इंडिया की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी आईपीओ पेश करने जा रही है। उम्मीद है कि इश्यू में एलआईसी (LIC) के पॉलिसीहोल्डर्स को रिबेट मिलेगा। उनके लिए आईपीओ (IPO) में शेयर रिजर्व होंगे। कंपनी रिटेल इन्वेस्टर्स को भी प्राइस में डिस्काउंट दे सकती है। अगर आप एलआईसी में हिस्सेदार बनना चाहते हैं तो जल्द डीमैट अकाउंट ओपन करा लें।
अगर डीमैट पहले से हैं तो यह चेक कर लें कि आपकी एलआईसी पॉलिसी पैन से लिंक्ड है या नहीं। अगर लिंक्ड नहीं है तो उसे ऑनलाइन लिंक्ड कर लें। हम आपको एलआईसी के बारे में कुछ खास बातें बता रहे हैं।
दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी कंपनी
इंडिया में एलआईसी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) सबसे ज्यादा है। पिछले साल 30 सितंबर को इसका एयूएम 39.55 लाख करोड़ रुपये का था। यह इंडिया में सभी प्राइवेट इंश्योरेंस कंपनियों के कुल एयूएम के तीन गुना से ज्यादा है। यह देश में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एयूएम से भी ज्यादा है।
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की स्थापना 1 सितंबर, 1956 को हुई थी। इसकी शुरुआती पूंजी 5 करोड़ रुपये थी। 245 बीमा कंपनियों को मिलाने और उनके राष्ट्रीयकरण के बाद एलआईसी वजूद में आई थी। साल 2000 तक एलआईसी इंडिया में अकेली जीवन बीमा कंपनी थी।
एलआईसी की एम्बेडेड वैल्यू 5.39 लाख करोड़ है
एलआईसी की एम्बेडेड वैल्यू 5,39,686 लाख करोड़ रुपये है। कंपनी ने सेबी को भेजे ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में यह जानकारी दी है। किसी जीवन बीमा कंपनी की एम्बेडेड वैल्यू में उसके फ्यूचर प्रॉफिट की वर्तमान वैल्यू और एडजस्टेड नेट एसेट वैल्यू शामिल होती है।
एलआईसी के 13 लाख से ज्यादा एजेंट्स हैं। इसके न्यू बिजनेस प्रॉफिट में एजेंट्स की हिस्सेदारी 96.42 फीसदी है। सितंबर, 2021 में खत्म छमाही में कंपनी ने एजेट्स को 9,815.2 करोड़ कमीशन दिया है। एजेंट्स का कमीशन 2 से 40 फीसदी के बीच है।
सरकार को 2,663 करोड़ रुपये डिविडेंड
वित्त वर्ष 2019 में एलआईसी ने सरकार को 2,663 करोड़ डिविडेंड का भुगतान किया है। कंपनी का ग्रॉस एनपीए वित्त वर्ष 2020-21 में 7.78 फीसदी था।