देरी से GST रिटर्न भरने वाले कारोबारियों को ब्याज समेत इनपुट टैक्स क्रेडिट लौटाने के नोटिस मिल रहे हैं। डेडलाइन के बाद लेट फीस और ब्याज चुका कर रिटर्न भरने के बावजूद नोटिस मिलने से कारोबारी परेशान हैं। सूत्रों के मुताबिक देश भर में 2 लाख से ज्यादा कारोबारियों को 3 साल तक के पुराने मामलों में नोटिस भेजे जा रहे हैं।
जिन कारोबारियों ने भी सालाना डेडलाईन खत्म होने के बाद लेटफीस और ब्याज़ चुका कर अपना जीएसटी रिटर्न भरा उनके लिए नई मुसीबत पैदा हो गई है। दरअसल विभाग जीएसटी के एक नियम का हवाला देकर क्लेम की गई ITC यानि इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्याज़ के साथ लौटाने के लिए नोटिस पर नोटिस भेज रहा है। कोल्हापुर के एक कारोबारी को भी जुलाई 2017 से मार्च 2018 तक का साढ़े तीन लाख का ITC क्लेम लौटाने के लिए ऐसा ही नोटिस आया है।
अकेले मध्य प्रदेश के भोपाल में ही 20 हज़ार से ज्यादा नोटिस भेजे गए हैं। जीएसटी कानून के सेक्शन 16(4) के मुताबिक सितबंर के रिटर्न के साथ यानि 20 अक्टूबर तक ही पिछले वित्तवर्ष का ITC क्लेम किया जा सकता है। उसके बाद ITC रोकने का प्रावधान है। अब जिन कारोबारियों ने भी लेटफीस और ब्याज़ के साथ जीएसटी चुका कर ITC क्लेम किया है उनके लिए जीएसटी का ये प्रावधान बड़ी मुसीबत बन गया है। एक्पर्ट्स का कहना है कि रिटर्न भरने के बावजूद किसी भी कारोबारी का क्लेम रोकना या वापस मांगना न्यायसंगत नहीं है।
एक RTI के मुताबिक सरकार ने सितंबर 2021 तक लेटफीस से 7067 करोड़ और ब्याज़ से 9454 करोड़ की वसूली की है। एक्पर्ट्स का कहना है कि लेट फीस और ब्याज़ चुका कर रिटर्न भरने के बावजूद क्लेम लौटाने का नोटिस एक तरह से डबल टैक्सेशन है। लिहाज़ा सरकार को जीएसटी लागू होने के बाद शुरूआती 3-4 सालों तक इस बेहद कड़े कानून से राहत देने के बारे में विचार करना चाहिए।