Nifty वर्ष 2022 में हुआ निगेटिव, इन 4 वजहों से बिगड़ रहा दलाल स्ट्रीट का सेंटीमेंट

निफ्टी 50 इंडेक्स 228 अंक या 1.3 फीसदी कमजोर होकर 17,301 पर, वहीं बीएसई सेंसेक्स 656.8 अंक गिरकर 57,988 पर आ गया

अपडेटेड Feb 07, 2022 पर 1:29 PM
ग्लोबल मार्केट की तर्ज पर भारतीय बाजारों पर भी दबाव बना हुआ है

Nifty 50 index : बेंचमार्क इंडेक्स कैलेंडर ईयर में निगेटिव रहे हैं और 7 फरवरी को अपने 50 दिन के मूविंग एवरेज (डीएमए) से नीचे चले गए हैं। निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) पिछले हफ्ते आम बजट, 2022-23 के दिन बनाए गए हाई से नीचे चले गए हैं, जिससे इनवेस्टर्स के बीच सेंटीमेंट में कमजोरी का पता चलता है।

निफ्टी 50 इंडेक्स 228 अंक या 1.3 फीसदी कमजोर होकर 17,301 पर (दोपहर लगभग 12 बजे), वहीं बीएसई सेंसेक्स 656.8 अंक गिरकर 57,988 पर कारोबार कर रहा है।

जिओजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा, “ऊपर की ओर भरोसे के लिए इसे (निफ्टी 50) को 17,580 का स्तर तोड़ने की जरूरत है, लेकिन हमें सौदे करने से पहले 17,420-380 के स्तर पर नजर रखने की जरूरत होगी”


आइए, दलाल स्ट्रीट के सेंटीमेंट को कमजोर करने वाले 4 फैक्टर्स पर नजर डालते हैं-

  1. क्रूड 100 डॉलर के नजदीक

वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल ऑयल में आई रैली थमने के संकेत नहीं हैं। इस क्रम में आज ब्रेंट एशियाई बाजार में 94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बीते एक महीने में इसके दाम 14 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुके हैं और आने वाले हफ्तों में यह 100 डॉलर तक जा सकता है। क्रूड में मजबूती भारतीय इकोनॉमी के लिए निगेटिव है, क्योंकि इससे कंज्यूमर डिमांड पर असर पड़ता है और रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) पर मॉनिटरी पॉलिसी में सख्ती के लिए दबाव बढ़ता है।

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  1. अमेरिका में पांच बार दरों में बढ़ोतरी की योजना

यूएस पेरोल डाटा (Payroll data) से पता चलता है कि पिछले महीने 4,67,000 जॉब्स बढ़ीं, जिससे केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह आंकड़ा इसलिए भी अहम है, क्योंकि यह महीना ओमीक्रोन वैरिएंट (Omicron variant) खासा प्रभावित रहा। साथ ही जॉब्स का यह आंकड़ा इकोनॉमिस्ट्स के अनुमान से खासा बेहतर रहा। ऐसे में ट्रेडर्स इस साल यूएस फेड द्वारा पांच बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर दांव लगा रहे हैं, जिसमें मार्च की मॉनिटरी पॉलिसी मीटिंग में 50 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की संभावना शामिल है।

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  1. एफआईआई (FII) की लगातार बिकवाली

वैश्विक क्रूड कीमतों में रैली की तरह ही विदेशी पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (foreign portfolio investors) की तरफ से बिकवाली का दबाव बना हुआ है। 2022 में अभी तक विदेशी निवेशक घरेलू बाजार में 37,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। अमेरिका में रेट हाइक की उम्मीदों और दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स की तुलना में भारतीय शेयर बाजार की ज्यादा वैल्युएशन के चलते भी एफआईआई बिकवाली को मजबूर हो रहे हैं।

  1. टेक कंपनियों में बिकवाली

बीते साल घरेलू बाजार में रैली की मुख्य वजह इनफोर्मेशन टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियां रही थीं। अब 2022 में यह सेक्टर अपनी चमक खासी गंवा चुका है और हाल के हाई की तुलना में निफ्टी आईटी इंडेक्स (Nifty IT index) 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के साथ ही ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बिकवाली से सेक्टर पर दोहरी मार पड़ी है।

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