अगर चेक बाउंस हुआ तो आप कभी दूसरा बैंक अकाउंट नहीं ओपन कर सकेंगे, नियमों को सख्त बना रही सरकार

सरकार चेक बाउंस (Cheque Bounce) होने के नियमों को बहुत सख्त बनाने जा रही है। दरअसल, चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार कड़े कदम उठाना चाहती है। ऐसे मामलों की वजह से लीगल सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है

अपडेटेड Oct 10, 2022 पर 10:04 AM
चेक बाउंस के मामले को लोन डिफॉल्ट की तरह मानने पर भी चर्चा हुई। इसकी जानकारी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को दी जाएगी।

अगर आप किसी को पेमेंट करने के लिए चेक का इस्तेमाल करते हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। सरकार चेक बाउंस (Cheque Bounce) से जुड़े नियमों को बहुत सख्त बनाने जा रही है। दरअसल, चेक बाउंस के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार कड़े कदम उठाना चाहती है। ऐसे मामलों की वजह से लीगल सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है। इस मसले पर फाइनेंस मिनिस्ट्री (Finance Ministry) की एक उच्च-स्तरीय बैठक में चर्चा हुई है।

फाइनेंस मिनिस्ट्री की बैठक में चेक बाउंस के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए कई उपायों पर विचार किया गया। इनमें चेक बाउंस करने पर उसे जारी करने वाले व्यक्ति के दूसरे बैंक अकाउंट से पेमेंट करने और उसके नए बैंक अकाउंट ओपन करने पर रोक जैसे उपाय शामिल हैं। दूसरे अकाउंट से पैसे का पेमेंट तभी होगा, जब उसके पहले अकाउंट में बैलेंस पर्याप्त नहीं होगा।

चेक बाउंस के मामले को लोन डिफॉल्ट की तरह मानने पर भी चर्चा हुई। इसकी जानकारी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को दी जाएगी। इससे व्यक्ति के क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ेगा। हालांकि, अभी सिर्फ इन विकल्पों पर चर्चा हुई। हर विकल्प के कानूनी पहलू की जांच करने के बाद ही अंतिम फैसला होगा।


यह भी पढ़े: Business Idea: घर बैठे करना चाहते हैं मोटी कमाई तो शुरू करें तेल का कारोबार, जानिए कैसे करें शुरू

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर चेक बाउंस के मामलों को रोकने के लिए ये उपाय लागू किए जाते हैं तो फिर ऐसे मामले कोर्ट नहीं पहुंचेंगे। इसका दूसरा फायदा यह होगा कि लोग पेमेंट के लिए चेक का इस्तेमाल करने की जगह पेमेंट के ऑनलाइन तरीकों का इस्तेमाल करेंगे।

जानकारों का कहना है कि नियमों में बदलाव से बिजनेस करने में भी आसानी (Ease of doing Business) होगी। इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि इस बारे में नए नियमों को लागू करने से पहले सभी बैंकों के डेटा इंटिग्रेट किए जाएंगे।

अभी Negotiable Instrument Act, 1981 के सेक्शन 138 के तहत चेक चेक बाउंस के मामलों में कार्रवाई होती है। आम तौर पर चेक जारी करने व्यक्ति के बैंक अकाउंट में पर्याप्त पैसे नहीं होने पर चेक बाउंस होता है।

चेक बाउंस होने पर सेक्शन 138 के तहत शिकायत की जा सकती है। इसके खिलाफ कोर्ट में भी मामला दाखिल किया जा सकता है। आरोप साबित होने पर चेक जारी करने वाले व्यक्ति को अधिकतम दो साल जेल की सजा या चेक से जुड़े अमाउंट का दोगुना जुर्माना लगाया जा सकता है। व्यक्ति के खिलाफ जुर्माने और जेल  दोनों की सजा हो सकती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।