ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे के बाद फिर से लोग इंश्योरेंस की उपयोगिता के बारे में बात करने लगे हैं। खासकर ट्रेन से सफर के दौरान IRCTC का ट्रैवल इंश्योरेंस बहुत काम का है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए प्रीमियम प्रति पैसेंजर सिर्फ 35 पैसे है। जब आप आईआरसीटीसी की वेबसाइट से ट्रेन रिजर्वेशन कराते हैं तो आपसे यह पूछा जाता है कि क्या आप प्रति पैसेंजर 0.35 पैसे की दर से ट्रेवल इंश्योरेंस (IRCTC Travel Insurance) लेना चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि इसे खरीदना पैसेंजर के लिए अनिवार्य नहीं है। कई बार लोग जल्दबाजी में इस पर ध्यान नहीं देते हैं। वे बगैर ट्रैवल इंश्योरेंस के टिकट बुक करा लेते हैं। लेकिन, किसी हादसे की स्थिति में यह इंश्योरेंस बहुत काम आता है। इससे पैसेंजर के परिवार को आर्थिक सहायता मिलती है।
बीमा कवर की पहली कैटेगरी मौत की स्थिति में
बीमा कवर की दूसरी कैटेगरी स्थायी विकलांगता की स्थिति में
दूसरी कैटेगरी में स्थायी विकलांगता को शामिल किया गया है। इसमें बताया गया है कि अगर सफर में हुए हादसे के 12 महीने के अंदर पैसेंजर स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है तो उसे सम इनश्योर्ड का 100 फीसदी मिलता है। स्थायी विकलांगता के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। इन शर्तों के पूरी होने पर पैसेंजर 10 लाख रुपये का इंश्योरेंस कवर हासिल करने का हकदार होता है।
बीमा की तीसरी कैटेगरी स्थायी आंशिक विकलागंता पर
तीसरी कैटेगरी में स्थायी आंशिक विकलांगता आती है। इसमें कहा गया है कि अगर हादसे के 12 महीने के अंदर पैसेंजर स्थायी रूप से आंशिक विकलांग हो जाता है तो उसे सम इनश्योर्ड का 75 फीसदी अमाउंट मिलेगा। स्थायी आंशिक विकलांगता के लिए कुछ शर्तें तय हैं। इन शर्तों के पूरा होने पर ही पैसेंजर को स्थायी आंशिक विकलांगता का सर्टिफिकेट मिलता है।
बीमा की चौथी कैटेगरी अस्पताल में इलाज के खर्च के लिए
चौथी कैटेगरी में अस्पताल में इलाज के दौरान आने वाले खर्च को शामिल किया गया है। इसके लिए 2 लाख रुपये की सीमा तय की गई है। इसका मतलब है कि हादसे की वजह से अगर पैसेंजर को लगी चोट के इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है तो इलाज पर होने वाला 2 लाख रुपये तक का खर्च बीमा कंपनी चुकाएगी। इस कैटेगरी के बारे में ज्यादातर लोगों को पता नहीं है। पैसेंजर्स आम तौर पर सिर्फ हादसे में मौत की स्थिति में मिलने वाले मुआवजे के बारे में जानते हैं।
पांचवीं कैटगरी मृतक के शव को घर पहुंचाने के खर्च के लिए
पांचवीं कैटेगरी के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इसमें कहा गया है कि अगर ट्रेन हादसे की वजह से पैसेंजर की मौत हो जाती है तो उसके शव को उसके घर पहुंचाने या अंतिम संस्कार के लिए ले जाने पर आने वाले खर्च का भुगतान इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से किया जाएगा। इसके लिए 10,000 रुपये की सीमा तय की गई है। इस क्लेम के लिए किसी तरह का डॉक्युमेंट सब्मिट करने की जरूरत नहीं है।
क्या है क्लेम करने का प्रोसेस?
सफर में हादसे की वजह से पैसेजर को होने वाले नुकसान पर क्लेम का दावा चार महीने के अंदर किया जा सकता है। पैसेंजर का नॉमिनी या उसका कानूनी उत्तराधिकारी बीमा कंपनी के नजदीकी ऑफिस में यह दावा कर सकता है। इसके लिए बीमा कंपनी को कुछ तरह के डॉक्युमेंट सब्मिट करने होंगे। पैसेंजर की मौती की स्थिति में नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को हादसे की पुष्टि के लिए रेलवे अथॉरिटी की रिपोर्ट लगानी होगी। इस रिपोर्ट में मृतकों की लिस्ट में उस पैसेंजर का नाम शामिल होना जरूरी है, जिसके नॉमिनी दावा पेश करना चाहते हैं।