यह हफ्ता स्टॉक मार्केट्स (Stock Markets) के लिए अच्छा नहीं रहा। सेंसेक्स (Sensex) 491 अंक यानी 0.83 फीसदी गिर गया। निफ्टी (Nifty) भी 141 अंक फिसला। बाजार की गिरावट में सबसे बड़ा हाथ अमेरिका में रिटेल इनफ्लेशन (US Inflation) में वृद्धि का रहा। इससे छोटे-बड़े सभी शेयरों पर बिकवाली दबाव देखा गया। लेकिन, सबसे ज्यादा बिकवाली की मार स्मॉलकैप शेयरों पर पड़ी।
बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 3.4 फीसदी फिसल गया। 76 स्मॉलकैप शेयरों में 10 से 93 फीसदी तक की गिरावट आई। इनमें फोर्ब्स गोकाक, सोलारा एक्टिव फार्मा साइंसेज, जीई पावर इंडिया, स्टोव क्राफ्ट, फेयरकेम ऑर्गेनिक्स, लासा सुपरआर्गेनिक्स, जुबिलेंट इंडस्ट्रीज, जेपी इंफ्राटेक और गति शामिल हैं।
हालांकि, इस दौरान शंकर बिल्डकॉन, जी मीडिया, डीबी रियल्टी, गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एंक केमिकल्स, ओमेक्स, बटरफ्लाई गांधीमठी और महिंद्रा लाइफस्पेस के शेयर में 32 फीसदी तक की तेजी आई।
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा, "इस हफ्ते बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहा। आगे बाजार की चाल विदेशी स्टॉक एक्सचेंजों से मिलने वाले संकेतों पर निर्भर करेगी। कंपनियों के नतीजों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।"
बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 2 फीसदी गिरावट आई। इसमें टॉरेंट पावर, एंड्यूरेस टेक्नोलॉजीज, टाटा पावर, कनसाई नेरोलेक पेंट्स, 3एम इंडिया, क्रॉम्पटन ग्रीव्ज, एबीबी इंडिया, जी एंटरटेनमेंट और बेयर क्रॉपसाइंस का बड़ा हाथ रहा।
सैमको सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड यश शाह ने कहा कि अमेरिका में अनुमान के मुकाबले ब्याज दरों में जल्द और ज्यादा बढ़ोतरी के अनुमान से बाजार पर दबाव देखने को मिला। दरअसल, अमेरिका में रिटेल इनफ्लेशन 40 साल के लेवल पर पहुंच गया है। इससे वहां अनुमान से पहले इंट्रेस्ट रेट बढ़ने के आसार है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने पहले मार्च में रेट बढ़ाने का प्लान बनाया था। लेकिन, गुरुवार को आए इनफ्लेशन के आंकड़ों के बाद उसने 14 फरवरी को इमर्जेंसी बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इसमें ब्याज दर बढ़ाने का ऐलान होगा। अगर वहां ब्याज दर बढ़ती है तो इसका असर घरेलू बाजार पर दिख सकता है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू बाजार पर पहले ही इसका असर पड़ चुका है। इसलिए बाजार में गिरावट ज्यादा नहीं आएगी।
हालांकि, विश्लेषकों ने रिटेल इन्वेस्टर्स को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा माहौल में उन्हें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अगले दो-तीन महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।