हर साल ऐसे बिजनेसेज, आम लोग और संस्थाओं को इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करना जरूरी है, जिनकी इनकम तय सीमा से ज्यादा होती है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख टैक्सपेयर की कैटेगरी उसकी इनकम के स्रोत पर निर्भर करती है। आम लोगों के लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख सामान्यत: 31 जुलाई होती है। कई बार जरूरी होने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस तारीख को बढ़ा देता है। कोरोना की महामारी के दौरान ऐसा देखने को मिला था।
CBDT ने फॉर्म्स नोटिफाय किए
CBDT ने फाइनेंशियल ईयर 2022-23 और एसेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म्स नोटिफाय कर दिए हैं। इसके मुताबिक, टैक्स अधिकारियों ने जिन टैक्सपेयर्स के मामले में सर्च और सीजर ऑपरेशंस किए हैं, वे आईटीआर-1 में अपनी अनडिसक्लोज्ड वेल्थ के सेल्फ-एसेसमेंट के आधार पर सेक्शन 153सी के तहत रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
फरवरी में सीबीडीटी ने आईटीआर-1 में कुछ बदलाव भी किए थे। ये बदलाव सेक्शन 139(1) के तहत डिसक्लोजर को ध्यान में रख किए गए थे। इस फॉर्म का इस्तेमाल ऐसे लोग करते हैं, जिनकी सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये से कम होती है। यह स्वैच्छिक है। ऐसे लोगों का फिक्स्ड डिपॉजिट्स 1 करोड़ रुपये से ज्यादा होने पर भी इसकी जानकारी ITR फॉर्म्स में देना जरूरी नहीं है।
ITR-1 और ITR-4 सबसे आसान फॉर्म्स हैं। बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स इन फॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे लोग रिटर्न फाइल करने के लिए फॉर्म-1 का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनकी सालाना इनकम 50 लाख रुपये तक है और जिन्हें सैलरी, एक हाउस प्रॉपर्टी और इंटरेस्ट जैसे दूसरे स्रोतों से इनकम होती है। ITR-4 का इस्तेमाल इंडिविजुअल, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और ऐसी फर्में करती हैं, जिनकी इनकम 50 लााख रुपये तक है और जिन्हें बिजनेसेज और प्रोफेशन से इनकम होती है।
ऑनलाइन फॉर्म अभी जारी होने बाकी
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अब तक ऑनलाइन आईटीआर फॉर्म जारी नहीं किए हैं। उसने ऑफलाइन आईटीआर आईटीआर-1 और आईटीआर-4 फॉर्म्स जारी किए हैं। इनका इस्तेमाल एसेसमेंट ईयर 2023-24 और फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए आईटीआर फाइल करने के लिए किया जा सकता है। ऑफलाइन तरीके में टैक्सपेयर्स को पहले संबंधित फॉर्म डाउनलोड करना पड़ता है। उसके बाद इसे भरकर डिपार्टमेंट के पोर्टल पर अपलोड करना पड़ता है।
ऑनलाइन तरीके में टैक्सपेयर्स सीधे इनकम टैक्स की वेबसाइट पर उपलब्ध फॉर्म में अपनी इनकम से संबंधित जानकारियां भर सकता है। उसके बाद उसके लिए इसे सब्मिट करना जरूरी है। दोनों ही तरीकों में टैक्सपेयर्स के लिए फॉर्म को वेरिफाय करना जरूरी है।