नए और पुराने टैक्स सिस्टम में क्या अलग है और इनमें से किसे चुनना चाहिए इसमें आपकी मदद के लिए हम आपको इनके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे रहे हैं। नए टैक्स सिस्टम को चुनने का विकल्प सभी व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए उपलब्ध है। नए सिस्टम में 15 लाख रुपये तक की इनकम पर कम स्लैब रेट्स पर टैक्स देना होता है।
इसमें टैक्स स्लैब रेट्स 5%, 10%, 15%, 20% और 25% हैं जो 2.5 लाख रुपये की बेसिक एग्जेम्प्शन से शुरू होकर इनकम में प्रत्येक 2.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी के साथ लागू होते हैं।
अगर आप नए टैक्स सिस्टम को चुनना चाहते हैं तो आपको पुराने सिस्टम के तहत मिलने वाली कई टैक्स डिडक्शन और एग्जेम्प्शन को छोड़ना होगा। नौकरीपेशा लोग स्टैंडर्ड डिडक्शन, हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और लीव ट्रैवल असिस्टेंस (LTA) जैसे बड़े बेनेफिट नहीं ले सकेंगे। इसके अलावा सेक्शन 80C के तहत EPF, PPF, NSC, ELSS, स्कूल फीस और होम लोन चुकाने पर डिडक्शंस भी नहीं मिलेंगी।
नए टैक्स सिस्टम में सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम और 80 CCD(1) और 80 CCD(1B) के तहत NPS के लिए भी नौकरीपेशा और स्व-रोजगार दोनों कैटेगरी में आने वाले टैक्सपेयर्स को डिडक्शन का फायदा नहीं मिलेगा।
रिटायर्ड सीनियर सिटीजंस को नए सिस्टम में उनके पिछले रोजगार से जुड़ी पेंशन के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन उपलब्ध नहीं है। सीनियर सिटीजंस के लिए पोस्ट ऑफिस और बैंकों में जमा राशि पर इंटरेस्ट के लिए 50,000 रुपये तक की डिडक्शन भी नहीं मिलेगी।
नौकरीपेशा लोगों को स्टैंडर्ड डिडक्शन, HRA, LTA जैसे बेनेफिट्स को छोड़ना होगा और एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड में योगदान, लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम, स्कूल फीस, होम लोन की मूल रकम को चुकाने जैसे बहुत से अनिवार्य आइटम होंगे। स्व-रोजगार वाले जिन लोगों ने होम लोन लिया है उनके लिए भी नए सिस्टम को चुनना ठीक नहीं होगा।
नया टैक्स सिस्टम उन्हीं लोगों के लिए अच्छा है जिनके पास नकदी की समस्या है और वे सेक्शन 80C के तहत पूरे बेनेफिट नहीं ले सकते और जिनके पास कोई हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है या होम लोन नहीं चल रहा।
नौकरीपेशा लोगों के पास प्रत्येक वर्ष दोनों सिस्टम में से एक को चुनने का विकल्प है। स्व-रोजगार वाले लोग एक बार नए सिस्टम को चुनने के बाद पुराने सिस्टम पर वापस नहीं आ सकते।
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