एक महीना में 4818 अंक गंवा चुका है सेंसेक्स, कब तक जारी रहेगी गिरावट?

सोमवार को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। एचपीसीएल का शेयर 4 फीसदी गिर गया। बीपीसीएल का शेयर 2 फीसदी से ज्यादा गिरा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के शेयरों में 4.55 फीसदी की कमजोरी आई। दरअसल, पिछले करीब 75 दिन से इन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा नहीं किया है

अपडेटेड Feb 14, 2022 पर 3:50 PM
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निफ्टी 17,000 से नीचे चला गया है। इससे पहले 17 दिसंबर को निफ्टी 17,000 के नीचे गया था। करीब दो महीने में निफ्टी का दो बार 17,000 का नीचे जाना इस बात का संकते है कि बाजार में स्ट्रेंथ नहीं है।

स्टॉक मार्केट्स में आई गिरावट ने इन्वेस्टर्स को डरा दिया है। आज का दिन बाजार के लिए ब्लैक मंडे साबित हुआ। सेंसेक्स 1747 अंक यानी 3.00 फीसदी गिरकर 56,405 अंक पर आ गया। निफ्टी भी 560 अंक लुढ़ककर 16,814 तक फिसल गया है। खास बात यह है कि मार्केट्स में बिकवाली का चौतरफा दबाव दिख रहा है। छोटे-बड़े सभी शेयरों में बड़ी गिरावट है। सिर्फ एक महीना में सेंसेक्स 4,818 अंक लुढ़क चुका है। आखिर यह गिरावट कब तक जारी रहेगी?

दो महीने में दो बार सेंसेक्स 1700 से नीचे फिसला

बाजार की गिरावट ऐसे वक्त आई है, जब एलआईसी आईपीओ पेश करने जा रही है। ऐसे में गिरावट का असर इस मेगा इश्यू पर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि दुनियाभर में शेयर बाजार दबाव में हैं। इंडियन मार्केट में गिरावट ज्यादा है, जिसकी वजह विदेशी फंडों की बिकवाली है। पिछले कुछ हफ्तों से विदेशी फंड इंडियन मार्केट्स में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इस वजह से निफ्टी 17,000 से नीचे चला गया है। इससे पहले 17 दिसंबर को निफ्टी 17,000 के नीचे गया था। करीब दो महीने में निफ्टी का दो बार 17,000 का नीचे जाना इस बात का संकते है कि बाजार में स्ट्रेंथ नहीं है।


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ग्लोबल फैक्टर्स ने बाजार पर बढ़ाया दबाव

जानकारों का कहना है कि गिरावट में ग्लोबल फैक्टर्स का बड़ा हाथ है। मुख्य रूप से तीन चीजें बाजार पर दबाव बढ़ा रही हैं। इसमें पहला रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिका और रूस के बीच बातचीत बेनतीजा रही है। जर्मनी की कोशिश भी तनाव को कम नहीं कर सकी है। उधर, अमेरिका में इंट्रेस्ट रेट में अनुमान से ज्यादा बढ़ोतरी होने वाला है। पहले कहा जा रहा था कि इस साल कम से कम चार बार वहां ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं। अब इसके 7 बार तक बढ़ने का अनुमान है। यह उभरते बाजारों के लिए निगेटिव होगा। तीसरा, क्रूड ऑयल का भाव 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह इंडियन इकोनॉमी को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की हालत खराब

सोमवार को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। एचपीसीएल का शेयर 4 फीसदी गिर गया। बीपीसीएल का शेयर 2 फीसदी से ज्यादा गिरा। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के शेयरों में 4.55 फीसदी की कमजोरी आई। दरअसल, पिछले करीब 75 दिन से इन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा नहीं किया है। उधर, क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। अंतिम बार जब ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थी, जब क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल था। इस तरह भाव 80 से 96 डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि ऑयल कंपनियां पुराने दाम पर बिक्री कर रही हैं। इसका सीधा दबाव उनके मार्जिन पर पड़ेगा। इससे बचने के लिए उन्हें तेल की कंपनियों में चुनाव के बाद तेज वृद्धि करनी होगी।

आपको क्या करना चाहिए?

सवाल है कि रिटेल इन्वेस्टर्स को अभी किस तरह की रणनीति अपनानी चाहिए? जानकारों का कहना है कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। बाजार में कम से कम दो महीने तक अस्थिरता दिख सकती है। इसलिए एकमुश्त बड़ी खरीदारी से बचना चाहिए। पैनिक बिकवाली नहीं करें। इससे नुकसान हो सकता है। अगर आप इंतजार कर सकते हैं तो एक-दो महीने इंतजार करना ठीक रहेगा। अगर आपके पास अतिरिक्त पैसा है तो हर गिरावट पर मजबूत कंपनियों के शेयरों में थोड़ी-थोड़ी खरीदारी कर सकते हैं।

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