स्टॉक मार्केट्स (Stock Markets) में गिरावट से बड़े इन्वेस्टर्स पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। लेकिन, छोटे इन्वेस्टर्स की नींद जरूर कम हो जाती है। दरअसल, आज (सोमवार) सेंसेक्स (Sensex) में करीब 900 अंक की गिरावट ने शिवम को डरा दिया है। उसे लगता है कि बाजार में अगर गिरावट जारी रहती है तो उसे काफी नुकसान हो जाएगा। यह सिर्फ शिवम की सोच नहीं है। पिछले दो साल में स्टॉक मार्केट में एंट्री लेने वाले लाखों यंग इन्वेस्टर्स इसी तरह से सोचते हैं।
हालांकि, शिवम का पोर्टफोलियो अच्छा है। उसने मजबूत कंपनियों के शेयरों में निवेश किया है। उसने मार्केट में तब एंट्री ली थी, जब कोरोना की महामारी शुरू हुई थी। साल 2020 में 23 मार्च को सेंसेक्स गिरकर 27,000 अंक से नीचे आ गया था। उसके बाद से मार्केट ने शानदार तेजी दिखाई है। बीते साल अक्टूबर में सेंसेक्स ने 62,000 का लेवल पार कर लिया था। इसका यंग इनवेस्टर्स ने खूब जश्न मनाया है।
शिवम जैसे इन्वेस्टर्स की मुश्किल यह है कि जब बाजार चढ़ रहा होता है तो उन्हें बहुत मजा आता है। वे शाम में यह देखकर गदगद होते हैं कि उनके पोर्टफोलियो की वैल्यू काफी बढ़ गई। लेकिन, एक दो दिन की गिरावट से वे हताश हो जाते हैं। उन्हें अपना पैसा डूबने का डर सताने लगता है। सही सलाह नहीं मिलने पर वे अपने शेयर कम भाव में बेच देते हैं। इसका उनका पूरी स्ट्रैटेजी गलत हो जाती है। समझदारी इसमें है कि आप कम भाव पर खरीदें और ज्यादा भाव पर बेचें।
इन्वेस्टर्स के लिए यह समझ लेना जरूरी है कि बाजार में अगर तेजी आएगी तो उसमें गिरावट भी आएगी। इसलिए हर गिरावट पर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है। अगर आपने सोचसमझकर बाजार में पैसा लगाया है तो फिर आपको गिरावट से घबराना नहीं चाहिए। अगर आपने दो-चार दिन में बड़ा मुनाफा कमाने के मकसद से पैसा लगाया हो तो फिर आपको नुकसान हो सकता है। दरअसल, स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर्स से ईमानदारी की उम्मीद करता है। इसीलिए दुनिया के मशूहर इन्वेस्टर वॉरेन बफे ने कहा है कि अगर दूसरे लालच कर रहे हों तो आपको डरने की जरूरत है। अगर दूसरे डर रहे हों तो आपको लालच करने की जरूरत है।
बफे का मतलब यह है कि बाजार में जब गिरावट हो तो इसका इस्तेमाल खरीदारी के लिए किया जा सकता है। न कि शेयर बेचने के लिए। इसलिए शिवज जैसे इन्वेस्टर्स को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। चढ़ने के बाद बाजार का गिरना स्वाभाविक है। ऐसा दशकों से होता आया है। स्टॉक मार्केट में टिके रहने वाले इन्वेस्टर्स ही मोटा पैसा बनाते हैं।