Gold Holding in Indian Households: भारत में सोने को सिर्फ एक आभूषण या निवेश नहीं, बल्कि संकट का सबसे बड़ा साथी माना जाता है। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर देश में सोने के भारी-भरकम आयात और भारतीय परिवारों के पास जमा विशालकाय गोल्ड स्टॉक की ओर ध्यान खींचा है।
लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार के पास भारतीय परिवारों के पास मौजूद निष्क्रिय सोने का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लेकिन उद्योग जगत के अनुमान इतने हैरान करने वाले हैं कि भारतीय घरों में रखा सोना दुनिया के शीर्ष 10 केंद्रीय बैंकों के कुल स्वर्ण भंडार से भी अधिक बताया जा रहा है।
कस्टम ड्यूटी से सरकार को ₹10,463 करोड़ की कमाई
सरकार ने संसद में बताया कि 13 मई से 2 अगस्त 2026 के बीच सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात से कुल ₹10,463 करोड़ का सीमा शुल्क एकत्र किया गया है। कुल राजस्व में सबसे बड़ा हिस्सा सोने का रहा, जिससे ₹10,040 करोड़ का कस्टम ड्यूटी मिला। चांदी से ₹328 करोड़ और प्लैटिनम से ₹95 करोड़ का टैक्स आया।
बता दें कि सरकार ने 13 मई 2026 को सोने और चांदी पर प्रभावी सीमा शुल्क को 6% से बढ़ाकर 15% और प्लैटिनम पर 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया था। ड्यूटी बढ़ने के बाद अवैध तस्करी पर भी शिकंजा कसा गया है, जिसमें 6 हफ्तों के भीतर 160 किलो से ज्यादा सोना जब्त किया गया और 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
भारतीय घरों में है कितना सोना?
उद्योग संगठन एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवारों के पास जमा सोने का स्टॉक दुनिया के टॉप 10 सेंट्रल बैंकों के कुल रिजर्व से भी बड़ा है। विभिन्न औद्योगिक अनुमानों के अनुसार, भारतीय घरों में रखे सोने की कुल वैल्यू लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब ₹415 लाख करोड़ के आसपास है।
एसोचैम का मानना है कि अगर भारतीय हर साल अपने घरेलू सोने का केवल 2% हिस्सा भी वित्तीय संपत्तियों में बदल दें, तो 2047 तक भारत की जीडीपी में मल्टीप्लाई इफेक्ट के जरिए $7.5 ट्रिलियन का अतिरिक्त योगदान जुड़ सकता है।
'बर्फ बन चुका है तिजोरी में रखा सोना'- नीलेश शाह
बाजार के दिग्गज एक्सपर्ट नीलेश शाह ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत ने अब तक कीमती धातुओं के आयात पर लगभग 700 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं। यह आंकड़ा भारत में आए कुल एफडीआई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) से भी ज्यादा है। यह सारा सोना हमारी तिजोरियों में पड़ा है और 'बर्फ' बन चुका है। अगर हम इस सोने को मोनेटाइज करके औपचारिक अर्थव्यवस्था में ले आएं, तो देश में टैलेंट, कैपिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर का 'त्रिवेणी संगम' बन जाएगा और विकास अपने आप रफ्तार पकड़ लेगा।
RBI का गोल्ड रिजर्व कितना है?
सरकार ने संसद में यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास 29 मई 2026 तक अपने विदेशी मुद्रा भंडार के हिस्से के रूप में 880.52 टन सोना मौजूद था। सरकार ने उन सभी मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि आरबीआई ने सोना बेचा है।
क्या है गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS)?
घरों और संस्थानों में बेकार पड़े सोने को उत्पादक कार्यों में लगाने के लिए सरकार ने साल 2015 में गोल्ड मॉनिटाइजेशन स्कीम (GMS) शुरू की थी। इस योजना के तहत आम नागरिक अपना सोना बैंकों में जमा कराकर उस पर ब्याज कमा सकते हैं और देश के आयात बिल को कम करने में मदद कर सकते हैं।