इंडियन स्टॉक मार्केट्स का रिटर्न 7 साल में पहली बार निगेटिव रह सकता है

रॉयटर्स के इस पोल में 30 इक्विटी विश्लेषक शामिल थे। यह पोल 13 मई से 24 मई के बीच किया गया था

अपडेटेड May 25, 2022 पर 4:39 PM
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इस पोल में शामिल 70 फीसदी से ज्यादा भागीदारों का कहना था कि घरेलू बाजार में आने वाले 3 महीनों में वोलैटिलिटी और बढ़ती नजर आएगी

रॉयटर्स की ओर से हाल में कराए गए पोल से यह निकलकर आया है कि भारतीय इक्विटी मार्केट में 2022 में 7 साल में पहली बार सालाना गिरावट देखने को मिल सकती है। इस पोल के नतीजों के मुताबिक बढ़ती ब्याज दरों और घटती ग्लोबल ग्रोथ की संभावना के चलते बाजार के इस साल की भारी गिरावट से तेजी से उबरने की उम्मीद काफी कम है।

भारत सहित पूरी दुनिया में बढ़ती महंगाई, पूर्वी यूरोप का जियो पोलिटिकल तनाव, सप्लाई चेन में आई दिक्कतें कुछ ऐसी वजहें हैं जिन्होंने दुनिया के तमाम हिस्सो में इकोनॉमी और बाजार का खेल बिगाड़ने का काम किया है। महंगाई (मुद्रा स्फीति) पर नियत्रंण के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विकल्प अपना रहे हैं जिसके कारण मंदी का डर पैदा हो गया है। जिसको देखते हुए निवेशक इस समय जोखिम वाले निवेश से बाहर निकलते नजर आ रहे हैं।

इस साल अब तक बीएसई सेंसेक्स 7 फीसदी टूट चुका है। इस साल जनवरी के 61475.15 के हाई से सेंसेक्स अब तक 12 फीसदी टूट चुका है। वर्तमान स्थितियों में इस बात की उम्मीद नजर नहीं आ रही है कि सेंसेक्स जल्द ही फिर एक बार अपने जनवरी के हाई को छू पाएगा। हालांकि भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स का प्रदर्शन तुलनात्मक रुप से अभी भी बेहतर नजर आ रहा है। MSCI जैसा वर्ल्ड इंडेक्स इस साल अब तक 16 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है और इसी महीने की शुरुआत में यह इंडेक्स बीयर मार्केट जोन के काफी नजदीक आ गया था। गौरतलब है कि जब कोई इंडेक्स 20 फीसदी तक टूट जाता है तो यह माना जाता है कि वह बीयर मार्केट में प्रवेश कर चुका है।


रॉयटर्स के इस पोल में 30 इक्विटी विश्लेषक शामिल थे। यह पोल 13 मई से 24 मई के बीच किया गया था। इस पोल से यह भी निकलकर आया है कि बीएसई सेंसेक्स साल 2022 के अंत तक अपनी इस गिरावट के सिर्फ 40 फीसदी हिस्से की भरपाई कर पाएगा। सेंसेक्स साल के अंत तक सोमवार के 54288.61 के क्लोजिंग स्तर से सिर्फ 3.2 फीसदी की बढ़त दिखाते हुए 56000 का स्तर हासिल कर सकेगा।

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इस पोल में शामिल 70 फीसदी से ज्यादा भागीदारों का कहना था कि घरेलू बाजार में आने वाले 3 महीनों में वोलैटिलिटी और बढ़ती नजर आएगी। पोल में भाग लेने वाले अधिकतर एनालिस्ट का मनना था कि बाजार के लिए सबसे बड़ा खतरा बढ़ती ब्याज दरें हैं।

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