ITR Filing 2026: फॉर्म 16 का कर रहे इंतजार? जानिए डेडलाइन और कितना जरूरी है ये डॉक्युमेंट

ITR Filing 2026: ITR फाइलिंग शुरू हो चुकी है, लेकिन ज्यादातर सैलरीड लोग अभी भी Form 16 का इंतजार कर रहे हैं। आखिर यह दस्तावेज इतना महत्वपूर्ण क्यों है, कब तक मिलेगा और इसके बिना रिटर्न फाइल करने में क्या जोखिम हैं? जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Jun 01, 2026 पर 11:12 PM
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फॉर्म 16 को दो हिस्सों में बांटा गया है - Part A और Part B।

ITR Filing 2026: इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अलग-अलग कैटेगरी के टैक्सपेयर्स के लिए ऑनलाइन ITR फाइलिंग की सुविधा शुरू कर दी है। इसके बावजूद ज्यादातर सैलरीड लोग वित्त वर्ष 2025-26 का ITR फाइल करने से पहले Form 16 का इंतजार कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि Form 16 में सैलरी, TDS, टैक्स छूट, डिडक्शन और टैक्स कैलकुलेशन से जुड़ी लगभग सारी जरूरी जानकारी एक ही जगह मिल जाती है।

Form 16 कब तक मिलता है?

नियमों के मुताबिक एम्प्लॉयर को उस वित्त वर्ष के बाद 15 जून तक Form 16 जारी करना होता है, जिसमें कर्मचारी को सैलरी दी गई हो और उस पर TDS काटा गया हो। यानी FY26 के लिए कंपनियों को अपने कर्मचारियों को 15 जून 2026 तक Form 16 देना होगा।


ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के मुताबिक Form 16 की मदद से ITR फाइल करना ज्यादा आसान और सटीक हो जाता है। इसके बिना लोगों को अलग-अलग सैलरी स्लिप, निवेश दस्तावेज और TDS रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी जुटानी पड़ती है, जिससे गलती या कोई जानकारी छूटने की संभावना बढ़ जाती है।

Form 16 क्या होता है?

Form 16 एक TDS सर्टिफिकेट है, जिसे एम्प्लॉयर अपने कर्मचारियों को जारी करता है। इसमें पूरे वित्त वर्ष के दौरान कर्मचारी की सैलरी से काटे गए टैक्स और सरकार के पास जमा किए गए TDS का रिकॉर्ड होता है।

इसके अलावा इसमें सैलरी का पूरा ब्रेकअप, टैक्स छूट, डिडक्शन और टैक्सेबल इनकम की जानकारी भी दी जाती है। कर्मचारी इसे अपने एम्प्लॉयर या कंपनी के पेरोल पोर्टल से हासिल कर सकते हैं।

Deloitte India की पार्टनर दिव्या बावेजा के मुताबिक अगर किसी कर्मचारी ने एक ही वित्त वर्ष में नौकरी बदली है, तो उसे अलग-अलग कंपनियों से अलग-अलग Form 16 मिल सकते हैं। Form 16 का Part A TRACES पोर्टल से जनरेट होता है, जबकि Part B एम्प्लॉयर तैयार करता है।

Form 16 के दो हिस्से होते हैं

Form 16 को दो हिस्सों में बांटा गया है - Part A और Part B।

Part A में क्या होता है?

Part A TDS सर्टिफिकेट का हिस्सा होता है। इसमें कर्मचारी की सैलरी से काटे गए टैक्स और सरकार के पास जमा किए गए TDS की जानकारी दी जाती है। इसमें हर तिमाही में दी गई सैलरी और जमा किए गए टैक्स का रिकॉर्ड भी शामिल होता है। अगर किसी व्यक्ति ने वित्त वर्ष के दौरान एक से ज्यादा कंपनियों में काम किया है, तो हर एम्प्लॉयर अलग Part A जारी करेगा।

Part A में आमतौर पर एम्प्लॉयर का नाम, पता, PAN और TAN, कर्मचारी का नाम और PAN, तिमाहीवार TDS विवरण, असेसमेंट ईयर, नौकरी की अवधि और TDS भुगतान की रसीद संख्या जैसी जानकारियां होती हैं।

Part B में क्या होता है?

Part B में सैलरी और टैक्स की पूरी कैलकुलेशन दी जाती है। इसमें HRA, LTA, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और पेंशन जैसे सैलरी कंपोनेंट्स का ब्रेकअप होता है।

इसके अलावा सेक्शन 80C, 80D और 80CCD के तहत क्लेम किए गए डिडक्शन की जानकारी भी इसमें दी जाती है। साथ ही एजुकेशन सेस, सरचार्ज और टैक्स देनदारी या रिफंड का पूरा हिसाब भी शामिल रहता है।

क्या Form 16 के बिना ITR फाइल कर सकते हैं?

हां, Form 16 के बिना भी ITR फाइल किया जा सकता है। ऐसा कोई नियम नहीं है कि रिटर्न फाइल करने के लिए Form 16 होना जरूरी हो।

हालांकि टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैलरीड लोगों के लिए Form 16 मिलने के बाद ITR फाइल करना ज्यादा बेहतर रहता है। इससे सैलरी, TDS, टैक्स छूट और अन्य जानकारियों का मिलान करना आसान हो जाता है और रिटर्न में गलती होने की आशंका काफी कम हो जाती है।

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