LIC IPO: क्या एलआईसी के आईपीओ पर पड़ेगा मार्केट क्रैश का असर?

अगर एलआईसी आईपीओ से 8 अरब डॉलर जुटाती है तो यह पिछले साल आईपीओ से जुटाई गई कुल रकम का करीब आधा होगा। इस साल करीब 40 कंपनियों ने आईपीओ पेश करने का प्लान बनाया है। इसके लिए मार्केट में पर्याप्त लिक्विडिटी जरूरी है

अपडेटेड Feb 14, 2022 पर 4:48 PM
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चालू वित्त वर्ष में सरकार के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह आईपीओ जरूरी है। इस महीने की शुरुआत में पेश बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कह चुकी हैं कि एलआईसी का आईपीओ मार्च तक आ जाएगा।

इंडियन स्टॉक मार्केट्स का सबसे बड़ा आईपीओ जल्द आ रहा है। एलआईसी (LIC) ने सेबी (SEBI) को ड्रॉफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्ट्स भेज दिया है। अगले महीने इश्यू आने की उम्मीद है। लेकिन, मार्केट क्रैश के बाद इस इश्यू की टाइमिंग को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। क्या बाजार में गिरावट का असर इस आईपीओ पर पडे़गा? आइए इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

एलआईसी देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है। इसमें सरकार की 100 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार कंपनी में अपनी करीब 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। यह इश्यू 60,000 से 90,000 करोड़ रुपये का हो सकता है। एलआईसी आईपीओ के लिए काफी समय से माहौल तैयार कर रही है। वह पॉलिसी होल्डर्स से डीमैट ओपन करने और पॉलिसी को पैन से लिंक करने के लिए कह रही है।

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में गिरावट जारी रहती हैं तो सफल बनाने की लाख कोशिशों के बावजूद आईपीओ को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। डामेस्टिक मार्केट्स में फॉरेन फंडों की बिकवाली जारी है। इस इश्यू को काफी पैसा चाहिए। एलआईसी की ताकत को लेकर कोई संदेह नहीं है। लेकिन, ऐसे समय में इसका आना अच्छा नहीं है, जब बाजार का सेंटीमेंट कमजोर है।

सरकार के पास भी इस आईपीओ को टालने की गुंजाइश नहीं है। सरकार एक साल से ज्यादा समय से एलआईसी की स्टॉक मार्केट में लिस्ट कराने की कोशिश कर रही है। चालू वित्त वर्ष में सरकार के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह आईपीओ जरूरी है। इस महीने की शुरुआत में पेश बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कह चुकी हैं कि एलआईसी का आईपीओ मार्च तक आ जाएगा।

अगर एलआईसी आईपीओ से 8 अरब डॉलर जुटाती है तो यह पिछले साल आईपीओ से जुटाई गई कुल रकम का करीब आधा होगा। इस साल करीब 40 कंपनियों ने आईपीओ पेश करने का प्लान बनाया है। इसके लिए मार्केट में पर्याप्त लिक्विडिटी जरूरी है। उधर, नई लिस्ट हुई कंपनियों में से करबी एक तिहाई कंपनियों के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे चल रहे हैं। पेटीएम इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह शेयर लिस्टिंग के बाद से करीब 59 फीसदी गिर चुका है।

उधर, कोराना की महामारी शुरू होने के बाद से बड़ी संख्या में रिटेल इन्वेस्टर्स ने स्टॉक मार्केट्स में एंट्री की है। इससे देश में रिटेल इन्वेस्टर्स की कुल संख्या 8 करोड़ से ज्यादा हो गई है। एलआईसी के करीब 29 करोड़ पॉलिसीधारक हैं। माना जाता है कि कंपनी अपने पॉलिसीहोल्डर्स के आईपीओ में शेयर रिजर्व रखेगी। इसका इश्यू को फायदा हो सकता है।

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