अकसर कई कारणों के चलते हमारे पास कई बैंक अकाउंट हो जाते हैं, कभी जॉब चेंज करने के बाद दूसरी कंपनी दूसरा अकाउंट खुलवाना पड़ता है, जिससे हमारे पास एडिशनल अकाउंट हो जाते हैं। ज्यादा अकाउंट मतलब ज्यादा मैनेजमेंट की जरूरत। वहीं कुछ बैंकों के रूल्स इतने स्ट्रिक्ट होते हैं कि उसे मैनेज कर पाना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में हमें अपना अकाउंट बंद करवाने का ही ऑप्शन चुनना पड़ता है।
अकाउंट बंद करवाने का विकल्प भी एडिशनल चार्ज के साथ आता है। बैंकों का अकाउंट बंद करवाने को लेकर अलग-अलग क्लोजर चार्ज होता है। वहीं, बैंक क्लोजिंग टाइम को लकर भी अलग नियम लागू करते हैं।
ऐसे में जान लें कि किस टाइम ड्यूरेशन में आप अपना अकाउंट बंद करवाएंगे तो आपको क्लोजर चार्ज देना होगा। अगर आप अपना अकाउंट खुलवाने के एक साल के भीतर अपना अकाउंट बंद करवाते हैं तो आपको क्लोजर चार्ज देना पड़ेगा। वहीं, अगर आपने अकाउंट खुलवाने के 14 दिन के भीतर इसे बंद करवाते हैं तो बैंक आपसे कोई चार्ज नहीं लेंगे। वहीं किसी मृत्यु के बाद उसका अकाउंट बंद करने के लिए बैंक कोई चार्ज नहीं लेते। अगर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बात करें तो यह बैंक पहले किसी मृतक का अकाउंट क्लोज करने के लिए और अकाउंट खुलने के एक साल बाद भी बंद कराने पर 500 रुपए से 1000 रुपए चार्ज करता था।
करंट अकाउंट को 14 दिनों के बाद बंद करवाने पर बैंक क्लोजर चार्ज लेते हैं। बैंक इसके लिए 500 से 1000 के बीच चार्ज लेते हैं।
बैंक क्लोजर चार्ज कस्टमर्स को दिए गए ओपनिंग किट, चेकबुक और डेबिट कार्ड वगैरह के चार्ज को कवर करने के लिए क्लोजर चार्ज लेते हैं।
चूंकि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने क्लोजर चार्ज के लिए कोई निर्धारित गाइडलाइंस फिक्स नहीं किए हैं, तो यह पूरी तरह बैंकों पर निर्भर है कि वो आपको कितना चार्ज करते हैं। इसलिए इसकी जानकारी होना जरूरी है कि आप अपना बैंक अकाउंट कितने ड्यूरेशन में बंद करवाना चाहते हैं।
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