GoFirst का इनसॉल्वेंसी अप्लिकेशन का फैसला वाडिया ग्रुप के लिए बड़ा झटका है। एक समय देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह में शामिल इस समूह की चमक फीकी पड़ती दिख रही है। जहां तक गोफर्स्ट की बात है तो उसकी मुश्किल पिछले कुछ समय से बढ़ रही थी। FY22 की एनुअल रिपोर्ट में बहुत ज्यादा नुकसान के बाद इसके खराब दिन शुरू हो गए। कंपनी के मैनेजमेंट ने पिछले कुछ महीनों में ऑपरेशन प्रॉब्लम को उसकी खराब स्थिति के लिए जिम्मेदार बताया है। दरअसल, इसके आधे से ज्यादा विमान पिछले काफी समय से जमीन पर खड़े हैं। इसकी वजह यह है कि Pratt & Whiney (P&W) गोफर्स्ट को इंजन की सप्लाई करने में नाकाम रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बात कही है। लेकिन, इस एयरलाइन को जमीन पर लाने में कुछ दूसरी बातों का भी हाथ है।
6,521 करोड़ रुपये का लोन बकाया
गोफर्स्ट पर बैंकों का 6,521 करोड़ रुपये का लोन बकाया है। गोफर्स्ट ने कभी वाडिया समूह के प्रॉफिट में योगदान नहीं किया। इसके उलट इसे लगातार निवेश की जरूरत पड़ती रही। वाडिया समूह की दूसरी कंपनियों में Bombay Bumrah और Bombay Dyeing शामिल हैं। इन दोनों की चमक भी काफी कम पड़ी है। उधर, ग्रुप की चौथी कंपनी Britannia की मौजूदगी प्रीमियम बिस्कुट्स के जरिए घर-घर में रही है। मध्यम वर्ग का शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसने ब्रिटानिया का बिस्कुट नहीं खाया हो। कुछ दशक पहले तक बिस्कुट का मतलब ब्रिटानिया होता था।
Bombay Dyeing लगातार लॉस में
Bombay Dyeing को FY22 में 460 करोड़ रुपये का लॉस हुआ। इससे पहले FY21 में कंपनी को 469 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था। ब्रिटानिया इस समूह की इकलौती कंपनी है, जिसका प्रदर्शन शानदार रहा है। Britannia ने FY22 में 1,516 करोड़ रुपये का प्रॉफिट कमाया था। इससे वाडिया समूह को बहुत ताकत मिली थी। इस समूह से जुड़ी कुछ कंपनियों के खिलाफ मार्केट रेगुलेटर के कदमों का असर पड़ा है। पिछले साल SEBI ने Bombay Dyeing Company और उसके प्रमोटरों-नुसली वाडिया, नेस वाडिया और जहांगीर वाडिया पर दो साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। उन पर FY12 से लेकर छह साल के दौरान फाइनेंशियल स्टेटमेंट में गड़बड़ी के आरोप थे।
नुसली वाडिया और उनके बेटे जहांगीर वाडिया के बीच बढ़ते मतभेद का असर भी इस समूह पर पड़ा है। जहांगीर ने 2021 में पहले गोफर्स्ट एयरलाइंस के मैनेजिंग डायरेक्ट पद से इस्तीफा दिया। बाद में उन्होंने बॉम्बे डाइंग से भी खुद को अलग कर लिया। आखिर में उन्होंने इस समूह की सभी कंपनियों के बोर्ड से नाता तोड़ लिया। ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज और बॉम्बे बर्मा ट्रेडिंग में भी गड़बड़ियां बढ़ती दिखीं। ब्रिटानिया के सीईओ के रूप में वरुण बेरी का प्रदर्शन शानदार रहा था। बतौर सीईओ उनके 9 साल के कार्यकाल में कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन बढ़कर 13 अरब डॉलर हो गया था।
गोफर्स्ट को नहीं मिल सकी लीडरशिप
लेकिन, गोफर्स्ट को सही लीडरशिप नहीं मिल सकी। बीते 10 साल में 7 लोगों ने इसका सीईओ पद संभाला। जब कंपनी ने मार्च 2021 में Ben Baldanza को बोर्ड का वाइस-चेयरमैन बनाया तो उसने कहा कि यह नियुक्ति कंपनी के मैनेजमेंट को प्रोफेशनल रूप देने के लंबी अवधि के प्लान का हिस्सा है। दरअसल, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। यह ऐसे ग्रुप के लिए अच्छी बात नहीं थी, जो साहसिक फैसले और रिस्क लेने के लिए जाना जाता था। दरअसल, गोफर्स्ट पर ग्रुप ने पिछले दो दशकों पर काफी फोकस किया था। हालांकि, एयरलाइंस बिजनेस में हमेशा सामान्य से ज्यादा रिस्क होता है।
वाडिया ग्रुप देश के सबसे पुराने कारोबारी समूहों में से एक है। Bombay Dyeing Bombay और Bumrah 100 साल से ज्यादा पुरानी कंपनियां हैं। इस समूह के पास अरबों रुपये की जमीन है। एक समय कारोबारी और राजनीतिक हलकों में नुसली वाडिया की धाक की चर्चा होती थी। देश के एक से बढ़कर एक पॉलिटिकल और बिजनेस टायकूंस के साथ उनके करीबी रिश्ते थे। वह ताकतवर से ताकतवर लोगों को भी चैलेंज करने में देर नहीं लगाते थे। टाटा संस में सायरस मिस्त्री और रतन टाटा के बीच की लड़ाई में मिस्त्री के लिए उनका सपोर्ट जगजाहिर था। लेकिन, इतिहास के मुकाबले वर्तमान बहुत कमजोर दिख रहा है। यह दिग्गज कारोबारी समूह दिन-ब-दिन अपनी चमक खो रहा है।