स्टॉक मार्केट्स (Stocks Markets) की तेजी इस साल सुस्त पड़ सकती है। दुनियाभर में सेंट्रल बैंक अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव कर रहे हैं, जिसके चलते लिक्विडिटी में कमी आने का अनुमान है। इसका असर भारत सहित इमर्जिंग मार्केट्स पर पड़ेगा। ये बातें ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) की रिपोर्ट में कही गई हैं।
अमेरिका में इंट्रेस्ट रेट्स बढ़ने के अनुमान से यूएस ट्रेजरी यील्ड 2 फीसदी से ज्यादा हो गई है। इससे सरकारी बॉन्ड्स में बड़ा निवेश हो रहा है। इसके चलते इंडिया में फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (FPI) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में उन्होंने बड़ी बिकवाली की है। अप्रैल 2021 से वे 20 अरब डॉलर की बिकवाली कर चुके हैं।
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि ग्लोबल लिक्विडिटी घटने से वैल्यूएशन में कमी देखने को मिलेगी। रिपोर्ट में कहा गया है, "हमें निफ्टी का दिसंबर 2022 का एवरेज टार्गेट 17,500 दिख रहा है। इसकी रेंज 16,500 से 18,500 के बीच रहेगी।" LIC का पब्लिक इश्यू ऐसे वक्त आ रहा है, जब विदेशी फंड बिकवाली कर रहे हैं। उधर, आरबीआई ने अब तक इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी के बारे में साफ तौर पर कुछ नहीं कहा है। फिस्कल डेफिसिट को छोटी अवधि में इंडियन मार्केट के लिए बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
निफ्टी (Nifty 50) का 12 महीने का फॉरवर्ड पीई 19.8 गुना है। यह पांच साल के औसत पीई (PE) के मुकाबले 6.6 फीसदी प्रीमियम है। यह 10 साल के औसत पीई के मुकाबले 19 फीसदी का प्रीमियम है। इससे पता चलता है कि इंडियन मार्केट अब भी महंगे हैं। दूसरे एशियाई मार्केट्स के मुकाबले इंडियन मार्केट्स अपने हिस्टोरिकल हाई से बहुत ऊपर हैं। अगर दूसरे इमर्जिंग मार्केट्स से तुलना करें तो निफ्टी के पीई का प्रीमियम 69 फीसदी है। जापान को छोड़ दूसरे एशियाई मार्केट्स के मुकाबले निफ्टी के पीई का प्रीमियम 53 फीसदी है।
इंडिया में आयात में तेजी से इजाफा हो रहा है। नॉन-ऑयल और नॉन-गोल्ड आयात की ग्रोथ 20 फीसदी रही है। डोमेस्टिक डिमांड में रिकवरी, कमोडिटी की ऊंची कीमतें और महंगे क्रूड ऑयल से करेंट अकाउंट पर दबाव बने रहने का अनुमान है। जेफरीज ने कहा है कि हमें वित्त वर्ष 2022-23 में करेंट अकाउंट डेफिसिट जीडीपी का 2.5 फीसदी रहने की उम्मीद है। यह सीएडी का 10 साल का ऊंचा स्तर है।