EPF Account: रिटायरमेंट के तुरंत बाद PF का पूरा पैसा निकालना बड़ी भूल! 3 साल तक मिलता है एक्स्ट्रा ब्याज, जानें नियम

EPF Account Rules After Retirement: आपकी दशकों तक सैलरी से होने वाली कटौती, कंपनी के योगदान और चक्रवृद्धि ब्याज से एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार हो जाता है। लेकिन, रिटायरमेंट का दिन आते ही कई लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि पीएफ का पूरा पैसा तुरंत निकालना अनिवार्य है, वरना वह डूब जाएगा या उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाएगा। असल में ये बातें पूरी तरह झूठी है

अपडेटेड Aug 03, 2026 पर 6:06 PM
रिटायरमेंट के बाद भी आपका पीएफ अकाउंट एक्टिव रहता है और उस पर ब्याज मिलता रहता है

EPF Withdrawal Options After Retirement: अधिकांश नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एंप्लाइज प्रॉविडेंट फंड (EPF) उनकी जीवनभर की कमाई और रिटायरमेंट का सबसे बड़ा वित्तीय सहारा होता है। दशकों तक सैलरी से होने वाली कटौती, कंपनी के योगदान और चक्रवृद्धि ब्याज से एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार हो जाता है। लेकिन, रिटायरमेंट का दिन आते ही कई लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि पीएफ का पूरा पैसा तुरंत निकालना अनिवार्य है, वरना वह डूब जाएगा या उस पर ब्याज मिलना बंद हो जाएगा।

सच्चाई यह है कि रिटायरमेंट के बाद भी आपका पीएफ अकाउंट एक्टिव रहता है और उस पर ब्याज मिलता रहता है। आइए आपको बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद पीएफ के पैसे का क्या होता है, आपको तुरंत पैसा निकालना चाहिए या नहीं और सही वित्तीय फैसला कैसे लें।

रिटायरमेंट के तुरंत बाद पूरा पैसा निकालना जरूरी नहीं


बहुत से लोग सोचते हैं कि नौकरी के आखिरी दिन ही पीएफ क्लेम फॉर्म भर देना चाहिए। हालांकि, EPFO के नियमों के मुताबिक ऐसा करना अनिवार्य नहीं है। तत्काल निकासी की हड़बड़ी न करें। अगर आपको रिटायरमेंट के तुरंत बाद किसी बड़े खर्च जैसे- कर्ज चुकाना, घर की मरम्मत या बच्चों की शादी के लिए पैसों की जरूरत नहीं है, तो आप अपने पीएफ बैलेंस को खाते में ही छोड़ सकते हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से निर्णय लें।

रिटायरमेंट के बाद भी मिलता रहता है पीएफ पर ब्याज

यह एक ऐसी बात है जिसे ज्यादातर रिटायर्ड कर्मचारी नजरअंदाज कर देते हैं:

3 साल तक मिलता है ब्याज: ईपीएफओ के नियमों के तहत, रिटायरमेंट के बाद भी अगले 3 साल तक आपके पीएफ अकाउंट में जमा बैलेंस पर सरकारी तय दरों के हिसाब से ब्याज मिलता रहता है।

इनऑपरेटिव अकाउंट: अगर रिटायरमेंट के 3 साल बाद तक खाते से कोई निकासी नहीं की जाती है, तब जाकर वह खाता 'इनऑपरेटिव' श्रेणी में आता है।

बैंक सेविंग्स अकाउंट से बेहतर रिटर्न: अगर आप पीएफ का पूरा पैसा निकालकर साधारण बैंक सेविंग्स अकाउंट में रख देते हैं, तो वहां आपको 3% से 4% ब्याज मिलेगा। जबकि ईपीएफ में यह 8% से अधिक रहता है। इसलिए बिना वजह पैसा निकालकर बैंक में रखना घाटे का सौदा हो सकता है।

सिर्फ पीएफ ही नहीं, EPS पेंशन का भी रखें ध्यान

कर्मचारी अक्सर केवल पीएफ बैलेंस (EPF) पर ध्यान देते हैं और पेंशन कॉम्पोनेंट (EPS) को भूल जाते हैं:

मासिक पेंशन: अगर आपने कम से कम 10 साल तक ईपीएफओ में योगदान दिया है, तो आप एंप्लाइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत 58 साल की उम्र से हर महीने पेंशन पाने के हकदार होते हैं।

फंड और इनकम का संतुलन: पीएफ आपको एकमुश्त रकम देता है, जबकि ईपीएस पेंशन आपको रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक निश्चित आय की गारंटी देती है।

रिटायरमेंट के बाद पीएफ फंड मैनेज करने के 4 बेहतरीन नियम

जल्दबाजी में इमोशनल फैसले न लें: रिटायर होते ही रिश्तेदारों, दोस्तों या एजेंटों की सलाह पर पूरा पैसा किसी जोखिम भरी स्कीम या रियल एस्टेट में तुरंत न लगाएं। थोड़ा समय लें और सोच-समझकर रिटायरमेंट प्लान बनाएं।

चरणबद्ध निकासी का तरीका अपनाएं: पूरी रकम एक बार में निकालने के बजाय, अपनी मासिक जरूरतों के हिसाब से सिस्टमैटिक तरीके से पैसा निकालें या उसे सुरक्षित फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) या म्यूचुअल फंड SWP में इन्वेस्ट करें।

अपनी कुल रिटायरमेंट इनकम का आकलन करें: पीएफ, पेंशन, पर्सनल सेविंग्स, एफडी और किराए आदि से होने वाली कुल मासिक आय को जोड़कर ही अपना मंथली बजट तय करें।

टैक्स और लिक्विडिटी का ध्यान रखें: रिटायरमेंट के बाद पैसे को ऐसी जगह रखें जहां से इमरजेंसी में तुरंत फंड निकाला जा सके और जिस पर टैक्स का बोझ भी कम पड़े।

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