Crypto platform Wormhole : हैकर्स ने एक डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस प्लेटफॉर्म से 32 करोड़ डॉलर (2,400 करोड़ रुपये) की क्रिप्टोकरंसी (cryptocurrency) चोरी कर ली हैं, जो क्रिप्टो की चौथी सबसे बड़ी लूट है। यह तेजी से उभरते डेफी सेक्टर (DeFi sector) के लिए एक बड़ा झटका है। वॉर्महोल (Wormhole) ने बुधवार को ट्विटर पर कहा कि उसके पास से दुनिया की दूसरी बड़ी क्रिप्टोकरंसी ईथर (ether) के एक वर्जन की 1,20,000 यूनिट का “उपयोग” कर लिया गया है। वॉर्महोल (Wormhole) एक ऐसी साइट है जो एक क्रिप्टो नेटवर्क (crypto network) से दूसरे नेटवर्क को इनफोर्मेशन ट्रांसफर करने की अनुमति देता है।
रॉयटर्स के अनुरोध पर वॉर्महोल (Wormhole) ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अटैकर्स ने धोखे से क्रिएट किए टोकन
लंदन बेस्ड ब्लॉकचेन एनालिसिस फर्म इलिप्टिक ने कहा कि अटैकर्स ने धोखे से लगभग 94,000 डब्ल्यूईटीएच टोकन (wETH tokens) क्रिएट करने में सफलता हासिल कर ली, जिन्हें बाद में इथेरियम ब्लॉकचेन (ethereum blockchain) को ट्रांसफर कर दिया गया। इथेरियम ब्लॉकचेन, ईथर के लिए ट्रांजैक्शंस को सक्षम बनाती है।
डेफी प्लेटफॉर्म कैसे करते हैं काम
वॉर्महोल (Wormhole) ने गुरुवार को एक अन्य ट्वीट में कहा कि उसने अपने सिस्टम की दिक्कत को दूर कर लिया है, लेकिन नेटवर्क बैकअप को हासिल करने के लिए अभी भी काम कर रही है। कथित रूप डेफी प्लेटफॉर्म (DeFi platforms) यूजर्स को सामान्य रूप से क्रिप्टोकरंसी में कर्ज देने, कर्ज लेने और बचत करने की अनुमति देते हैं, इस दौरान बैंक जैसे फाइनेंस के विभिन्न पारम्परिक चैनलों को दरकिनार कर दिया जाता है।
डेफी प्लेटफॉर्म्स की खामियां आई हैं सामने
डेफी साइट्स पर भारी नगदी लगाई गई है, जिसे क्रिप्टोकरंसीज में बढ़ती दिलचस्पी का पता चलता है। कई इनवेस्टर्स बचत पर ऊंचे रिटर्न के वादे के साथ डेफी की ओर आकर्षित होते हैं। हालांकि भारी ग्रोथ के साथ, डेफी प्लेटफॉर्म में कोड और डिजाइन संबंधी खामियों के चलते हैकिंग के भारी जोखिम सामने आए हैं। साथ ही डेफी साइट्स अपराधियों के निशाने पर हैं।
बीते साल अगस्त में हैकर्स ने 61 करोड़ डॉलर से भी अधिक के डिजिटल कॉइन चुरा लिए थे, जो ब्लॉकचेन-बेस्ड प्लेटफॉर्म Poly Network से चुराए गए थे। इसे क्रिप्टो की सबसे बड़ी चोरी माना जाता है।
इससे पहले 2018 में टोक्यो बेस्ड प्लेटफॉर्म कॉइनचेक से 53 करोड़ डॉलर के डिजिटल टोकन की चोरी हुई थी। 2014 में जापान का एक अन्य एक्सचेंज 50 करोड़ डॉलर की क्रिप्टो की चोरी के बाद तबाह हो गया था।