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ITR Filing: सैलरीड टैक्सपेयर्स को ओल्ड और नई रीजीम में स्विच करने की इजाजत है, जानिए इसके फायदें

ITR Filing: टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सैलरीड टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले एक बार यह चेक कर लेना जरूरी है कि उन्हें किस रीजीम का इस्तेमाल करने पर कम टैक्स देना होगा। उसके बाद ही उन्हें रिटर्न फाइल करना चाहिए

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 26, 2024 पर 2:59 PM
ITR Filing: सैलरीड टैक्सपेयर्स को ओल्ड और नई रीजीम में स्विच करने की इजाजत है, जानिए इसके फायदें
अगर कोई एंप्लॉयी ओल्ड रीजीम के इस्तेमाल के फैसले के बारे में एंप्लॉयर को बताने के बाद नई रीजीम के तहत इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना चाहता है तो वह ऐसा कर सकता है।

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख काफी करीब आ गई है। टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करना चाहिए। खासकर अगर टैक्सपेयर इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम और नई रीजीम के बीच स्विच करना चाहता है तो उसे रिटर्न फाइल करने में देरी नहीं करना चाहिए। इनकम टैक्स के नियम के मुताबिक, सैलरीड टैक्सपेयर्स को ओल्ड और न्यू रीजीम के बीच स्विच करने की इजाजत है।

सैलरीड टैक्सपेयर्स के लिए क्या है नियम?

सरकार ने बजट 2023 में इनकम टैक्स की नई रीजीम को डिफॉल्ट रीजीम बना दी थी। साथ ही इसे अट्रैक्टिव बनाने के लिए कई ऐलान किए थे। इसका असर दिखा है। सैलरीड टैक्सपेयर्स को वित्त वर्ष की शुरुआत में ही अपने एंप्लॉयर (कंपनी) के फाइनेंस डिपार्टमेंट को यह बताना जरूरी होता है कि वह इनकम टैक्स की नई रीजीम और पुरानी रीजीम में से किसका इस्तेमाल करना चाहता है। इसके बाद एंप्लॉयर का फाइनेंस डिपार्टमेंट एंप्लॉयी की सैलरी से टीडीएस (TDS) काटता है।

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