भारत का संगठित गोल्ड ज्वेलरी रिटेल सेक्टर मांग में गिरावट से जूझ रहा है। अनुमान है कि इस वित्त वर्ष यह 10 सालों की सबसे बड़ी गिरावट का सामना कर सकता है। सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें और ज्यादा आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भारी पड़ रहे हैं। क्रिसिल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस वित्त वर्ष यानि कि 2026-27 में ज्वेलरी की बिक्री की मात्रा में साल-दर-साल आधार पर 13-15 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। कुल मांग घटकर 620-640 टन रह जाएगी। यह 10 वर्षों में मांग का सबसे निचला स्तर होगा। इसमें महामारी से प्रभावित वित्त वर्ष 2021 को शामिल नहीं किया गया है।
क्रिसिल रेटिंग्स के डायरेक्टर हिमांक शर्मा का कहना है, "सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को दोगुना से भी ज्यादा करने का सरकार का फैसला सोने के आभूषणों की मांग के लिए एक बड़ी बाधा साबित होगा।" केंद्र सरकार ने हाल ही में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। मकसद है कि आयात घटे, जिससे व्यापार घाटे व रुपये पर दबाव कम किया जा सके। भारत ने वित्त वर्ष 2026 में 720 टन सोने का आयात किया था। इसके चलते देश से लगभग 72 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा बाहर गई।
FY26 में 55 प्रतिशत चढ़ीं सोने की कीमतें
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी के कारण घरेलू सोने की कीमतों में 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इससे खरीदने की क्षमता पर गहरा असर पड़ा। उपभोक्ता अब 16-22 कैरेट की रेंज में हल्के और कम कैरेट वाले गहनों के साथ-साथ जड़ाऊ गहनों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। पिछले दो वित्त वर्षों में सोने में निवेश की मांग में भी तेजी आई है। जहां गहनों की बिक्री में 25 प्रतिशत की गिरावट आई है, वहीं सोने की छड़ों और सिक्कों की बिक्री में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश के तौर पर ज्यादा देख रहे हैं।
रिटेलर्स का रेवेन्यू 20-25 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद
बिक्री की मात्रा में कमी के बावजूद, गोल्ड ज्वेलरी के संगठित खुदरा विक्रेताओं का रेवेन्यू इस वित्त वर्ष में 20-25 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण ऊंची कीमतें और सोने के बढ़े हुए दाम हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि खुदरा विक्रेता बिक्री की गति को बनाए रखने के लिए ज्यादा छूट भी दे सकते हैं। क्रिसिल का यह भी कहना है कि संगठित जौहरी फ्रेंचाइजी-बेस्ड मॉडलों के माध्यम से अपना विस्तार जारी रखे हुए हैं, खासकर टियर-II और टियर-III शहरों में। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आयात शुल्क में और बदलाव और उपभोक्ता धारणा में परिवर्तन ज्वेलरी सेक्टर के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।