क्या हर PF खाताधारक को रिटायरमेंट के बाद मिलती है पेंशन? जानें EPS से जुड़ा यह नया जरूरी नियम

EPF Subscriber Pension Eligibility Criteria: भले ही ईपीएफ और EPS आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग स्कीम्स हैं और दोनों के नियम भी अलग हैं। रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली मासिक पेंशन कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत दी जाती है, न कि ईपीएफ के तहत

अपडेटेड Jul 11, 2026 पर 1:41 PM
हर पीएफ सब्सक्राइबर को पेंशन नहीं मिल सकती

EPF Pension Eligibility Rules Criteria: नौकरीपेशा लोगों के बीच अक्सर यह आम धारणा होती है कि अगर उनकी सैलरी से ईपीएफ (EPF) यानी कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान हो रहा है, तो वे रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन के हकदार हो गए हैं। लेकिन यह बात पूरी तरह सच नहीं है।

भले ही ईपीएफ (EPF) और EPS आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग स्कीम्स हैं और दोनों के नियम भी अलग हैं। रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली मासिक पेंशन कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत दी जाती है, न कि ईपीएफ के तहत। आइए समझते हैं कि किन पीएफ खाताधारकों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है और इसके लिए क्या शर्तें हैं।

1. कैसे जमा होता है पेंशन का पैसा?


जब आप किसी कंपनी में नौकरी करते हैं, तो आपकी बेसिक सैलरी और डीए (Basic + DA) का 12% हिस्सा आपके ईपीएफ खाते में जाता है। इतनी ही राशि (12%) आपकी कंपनी भी देती है। लेकिन कंपनी के इस 12% योगदान के दो हिस्से होते हैं:

8.33% हिस्सा: यह सीधे आपके ईपीएस यानी पेंशन खाते में जमा होता है।

3.67% हिस्सा: यह आपके ईपीएफ खाते में जाता है।

यानी आपकी मासिक पेंशन का पूरा फंड कंपनी द्वारा दिए जाने वाले इसी 8.33% हिस्से से तैयार होता है।

2. पेंशन पाने के लिए सबसे जरूरी शर्त: 10 साल की नौकरी

हर पीएफ सब्सक्राइबर को पेंशन नहीं मिल सकती। ईपीएस के नियमों के मुताबिक, मासिक पेंशन पाने के लिए कर्मचारी को कम से कम 10 साल की योग्य सेवा पूरी करनी अनिवार्य है।

अगर आपकी कुल नौकरी एक या एक से अधिक कंपनियों को मिलाकर 10 साल या उससे अधिक की हो जाती है, तभी आप रिटायरमेंट के बाद नियमित मासिक पेंशन के पात्र बनते हैं।

जब आप एक नौकरी से दूसरी नौकरी में जाते हैं, तो सर्विस की निरंतरता बनाए रखने के लिए अपने पुराने ईपीएफ और ईपीएस अकाउंट को नए अकाउंट के साथ ट्रांसफर जरूर कराएं। ऐसा न करने पर आपकी कुल सर्विस अवधि की गणना में दिक्कत आ सकती है।

3. किस उम्र में शुरू होती है पेंशन?

58 साल की उम्र: ईपीएस योजना के तहत पेंशन शुरू होने की सामान्य उम्र 58 वर्ष तय की गई है। 10 साल की नौकरी पूरी करने वाले कर्मचारी 58 साल की उम्र पार करने के बाद पूरी पेंशन के हकदार हो जाते हैं।

अर्ली पेंशन: कुछ विशेष नियमों के तहत, यदि कोई कर्मचारी चाहे तो वह 50 वर्ष की आयु के बाद भी पेंशन का दावा कर सकता है। हालांकि, 58 वर्ष से पहले ली जाने वाली इस पेंशन को 'कम की गई पेंशन' कहा जाता है, जिसमें हर साल के हिसाब से कुछ प्रतिशत की कटौती की जाती है।

4. कितनी मिलेगी पेंशन? इन दो बातों पर करता है निर्भर

रिटायरमेंट के बाद आपकी मासिक पेंशन की राशि कितनी होगी, यह मुख्य रूप से दो प्रमुख बातों पर निर्भर करता है:

पेंशन योग्य वेतन: आपकी नौकरी के आखिरी महीनों का औसत वेतन क्या था।

पेंशन योग्य सेवा: आपने कुल कितने साल तक ईपीएस में योगदान दिया है।

आपकी नौकरी के साल जितने ज्यादा होंगे, आपकी मासिक पेंशन की रकम भी उतनी ही बेहतर होगी।

पहले से ही चेक करते रहें EPS अकाउंट

ज्यादातर कर्मचारी केवल अपने ईपीएफ अकाउंट का बैलेंस देखते रहते हैं और ईपीएस की पासबुक या सर्विस हिस्ट्री चेक करना भूल जाते हैं। रिटायरमेंट के समय किसी भी तरह की परेशानी या क्लेम रिजेक्शन से बचने के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप समय-समय पर अपनी कुल सर्विस अवधि और ईपीएस योगदान की जांच करते रहें। अगर नौकरी के कार्यकाल को लेकर कोई गड़बड़ी है, तो उसे नौकरी के दौरान ही सुधार लें ताकि बाद में पेंशन एप्लीकेशन आसानी से प्रोसेस हो सके।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।