताते हैं, "अलग-अलग बैंकों में एक ही आवेदक का एलटीवी रेशियो अलग-अलग हो सकता है। ऐसे में अलग-अलग बैंकों के ऑफर किए जा रहे एलटीवी रेशियो की तुलना की जानी चाहिए।"

डाउन पेमेंट की तैयारी

होम लोन के लिए आवेदन करते वक्त आपको डाउन पेमेंट की पहले से तैयारी कर लें। फाइनेंशियल प्लानर्स कहते हैं कि डाउन पेमेंट की व्यवस्था करना आसान हो सकता है कि अगर इसे एक फाइनेंशियल गोल की तरह से देखा जाए। जब आप रकम जोड़ने का फैसला कर लेते हैं तो आपको टारगेट, इसे पूरा करने में लगने वाले वक्त और अपने रिस्क प्रोफाइल पर फोकस करना चाहिए।

ऑप्टिमा मनी मैनेजर्स के फाउंडर और सीईओ पंकज मठपाल कहते हैं, "अगर आपके पास पांच साल से ज्यादा का वक्त है तो आपको इक्विटी म्यूचुअल फंड्स या एग्रेसिव हाइब्रिड फंड्स में पैसा लगाने पर सोचना चाहिए।"

कम अवधि के लिए बेहतर होगा कि आप फिक्स्ड इनकम विकल्पों, जैसे कि फिक्स्ड डिपॉजिट्स, रिकरिंग डिपॉजिट्स और बॉन्ड फंड्स, पर टिके रहें। डाउन पेमेंट का आकलन करते वक्त इसमें तीन या पांच साल के लिहाज से महंगाई की दर, स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्री के खर्च को भी जोड़ लें।

हर तरह की इनकम और बोनस की रकम को जोड़ें

बैंक के पास जाने से पहले अपनी सैलरी के अलावा दूसरे जरियों से हो रही कमाई को भी जोड़ लेना चाहिए। इसमें बोनस की रकम, रेंटल कमाई और दूसरे जरियों से होने वाली आमदनी शामिल है। यह आपकी लोन लेने की क्षमता को बढ़ाता है।

ट्रांसयूनियन सिबिल की वाइस प्रेसिडेंट और हेड (डायरेक्ट टू कंज्यूमर इंटरेक्टिव) सुजाता अहलावत के मुताबिक, "होम लोन के लिए एप्लाई करते वक्त आपको परफॉर्मेंस लिंक्ड बोनस और आय के अन्य जरियों को भी शामिल करना चाहिए ताकि आपको मिलने वाली लोन की रकम बढ़ सके। इससे बैंक पर उधार लेने वाले की कर्ज चुकाने की अच्छी हैसियत की छवि बनती है।"

होम लोन लेते वक्त आप एक को-एप्लिकेंट भी जोड़ सकते हैं। पीएनबी हाउसिंग के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और बिजनेस हेड, शाजी वर्गीज कहते हैं, "इससे प्राइमरी एप्लिकेंट को ज्यादा होम लोन की रकम मिलने में मदद मिलती है क्योंकि बैंक को-एप्लिकेंट की इनकम को भी मुख्य आवेदक की इनकम में शामिल करता है।" आदर्श स्थिति में आपको अपने वर्किंग पति/पत्नी, बेटा या बेटी को को-एप्लिकेंट के तौर पर शामिल कर संयुक्त होम लोन लेना चाहिए।

ज्यादा लंबे टेन्योर का चुनाव करें

लंबे वक्त के लिए लोन लेने पर आपकी ईएमआई घट जाती है, जो कि आपकी लोन लेने की क्षमता को बढ़ाता है। कुकरेजा के मुताबिक, "ज्यादा होम लोन अमाउंट लेने वालों को लंबे टेन्योर का चुनाव करना चाहिए ताकि उनकी ईएमआई की रकम कम हो सके और लोन लेने की हैसियत बढ़ सके।" कुछ वित्तीय संस्थान 25-40 साल तक के टेन्योर के लिए होम लोन देते हैं।

हालांकि, जब भी आपको मौका मिले आपको प्रीपेमेंट करना चाहिए। इससे न केवल आपका क्रेडिट स्कोर सुधरता है बल्कि यह आपको कर्ज मुक्त भी करता है। दलोनगुरु।इन के बिजनेस हेड डेनी टॉमी के मुताबिक, "अगर आपकी इनकम बढ़ती है या बोनस मिलता है या आपकी सेविंग्स में इजाफा होता है तो आपको लोन का प्रीपेमेंट करना चाहिए


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