एंप्लॉयी की मौत 58 साल से पहले होने पर क्या उसकी पत्नी को पेंशन मिलेगी?

एंप्लॉयी और एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन का कुछ हिस्सा पीएफ में जाता है और कुछ हिस्सा ईपीएस में जाता है। हर महीने इन दोनों फंडों में पैसे जमा होते रहते हैं। एंप्लॉयी के 58 साल के हो जाने पर उसका रिटायरमेंट हो जाता है। उसे ईपीएफ के पीएफ में जमा रकम एकमुश्त मिल जाती है। EPS में जमा पैसे से उसे हर महीने पेंशन मिलती है

अपडेटेड Jul 14, 2023 पर 4:22 PM
विधवा पेंशन के लिए न्यूनतम अमाउंट पहले से तय है। यह 1000 रुपये है। इसका मतलब है कि एंपलॉयी की मौत पर उसकी पत्नी को कम से कम 1000 रुपये की पेंशन मिलेगी।

प्राइवेट सेक्टर में एंप्लॉयीज के रिटायरमेंट की उम्र 58 साल है। कम से कम 10 साल नौकरी करने वाला व्यक्ति ईपीएफ के तहत जमा फंड के साथ ही पेंशन का हकदार हो जाता है। यह पेंशन एंप्लॉयी के रिटायरमेंट के बाद मिलती है। सवाल है कि अगर एंप्लॉयी की मौत 58 साल की उम्र पूरी करने से पहले हो जाती है तो क्या उसकी पत्नी को पेंशन मिलेगी? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि कम उम्र में मौत के कई मामले देखने को मिले हैं। कई मामले ऐसे जिनमें शारीरिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ व्यक्ति की मौत अचानक दिल का दौरा पड़ने से हो गई। ऐसी स्थिति में ईपीएफ (EPF) से मिलने वाली रकम से मृतक एंप्लॉयी के परिवार को बहुत मददगार साबित होती है।

ईपीएस के तहत मिलती है पेंशन

पहले यह जान लेना जरूरी है कि ईपीएफ क्या है और इसके जरिए एंप्लॉयी को क्या बेनेफिट मिलते हैं। प्राइवेट सेक्टर के एंप्लॉयीज इंप्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) के तहत आते हैं। इस फंड का प्रबंधन EPFO करता है। प्राइवेट सेक्टर का हर एंप्लॉयी ईपीएफ के तहत हर महीने कंट्रिब्यूशन करता है। यह कंट्रिब्यूशन उसकी सैलरी से काट लिया जाता है। यह एंप्लॉयी की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी होता है। इतना ही पैसा एंप्लॉयर अपने एंप्लॉयी के पीएफ अकाउंट में हर महीने कंट्रिब्यूट करता है।


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रिटायरमेंट के लिए 58 साल की उम्र तय

एंप्लॉयी और एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन का कुछ हिस्सा पीएफ में जाता है और कुछ हिस्सा ईपीएस में जाता है। हर महीने इन दोनों फंडों में पैसे जमा होते रहते हैं। एंप्लॉयी के 58 साल के हो जाने पर उसका रिटायरमेंट हो जाता है। उसे ईपीएफ के पीएफ में जमा रकम एकमुश्त मिल जाती है। EPS में जमा पैसे से उसे हर महीने पेंशन मिलती है। नियम के मुताबिक, अगर 58 साल के पहले एंप्लॉयी की मौत हो जाती है तो उसकी पत्नी को विधवा पेंशन मिलती है। एक्सपर्ट का कहना है कि इसके लिए उसे पति की उम्र 58 साल होने का इंतजार नहीं करना पड़ता है। साथ ही पीएफ फंड में जमा पूरी रकम नॉमिनी को मिल जाती है। ज्यादातर लोग पत्नी को नॉमिनी बनाते हैं।

पत्नी को पेंशन के लिए क्या है नियम?

जहां तक पेंशन अमाउंट का संबंध है तो अगर रिटायरमेंट के बाद एंप्लॉयी की मौत हो जाती है तो उसकी पत्नी को आधा अमाउंट पेंशन के तहत मिलता है। लेकिन, अगर एंप्लॉयी की मौत रिटायरमेंट की उम्र से पहले ही हो जाती है तो पत्नी को बतौर पेंशन वह रकम मिलती है तो व्यक्ति को रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में मिलती। एंप्लॉयी के निधन और मौत के बीच जितना ज्यादा अंतर होगा उतना ही कम पेशंन अमाउंट होगा। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेंशन ई बातों पर निर्भर करती है। लेकिन, विधवा पेंशन के लिए न्यूनतम अमाउंट पहले से तय है। यह 1000 रुपये है। इसका मतलब है कि एंपलॉयी की मौत पर उसकी पत्नी को कम से कम 1000 रुपये की पेंशन मिलेगी।

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