एक कहावत है एक रुपया बचाना भी एक रुपया कमाने के बराबर है। ऐसे समय में जब नए स्मार्टफोन्स और ब्रांडेड कपड़ों के लालच से आप खुद को बचा नहीं पाते हैं तो भला पैसे कैसे बचा पाएंगे। फिक्र मत कीजिए, हम बताएंगे कि किस तरह आपकी जेब भी खुश रहेगी और दिल भी।
एक कहावत है एक रुपया बचाना भी एक रुपया कमाने के बराबर है। ऐसे समय में जब नए स्मार्टफोन्स और ब्रांडेड कपड़ों के लालच से आप खुद को बचा नहीं पाते हैं तो भला पैसे कैसे बचा पाएंगे। फिक्र मत कीजिए, हम बताएंगे कि किस तरह आपकी जेब भी खुश रहेगी और दिल भी।
बगैर कंजूस कहलाए पैसा बचाना भी एक कला है और यह कला अपने-आप नहीं आती। मुमकिन है कि आप भी चाहते हों पैसा बचाना लेकिन हो नहीं पाता। अगर ऐसी बात है तो खास आपके लिए ये टिप्स हैं।
कहां कब और कैसे खर्च करें
हम सब कहीं ना कहीं पैसे खर्च करते हैं। कोई ज्यादा खर्च करता है तो कोई कम। हम सबको यह तय करने का मौका मिलता है कि हम कहां खर्च करें। अगर आपने अपनी जरूरतों को प्राथमिकता के हिसाब से तय कर लिया तो मुमकिन है कि आप बड़ी आसानी से बचत कर लेंगे।
सेविंग्स के लिए जरूरी है ट्रिक
पैसा बचाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है मोटिवेशन। इससे आप ऐसे नए तरीके खोज सकते हैं जिनसे सेविंग्स का नया जरिया मिल सकता है। आपको अपने पुराने कपड़ों की जेब में अचानक कुछ पैसे मिल जाते हैं तो कैसा लगता है? बहुत अच्छा लगता है ना। बस आपको कुछ इसी तरह के ट्रिक्स आजमाने हैं।
ट्रिक नंबर 1
हर महीने जब आपकी सैलरी आए तो कुछ हिस्सा किसी ऐसे बैंक अकाउंट में डाल दें जहां से आप आसानी से पैसे नहीं निकाल सकते हों। यानी एक ऐसा अकाउंट जिसका कोई डेबिट कार्ड ना हो और ना ही उसमें इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा हो। इस अकाउंट का पैसा तभी निकलेगा जब आप बैंक जाएंगे। गैरजरूरी कामों के लिए कभी भी बैंक में लाइन लगकर आप यह पैसा नहीं निकालेंगे। लिहाजा यह रकम आपके बुरे वक्त के लिए सेव हो जाएगी।
ट्रिक नंबर 2
हम सबकी आदत होती है अपने प्लान बनाते हुए हम भविष्य में मिलने वाले पैसों को भी जोड़कर चलते हैं। जैसे अगले साल आप विदेश जाना चाहते हैं तो आपका फोकस सैलरी से बचत करने पर नहीं रहता बल्कि आप बोनस या पर्क्स को जोड़कर चलते हैं। यह गलत है क्योंकि इसमें होता यह है कि जो पैसे अभी आपको मिलने वाले हैं उनका खर्चा पहले से तय है। बेहतर यह है कि आप हर महीने की सैलरी से कुछ पैसा बचाए और उसके हिसाब से प्लान बनाए।
ट्रिक नंबर 3
ये चाहिए तो चाहिए। यह सोच हमारी सेविंग्स की सबसे बड़ी दुश्मन है। जब भी कोई चीज हमें पसंद आती है तो हम यह नहीं सोचते कि असल में इस चीज की जरूरत उतनी है या नहीं जितनी हमें लग रही है। इसलिए जब भी कोई महंगी चीज खरीदने का प्लान बना रहे तो तुरंत खरीदने के बजाए थोड़ा वक्त दें। इससे आपको यह तय करने में मदद मिलेगी कि असल में वो उतना जरूरी है या नहीं जितना आपको लगता है।
ट्रिक नंबर 4
हिंदी में एक कहावत है बूंद-बूंद से घड़ा भरता है। यही बात आपकी सेविंग्स के लिए भी पूरी तरह सही है। जब भी आप कोई खर्च करें तो उसका एक हिस्सा यानी 5% या 10% आप अपने नाम पर रख लीजिए। मान लीजिए आपने 1000 रुपए की शॉपिंग की तो 10 फीसदी यानी 100 रुपए आप अपने किसी गुल्लक में डाल लीजिए। कहने को तो यह रकम कम लग रही है लेकिन जब भी आप अपना गुल्लक तोड़ेंगे तो दिल भी खुश होगा और जेब भी।
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