नौकरी लगते ही व्यक्ति वित्तीय रूप से आजाद (Financial Freedom) हो जाता है। माता-पिता से पैसे मांगने की जरूरत नहीं रह जाती है। सबसे पहले तो व्यक्ति उन सभी कामों को करना चाहता है, जो माता-पिता के पैसे से वह नहीं करना चाहता था। इनमें अपनी पसंद के महंगे ब्रांडेड कपड़े, एक्सेसरी, हॉलीडे प्लान आदि शामिल हो सकते हैं। अपने शौक को पूरा करने में कोई खराबी नहीं है। लेकिन, कई बार शौक को पूरा करने में व्यक्ति में ऐसे खर्च की आदत पड़ जाती है, जो बहुत जरूरी नहीं होते हैं। धीरे-धीरे समय हाथ से निकल जाता है। व्यक्ति पर जिम्मेदारियों का बोझ पड़ता है तो उसे समझ आता है कि उसने सेविंग्स की अनदेखी कर दी। शादी होने और बच्चे होने के बाद आपके पास सेविंग्स के लिए कम गुंजाइश बचती है। इसलिए आपको नौकरी लगते ही ये 5 काम शुरू कर देना चाहिए।
जीवन बीमा की टर्म पॉलिसी खरीद लें
जीवन बीमा की टर्म पॉलिसी कम उम्र में खरीदने पर प्रीमियम कम आता है। दूसरा, यह प्रीमियम पॉलिसी की अवधि तक फिक्स्ड रहता है। इसलिए कम उम्र में पॉलिसी खरीदना जरूरी है। आपको सिर्फ यह बात ध्यान रखनी होगी कि आपको टर्म पॉलिसी लेनी है। आपको एन्डॉमेंट पॉलिसी नहीं खरीदनी है। इसकी वजह यह है कि टर्म पॉलिसी का प्रीमियम कम होता है। इससे कम पैसे में ज्यादा लाइफ कवर वाली पॉलिसी खरीदना आसान हो जाता है। चूंकि, इंश्योरेंस का मकसद आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है, जिससे ज्यादा कवर वाली पॉलिसी ही खरीदनी चाहिए।
सरकारी नौकरी के मुकाबले प्राइवेट नौकरी के मौके ज्यादा होते हैं। प्राइवेट नौकरी को सरकारी नौकरी के मुकाबले कम सुरक्षित माना जाता है। अच्छी कंपनियां भी अपने बिजनेस की जरूरत के हिसाब से एंप्लॉयीज की संख्या बढ़ाती-घटती रहती है। आए दिन हमें ऐसी खबरें सुनने को मिलती है कि A कंपनी ने या B कंपनी ने बड़ी संख्या में एंप्लॉयीज की छंटनी कर दी है। ऐसा होने पर हमें नई नौकरी तलाशनी पड़ती है। कभी जल्द तो कभी देर से दूसरी नौकरी मिलती है। इस अवधि में इमर्जेंसी फंड बहुत काम आता है। आपको दूसरों से पैसे मांगने की जरूरत नहीं पड़ती है।
म्यूचुअल फंड में SIP शुरू कर दें
म्यूचुअल फंड का SIP आपको हर महीने निश्चित रकम इनवेस्ट करने की सुविधा देता है। इसलिए आप अपनी क्षमता के साथ हर महीने अनुशासित रूप से निवेश के लिए SIP शुरू कर दें। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम में शुरू करने से लंबी अवधि में आपके लिए अच्छा फंड तैयार हो जाएगा। इसकी वजह यह है कि आपको कपाउंडिंग का फायदा मिलता है। दूसरा, इक्विटी का रिटर्न भी लंबी अवधि में निवेश के दूसरे ऑप्शन से काफी ज्यादा होता है। 10-15 साल में आपके लिए बहुत अच्छा फंड तैयार हो जाएगा, जिसका इस्तेमाल आप घर या गाड़ी खरीदने या बच्चे को विदेश पढ़ाने के लिए कर सकते हैं।
कोरोना की महामारी से हमें यह सबक मिला है कि अचानक मेडिकल इमर्जेंसी पड़ने पर हमारी पूरी बचत साफ हो सकती है। इलाज का खर्च बचत के पैसे से करना समझदारी नहीं है। इलाज कराना जिस तरह से दिन ब दिन महंगा हो रहा है, उससे बचत के पैसे से इलाज का खर्च उठान कई बार मुश्किल हो जाता है। इसलिए हर साल प्रीमियम चुकाकर अच्छी कवर वाली हेल्थ पॉलिसी खरीदना समझदारी है। इससे आपको टैक्स-सेविंग्स में भी मदद मिलेगी। अब कंपनियां तो मंथली इंस्टॉलमेंट पर भी प्रीमियम चुकाने की सुविधा दे रही हैं।
फाइनेंशियल प्लानिंग बना लें
आपके लिए एक फाइनेंशियल प्लानिंग बनाना लेना भी जरूरी है। फिर आपको इस पर अमल करने की भी कोशिश करनी होगी। यह इसलिए जरूरी है कि जैसे जैसे आपकी जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, वैसे-वैसे आपको अपने फानेंशियल प्लान के हिसाब से उस पर अमल करना होगा। आपको पहली बार पिता बनते ही बच्चे के लिए निवेश शुरू कर देना होगा। उसी तरह दूसरे बच्चे के लिए भी आपको निवेश शुरू कर देना होगा। फिर, आपको घर खरीदने के अपने प्लान के हिसाब से पैसे जुटाने शुरू कर देना होगा। कार खरीदने के लिए भी आपको पैसे बचाने शुरू कर देने होंगे। इसके लिए आपका बोनस बहुत काम आएगा। साथ ही आपको हर साल इंक्रीमेंट होने पर भी बढ़े हुए पैसे के बड़े हिस्से का इस्तेमाल निवेश के लिए करना होगा।