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ITR Filing: एफएंडओ ट्रेडिंग करते हैं तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में किन बातों का रखना होगा ध्यान?

ITR Filing: पिछले कुछ सालों में एफएंडओ ट्रेडिंग में लोगों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। एफएंडओ ट्रेडिंग से हुई इनकम या लॉस के बारे में इनकम टैक्स रिटर्न में बताना जरूरी है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले एफएंडओ ट्रेडर्स को इस बारे में ठीक तरह से समझ लेना जरूरी है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 26, 2024 पर 2:11 PM
ITR Filing: एफएंडओ ट्रेडिंग करते हैं तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में किन बातों का रखना होगा ध्यान?
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 43(5) में F&O ट्रेडिंग से हुई इनकम या लॉस बारे में बताया गया है।

पिछले कुछ सालों में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) ट्रेडिंग में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस में ट्रेडिंग करने वाले लोगों को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में अपनी एफएंडओ इनकम के बारे में बताना जरूरी है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 43(5) में इस बारे में बताया गया है। अगर आप फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग करते हैं तो आपके लिए इस बारे में विस्तार से जानना जरूरी है। आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में एफएंडओ इनकम के बारे में बताना होगा।

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 43(5) में क्या कहा है?

सेक्शन 43(5) में कहा गया है कि F&O से हुई इनकम या लॉस को नॉन-स्पेकुलेटिव बिजनेस इनकम माना जाएगा। इनकम टैक्स रिटर्न में इसके बारे में 'प्रॉफिट एंड गेंस ऑफ बिजनेस या प्रोफेशन' के तहत बताना होगा। अगर कोई टैक्सपेयर प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का इस्तेमाल कर रहा है तो वह खास स्थितियों में ITR-4 का इस्तेमाल कर सकता है। टैक्स कैलकुलेशन के लिए टर्नओवर (नॉन-डिजिटल ट्रांजेक्शन में 8 फीसदी और डिजिटल ट्रांजेक्शन के मामले में 6 फीसदी) का 6 फीसदी प्रॉफिट डेक्लेयर किया जा सकता है।

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