निवेश के मामले में इन 5 गलतियों से बचेंगे तो कभी नहीं होगी पैसे की कमी

लंबी अवधि में निवेश से बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। लेकिन, इसके लिए कुछ गलतियों से बचना होगा। अक्सर लोग निवेश की शुरुआत तो करते हैं लेकिन बाद में वे ऐसी गलतियां करते हैं जिससे बड़ा फंड तैयार करना मुश्किल हो जाता है

अपडेटेड May 13, 2023 पर 3:00 PM
कई निवेशक गलतियां करने के बाद निवेश के सबक सीखते हैं। लेकिन, निवेश में गलतियां जितनी कम की जाए, उतना अच्छा है।

दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे (Warren Buffett) ने इनवेस्टमेंट के बारे में एक दिलचस्प सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि निवेश का पहला नियम यह है कि कभी पैसे मत डुबाओ। दूसरा नियम यह है कि आपको कभी पहले नियम को नहीं भूलना चाहिए। आज बफे का यह सिद्धांत बहुत मायने रखता है। इसकी वजह यह है कि आज इनवेस्टर्स खासकर युवा निवेशकों के सामने इनवेस्टमेंट के कई विकल्प हैं। इनमें कई ऐसे विकल्प भी हैं, जिनका रिटर्न बहुत अट्रैक्टिव नहीं है। कई निवेशक गलतियां करने के बाद निवेश के सबक सीखते हैं। लेकिन, निवेश में गलतियां जितनी कम की जाए, उतना अच्छा है। आइए जानते हैं कि इनवेस्टमेंट में हमें किन बातों का ख्याल रखना चाहिए। हम उन गलतियों के बारे में जानेंग, जिनसे हमें बचना जरूरी है।

कम्पफर्ट जोन से बाहर नहीं निकलना

इंडिया में लोग बचत करने पर ध्यान देते हैं। हालांकि, निवेश के मामले में ज्यादातर लोगों की सोच कंजरवेटिव होती है। लोग ज्यादातर बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट, गोल्ड और रियल एस्टेट जैसे निवेश के पारंपरिक विकल्पों में दिलचस्पी दिखाते हैं। लोगों को यह लगता है कि इनमें रिस्क कम है। लेकिन, उन्हें इस बात को समझना होगा कि इनवेस्टमेंट में थोड़ा रिस्क लेने से रिटर्न कई गुना बढ़ जाता है। एफडी में निवेश करने वाले लोग लंबी अवधि में शेयरों से कई गुना प्रॉफिट कमाने का मौका चूक जाते हैं। इसलिए जब बात निवेश की हो तो हमें कम्फर्ट लेवल से बाहर निकलना जरूरी है। हमें समय के साथ चलना होगा। हमें निवेश के उन विकल्पों का इस्तेमाल करना होगा, जिनमें पैसे को कई गुना बढ़ाने की क्षमता है।


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एसेट एलोकेशन पर ध्यान नहीं देना

जब क्रिप्टोकरेंसी का प्रदर्शन अच्छा होता है तो इनवेस्टर्स की दिलचस्पी उसमें बढ़ जाती है। जब शेयर बाजार तेजी से चढ़ रहा होता है तो लोग शेयरों में पैसे लगाना शुरू कर देते हैं। जब मार्केट में गिरावट आती है तो लोग शेयरों को बेचकर पैसे बैंक एफडी में लगाना शुरू कर देते हैं। सच यह है कि हमें अपनी रणनीति में बदलाव करने की जगह एसेट एलोकेशन पर ध्यान देना चाहिए। किसी एक एसेट में निवेश करना बहुत रिस्की है। इसकी वजह यह है कि हर एसेट क्लास की अपनी खासियत होती है। कुछ एसेट क्लास ज्यादा रिटर्न देते हैं, लेकिन उनमें रिस्क ज्यादा होता है। कुछ एसेट क्लास कम रिटर्न देते हैं लेकिन उनमें रिस्क ज्यादा होता है। इसीलिए हमें अपने निवेश को कई एसेट क्लास में बांटना जरूरी है। इसे एसेट एलोकेशन कहते हैं।

निवेश को ग्रो करने का मौका नहीं देना

इनवेस्टमेंट से शानदार रिटर्न कमाने के लिए धैर्य बहुत जरूरी है। लंबे समय में निवेश से बहुत अच्छा रिटर्न मिलता है। दरअसल, हर अच्छे नतीजे के लिए हमें इंतजार करना पड़ता है। किसान जब बीज लगाता है तो उसे पौधे उगने तक का इंतजार करना पड़ता है। फिर, वह पौंधे को सींचता है। तब जाकर उसे फसल मिलती है। इस पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। अगर वह जल्द बड़े होने के लिए पौधे को एक जगह से निकालकर दूसरी जगह लगाना शुरू कर दें तो पौधे को बढ़ने का मौका नहीं मिलेगा। यही बात निवेश में भी लागू होती है। इसलिए निवेश करने के बाद आपको इंतजार करना होगा। बाजार के उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देना होगा।

लॉस देने वाले इनवेस्टमेंट को बनाए रखना

अगर कोई एसेट लगातार लॉस दे रहा है तो इसका मतलब यह है कि कुछ-न-कुछ गड़बड़ है। शरीर के किसी अंग में खराबी होने पर कई बार उसे सर्जरी की मदद से शरीर से बाहर निकाल देना जरूरी हो जाता है। यही बात इनवेस्टमेंट के मामले में भी लागू होती है। यही वजह है कि बफे ने कहा था कि कंपनी खरीदें न कि शेयर। इसका मतलब है कि आप निवेश से पहले जितना ज्यादा रिसर्च करेंगे, आपका निवेश सफल रहने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। कई इनवेस्टर्स रिसर्च के जरिए वैल्यू स्टॉक का पहचान करते हैं। वे उन शेयरों में पैसे लगाते हैं और लंबे समय तक नुकसान देने वाले शेयरों को पोर्टफोलियो से बाहर कर देते हैं।

निवेश शुरू करने के लिए इंतजार करना

कई लोग निवेश शुरू करने के लिए सही समय का इंतजार करते हैं। यह सोच गलत है। बिल्कुल निवेश नहीं करने से अच्छा है कि हम उस निवेश माध्यम में पैसे लगाना शुरू कर दें, जिसकी हमें समझ है। अगर किसी निवेशक यह सोचता है कि स्टॉक मार्केट की समझ होने के बाद वह शेयरों में निवेश शुरू करेगा तो वह गलती कर रहा है। आज ऐसे कई निवेश माध्यम बाजार में उपलब्ध हैं, जो थोड़ी फीस लेकर आपके पैसे को सही जगह लगाते हैं। इससे आपके पैसे पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ जाता है। म्यूचुअल फंड इसका एक उदाहरण है। इसलिए आपको निवेश शुरू करने के लिए किसी चीज का इतंजार नहीं करना चाहिए।

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