क्या इस समय सोना-चांदी में इन्वेस्टमेंट खतरनाक? दिग्गज फंड मैनेजर एस नरेन की इस सलाह से चौंके निवेशक, बताया कमाई का सही फॉर्मूला

Gold Silver ETF Warning: मई 2026 तक करीब ₹28000 करोड़ का फंड मैनेज करने वाले दिग्गज फंड मैनेजर एस नरेन ने चेतावनी दी है कि सीधे सोने-चांदी में बड़ा दांव लगाने के बजाय निवेशकों को कमाई का एक अलग फॉर्मूला अपनाना चाहिए, क्योंकि आने वाले दिनों में गोल्ड रिटर्न पर एक बड़ा सरकारी फैसला भारी पड़ सकता है

अपडेटेड Jul 02, 2026 पर 5:26 PM
इस समय केवल गोल्ड या सिल्वर ईटीएफ में सीधे पैसा ब्लॉक करना जोखिम भरा हो सकता है,

S Naren Gold Investment Advice: आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर एस नरेन ने सोने-चांदी और शेयर बाजार में निवेश को लेकर निवेशकों को एक ऐसी सलाह दी है, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है।

मई 2026 तक करीब 3 अरब डॉलर का फंड मैनेज करने वाले दिग्गज फंड मैनेजर एस नरेन का मानना है कि जिन निवेशकों ने इस साल की शुरुआत में बिना सोचे-समझे केवल सोने और चांदी के स्टैंडअलोन ईटीएफ में भारी पैसा लगाया था, उन्हें एसेट एलोकेशन के नियमों की अनदेखी करने के कारण नुकसान झेलना पड़ा है।

उन्होंने चेतावनी दी है कि सीधे सोने-चांदी में बड़ा दांव लगाने के बजाय निवेशकों को कमाई का एक अलग फॉर्मूला अपनाना चाहिए, क्योंकि आने वाले दिनों में गोल्ड रिटर्न पर एक बड़ा सरकारी फैसला भारी पड़ सकता है।


सोने-चांदी में सीधे निवेश पर क्यों दी चेतावनी?

एस नरेन ने साफ किया कि वह पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनके निवेश करने के तरीके को लेकर सचेत कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इस समय केवल गोल्ड या सिल्वर ईटीएफ में सीधे पैसा ब्लॉक करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि सरकार द्वारा सोने-चांदी पर लगने वाली 15% कस्टम ड्यूटी में कटौती की संभावना है। अगर सरकार कस्टम ड्यूटी घटाती है, तो घरेलू बाजार में सोने-चांदी के दाम गिर सकते हैं, जिससे स्टैंडअलोन ईटीएफ में निवेश करने वालों के रिटर्न पर सीधा और निगेटिव असर पड़ेगा।

कमाई का सही फॉर्मूला: 'AUM' और मल्टी-एसेट एप्रोच

दिग्गज फंड मैनेजर ने निवेशकों को सुरक्षित कमाई के लिए आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का खास 'AUM' फ्रेमवर्क अपनाने की सलाह दी है, जिसका मतलब एसेट एलोकेशन, अनकंस्ट्रेंड फंड्स और सीमित रिटर्न की उम्मीद करना है। नरेन के मुताबिक, सोने-चांदी में सीधे निवेश करने के बजाय 'मल्टी-एसेट फंड्स' के जरिए एक्सपोजर लेना सबसे सही फॉर्मूला है।

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ऐसे फंड्स में फंड मैनेजर के पास बाजार के सेंटिमेंट के हिसाब से इक्विटी, डेट और सोना-चांदी के बीच पैसे को सही अनुपात में शिफ्ट करने की पूरी आजादी होती है, जिससे जोखिम बेहद कम हो जाता है।

शेयर बाजार पर राय: AI के पीछे न भागें, लार्ज-कैप चुनें

भारतीय शेयर बाजार को लेकर एस नरेन का मानना है कि बेहतर मानसून और कच्चे तेल की गिरती कीमतों से देश का आर्थिक आउटलुक मजबूत हुआ है, लेकिन निवेशकों को अभी भी बहुत ज्यादा बंपर रिटर्न की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। इस समय मिड-कैप शेयर काफी महंगे हो चुके हैं, इसलिए निवेशकों को सुरक्षित वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप शेयरों पर भरोसा जताना चाहिए।

AI थीम से रहें दूर

दुनिया भर का विदेशी फंड इस समय AI से जुड़ी कंपनियों की तरफ जा रहा है। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर की जो कंपनियां एआई के नाम पर भाग रही हैं, उनके पीछे आंख मूंदकर न भागें, क्योंकि ग्लोबल एआई साइकिल धीमा होने पर इनमें बड़ी गिरावट आ सकती है। इसके बजाय वैल्युएशन में सुधार देख रहे बड़े प्राइवेट बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर इस समय निवेश के लिए बेहतर विकल्प हैं।

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