अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर इन दो इनवेस्टमेंट से जल्द छुटकारा पा लेने में है महिलाओं की भलाई

महिलाएं आम तौर पर इनवेस्ट करने में रिटर्न से ज्यादा ध्यान अपने पैसे की सुरक्षा पर देती हैं। इसकी उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। लंबे समय तक अनुशासन के साथ निवेश करने के बावजूद वे वेल्थ क्रिएट नहीं कर पती हैं

अपडेटेड Mar 06, 2023 पर 2:22 PM
दशकों से महिलाएं सोने में निवेश करती आ रही हैं। जब गोल्ड की कीमतें बढ़ती हैं तो वे खुश होती हैं। लेकिन, उन्हें गोल्ड ज्वेलरी को खरीदने और बेचने में शामिल कॉस्ट के बारे में ठीक तरह से पता नहीं होता।

मृण अग्रवाल

महिलाएं आम तौर पर इनवेस्ट करने में पैसे की सुरक्षा (safety of money) पर सबसे ज्यादा ध्यान देती हैं। इस वजह से उन्हें अपने इनवेस्टमेंट पर कम रिटर्न से संतोष करना पड़ता है। लेकिन, जब सामाजिक और आर्थिक स्थितियां तेजी से बदल रही हैं तो इस सोच को आप सही मानेंगे? दरअसल, महिलाएं अपने पैसे की सुरक्षा के लिए बड़ी कीमत चुकाती हैं। उन्हें बहुत कम रिटर्न (low return on investment) मिलता है, जिससे वे वेल्थ क्रिएट नहीं कर पाती हैं। अगर आप एक महिला हैं तो इसे आसानी से समझ सकती हैं। अगर आप पुरुष हैं तो आप अपनी पत्नी, मां या बहन के मामले में ऐसी स्थिति देख सकते हैं।

उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं


इसे हम एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझ सकते हैं। 34 साल की साशा पिछले 10 साल से इनवेस्ट करती आ रही हैं। जब उन्होंने नौकरी करनी शुरू की थी, तो दूसरे परिवारों की तरह उनके माता-पिता ने भी उन्हें सेविंग्स करने की सलाह दी थी। उन्होंने साशा को इनवेस्टमेंट-लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश करने की सलाह दी थी, क्योंकि इसमें टैक्स-बेनेफिट्स भी मिलता है। दूसरा, उन्होंने फ्यूचर सेक्योर करने के लिए गोल्ड खरीदने की राय दी थी।

साशा ने माता-पिता की सलाह को ध्यान में रख दोनों में निवेश शुरू कर किया। लेकिन, घर खरीदने के लिए जब उन्हें डाउन पेमेंट के वास्ते पैसों की जरूरत पड़ी तो उन्हें बहुत धक्का लगा। इंश्योरेंस पॉलिसी में उन्होंने जितना इनवेस्ट किया था, उसका 70 फीसदी पैसा ही उन्हें मिल रहा था। उन्होंने सोने में जितना निवेश किया था, उससे करीब 10 फीसदी कम अमाउंट उन्हें मिल रहा था।

गोल्ड निवेश के लिए अच्छा ऑप्शन नहीं

दशकों से महिलाएं सोने में निवेश करती आ रही हैं। जब गोल्ड की कीमतें बढ़ती हैं तो वे खुश होती हैं। लेकिन, उन्हें गोल्ड ज्वेलरी को खरीदने और बेचने में शामिल कॉस्ट के बारे में ठीक तरह से पता नहीं होता। जब आप सोने की ज्वेलरी खरीदते हैं तो करीब 30 फीसदी पैसा वेस्टेज और मेकिंग चार्ज में चला जाता है। 5-10 फीसदी डिडक्शन होता है। इससे मेकिंग कॉस्ट करीब 40 फीसदी तक पहुंच जाती है। हीरे के मामले में स्थिति और भी खराब है, क्योंकि उसकी रिसेल वैल्यू अच्छी नहीं मिलती।

पिछले कुछ समय से मार्केट में गोल्ड ज्वेलरी की स्कीम आ गई हैं। इनमें कुछ खास महीनों तक इनवेस्टर को पैसे जमा करने पड़ते हैं। फिर एक महीने का पैसा ज्वेलर कंट्रिब्यूट करता है। तय अवधि के बाद जो फंड तैयार होता है उससे इनवेस्टर गोल्ड ज्वेलरी खरीदता है। इनवेस्टर इसे एक डिपॉजिट स्कीम की तरह देखता है, लेकिन ज्वेलर के लिए यह छोटी अवधि में पूंजी की अपनी जरूरतें पूरा करने का एक तरीका होता है।

यह स्कीम किसी रेगुलेटर के दायरे में नहीं आती है। आपकी तरफ से किए जाने वाले डिपॉजिट को ज्वैलरी को एडवान्स पर्चेज के रूप में दिखाया जाता है। अगर ज्वेलर लापता हो जाता है तो इनवेस्टर के पास शिकायत करने का कोई ऑप्शन नहीं होता। दूसरा, इस डिपॉजिट स्कीम में जो फंड तैयार होता है उसका इस्तेमाल सिर्फ गोल्ड ज्वेलरी खरीदने के लिए किया जा सकता है। इससे आप गोल्ड कॉइन या बार नहीं खरीद सकते। इसे आप वापस भी नहीं ले सकते।

इसलिए अगर आप ऐसी किसी स्कीम में इनवेस्ट करने के बारे में सोच रहे हैं तो अच्छा रहेगा कि आप ऐसी ज्वेलरी खरीद लें जिसे आप पहनने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। बाकी पैसा आपस सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में इनवेस्ट कर दें। SGB में किसी तरह की छुपी कॉस्ट नहीं होती है। यह टैक्स के लिहाज से भी फायदेमंद है। मैच्योरिटी (8 साल) पर आपको पैसा इंटरेस्ट के साथ मिल जाता है। आपको कोई टैक्स भी नहीं देना पड़ता। सरकार SGB इश्यू करती है, जिससे किसी तरह का रिस्क भी नहीं है। ये स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड होते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर इन्हें बेचा जा सकता है।

इंश्योरेंस का इस्तेमाल इनवेस्टमेंट के लिए नहीं करें

यह समय गारंटीयुक्त रिटर्न की जगह मार्केट-लिंक्ड रिटर्न के बारे में सोचने का है। इंश्योरेंस आपको निवेश के लिए सुरक्षित लगता है, लेकिन जब आप इसके रिटर्न का कैलकुलेशन करते हैं तो बहुत निराश करता है। इनवेस्टमेंट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान का रिटर्न सालाना सिर्फ 4-5 फीसदी आता है। यह इनफ्लेशन के रेट से भी कम है। अगर तय समय से पहले पैसे निकालते हैं तो आपको अपने पूरे पैसे भी वापस नहीं मिलते हैं।

फिर कहां करें निवेश?

बैलेंस्ड एडवान्टेज फंड निवेश का बेहतर ऑप्शन है। ये फंड स्टॉक और बॉन्ड में निवेश करते हैं। ये मार्केट की स्थितियों के हिसाब से अपने एलोकेशन में बदलाव भी करते रहते हैं। एसेट एलोकेशन और रिबैलेंसिंग जैसी चीजें करना इनवेस्टर के लिए मुश्किल होता है। सेबी के म्यूचुअल फंड के एक्सपेंस रेशियो लिमिट तय कर देने के बाद इश्योरेंस स्कीम के मुकाबले इसकी कॉस्ट बहुत कम है। इससे इसका रिटर्न बढ़ जाता है।

इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर मैं सभी महिलाओं को निवेश के मामले में पुराने तरीकों से बाहर निकलने और टैक्स-बेनेफिट, अट्रैक्टिव रिटर्न और वेल्थ क्रिएट वाले ऑप्शन में निवेश करने की सलाह दूंगी। हैपी वुमंस डे!

(मृण अग्रवाल Finsafe India की फाउंडर हैं। वे फाइनेंशियर एजुकेटर भी हैं।)

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।