क्रिप्टोकरेंसी के विज्ञापन के लिए गाइडलाइंस जारी हो गई है। एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने यह गाइडलाइंस जारी की है। क्रिप्टो के एडवर्टाइजमेंट में इन गाइडलांस का पालन करना होगा। पिछले कुछ महीनों में क्रिप्टो के विज्ञापन बहुत बढ़े हैं। इनमें क्रिप्टो से जुड़े जोखिम के बारे में नही बताया जाता है।
क्रिप्टो से जुड़े रिस्क को जाने बगैर इसमें इनवेस्ट करने से इनवेस्टर्स को बड़ा झटका लग सकता है। आइए इस गाइडलाइंस की मुख्य 5 बाते जानते हैं।
1. अप्रैल की पहली तारीख से जारी होने वाले डिजिटल एसेट के सभी विज्ञापनों के साथ डिसक्लेमर देना जरूरी होगा। इसमें यह बताना होगा कि क्रिप्टो प्रोडक्ट्स या एनएफटी अनरेगुलेटेड है और बहुत रिस्की हो सकते हैं। इससे जुड़े ट्रांजेक्शन से हुए लॉस के लिए कही शिकायत नहीं की जा सकती।
2. प्रिंट या स्टैटिक मीडियम में यह डिसक्लेमर एडवर्टाइजिंग स्पेस के कम से कम 20 फीसदी जगह में होना चाहिए। इसे विज्ञापन के अंत में देना होगा। प्लेन बैकग्राउंड में इसके फॉन्ट पढ़े जाने योग्य होने चाहिए।
3. क्रिप्टो के ऑडियो विज्ञापनों में डिसक्लेमर विज्ञापन के अंत में पढ़ना जरूरी होगा। वॉयसओवर की रफ्तार सामान्य होगी ताकि इसे सुनकर आसानी से समझा जा सके। इस गाइडलाइन के दायरे में सोशल मीडिया पर आने वाले पोस्ट भी शामिल होंगे।
4. विज्ञापन में 'करेंसी', 'सिक्योरिटीज', 'कस्टोडियन' और 'डिपॉजिटरीज' जैसे शब्दों के इस्तेमाल की मनाही होगी, क्योंकि आम तौर पर ग्राहक इन शब्दों का इस्तेमाल रेगुलेटेड प्रोडक्ट्स के साथ होता देखते हैं।
5. वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के विज्ञापन में किसी नाबालिग को क्रिप्टो प्रोडक्ट्स की खरीदफरोख्त करते नहीं दिखाया जा सकता। इसकी ट्रेडिंग को मनी प्रॉब्लम के सॉल्यूशन के रूप में भी दिखाने की इजाजत नहीं होगी। विज्ञापन में भविष्य में होने वाले प्रॉफिट का वादा या गारंटी नहीं होगी।