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इंश्योरेंस खरीदने की जल्दबाजी में, कभी गलत पॉलिसी का चयन न कर बैठे

जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले नियम शर्तों को भलीभांति समझ लेना चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Jan 29, 2020 पर 9:06 AM
इंश्योरेंस खरीदने की जल्दबाजी में, कभी गलत पॉलिसी का चयन न कर बैठे

आमतौर पर लोग इनकम टैक्स बचाने के लिए कोई न कोई पॉलिसी खरीद लेते हैं। लोग पॉलिसी खरीदते समय से ये नहीं देखते हैं कि इसमें क्या नियम-शर्तें हैं। बल्कि टैक्स बचाने के लिए जो पॉलिसी मिल गई वही ले लेते हैं। जानकारों का मानना है कि लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां फिस्कल ईयर की चौथी तिमाही में अपनी एनुअल प्रीमियम इनकम का तकरीबन 50 फीसदी कमाती है। इसकी वजह ये है कि लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस की डिमांड हर साल जनवरी से मार्च के दौरान बढ़ जाती है। इसी समय लोग इनकम टैक्स एक्ट 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए निवेश करने के लिए तलाश करते हैं। हर साल तकरीबन 15-20 फीसदी लोग ऑर्गनाइज्ड सेक्टर में जॉब पाते हैं। उनकी इतनी इनकम होती है कि टैक्स देते हैं। लिहाजा वो निवेश करने की कोशिश करते हैं।

इंश्योरेंस खरीदने की जल्दबाजी

आज कल के कई युवा टैक्स बचाने के लिए हर साल तकरीबन 1 लाख रुपये निवेश करने की तलाश में रहते हैं। वो ये नहीं जानना चाहते हैं कि जिस पर आप निवेश कर रहे हैं वो प्रोडक्ट कैसा है। वो बिना देखे सिर्फ निवेश को आधार मानकर किसी भी तरह की पॉलिसी का चयन कर लेते हैं। वो ये भी नहीं देखते हैं कि जो पॉलिसी खरीद रहे हैं वो उनकी जरूरत की है या नहीं ।

ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे जब आज कल के युवाओं को निवेश के नाम पर यूलिप प्रोडक्ट्स थमा दिए जाते हैं। जबकि युवाओं को उन प्रोडक्ट्स के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। कई बार बहुत कम बीमा कवर के लिए भी महंगे प्लान खरीद लेते हैं। जबकि युवाओं को अपने पैरेंट्स पत्नी, बच्चों के फाइनेंशियल जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े इंश्योरेंस प्लान की आवश्यकता होती है। 

बता दें कि लाइफ इंश्योरेंस एक प्रकार का लॉन्ग टर्म अनुबंध (Contract) है। इंश्य़ोरेंस कंपनियों के साथ इस तरह के अनुबंध से जुड़ना आसान होता है। लेकिन उससे बाहर निकलना मुश्किल होता है। ऐसे में अगर कभी एकतरफा इस अनुबंध को खत्म कर देता है। तो अधिकतर प्रीमियम या कभी कभी जमा किए गए पूरे जब्त हो जाते हैं। लिहाज जब कंज्यूमर फोरम में जाते हैं तो फिर वहां पॉलिसी की नियम शर्तों के जरिए सुनवाई होती है। ऐसे में कोई छोटी-मोटी राशि ही वापस आती है या कभी-कभी कुछ भी नहीं मिलता।
कुल मिलाकर टैक्स बचाने के लिए बिना नियम शर्त पढ़ें कोई पॉलिसी ले लेते हैं। जिस टैक्स छूट की कटौती के लिए पॉलिसी ली जाती है। नतीजे ये निकलते हैं कि उस छूट से अधिक राशि खर्च हो जाती है।

फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए इंश्योरेंस

एक बार जब कोई व्यक्ति जल्दबाजी में गलत पॉलिसी खरीद लेता है। तो वो इंश्योरेंस कंपनियों को दोष नहीं दे सकता है और जीवन भर के लिए लाइफ इंश्योरेंस से दूर रहता है। उसे लाइफ इंश्योरेंस की जरूरत बनी रहेगी और वो फिर से पॉलिसी खरीद लेगा। लेकिन उम्मीद जाती जा रही हैं कि दूसरी बार पॉलिसी खरीदते समय वो समझदारी दिखाएगा। कोई भी पॉलिसी लेने से पहले उसके नियम और शर्तों को भली भांति समझ लेना चाहिए। अगर जरूरत हो तो एक से अधिक प्लान खरीदे जा सकते हैं और पॉलिसी की रकम, प्रीमियम और टेन्योर की राशि को एडस्ट किया जा सकता है ताकि टैक्स अधिक बचाया जा सके। लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के लिए पूरी साल पड़ा है। कभी भी बेहतर पॉलिसी का चयन कर सकते हैं। इसलिए चौथी तिमाही में जो होड़ मचती है उससे आप बच सकते हैं।

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