इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन करीब आ रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के ITR फाइल करने के लिए अपने पोर्टल ओपन कर दिए हैं। कई लोग आईटीआर इसलिए फाइल नहीं करते, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी इनकम टैक्सेबल नहीं है। लेकिन, अगर आप नौकरी करते हैं और इनकम का स्रोत सिर्फ सैलरी है तो ऐसा सोचना गलत है। यह सच है कि इनकम टैक्स के मौजूदा नियम के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से ज्यादा है तभी उसके लिए ITR फाइल करना जरूरी है। लेकिन, कुछ ऐसी स्थितियां है, जिनमें इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट कम होने से के बावजूद रिटर्न फाइल करना जरूरी है।
इनकम टैक्स का नियम कहता है कि अगर किसी व्यक्ति की उम्र 60 साल से कम है और उसकी ग्रॉस इनकम एक फाइनेंशियल ईयर में 2.50 लाख से ज्यादा है तो उसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना जरूरी है। लेकिन, इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम होने के बाद भी आईटीआर फाइल करने के कई फायदे हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
टैक्सपेयर की तरफ से फाइल किया गया इनकम टैक्स रिटर्न एक लीगल डॉक्युमेंट माना जाता है। इसकी वजह यह है कि इसे सरकार की मान्यता हासिल होती है। यह दो तरफ से लीगल प्रूफ का काम करता है। पहला है आइडेंटिटी प्रूफ। आधार कार्ड के लिए अप्लाई करने या किसी सरकारी डॉक्युमेंट के लिए अप्लिकेशन डालने में सरकार आईटीआर में दिए गए पते को एड्रेस प्रूफ के रूप में स्वीकार करती है। दूसरा, यह आपकी इनकम का भी प्रूफ है। अगर आप प्रॉपर्टी खरीदते हैं तो उसके लिए आपको इनकम प्रूफ देना पड़ेगा। ऐसे में यह बतौर प्रूफ इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरकार को टैक्स चुकाने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते सरकार कुछ तरह के डिडक्शंस की इजाजत देती है। कुछ इनवेस्टमेंट ऑप्शंस ऐसे हैं, जिनमें निवेश कर आप डिडक्शंस क्लेम कर सकते हैं। इससे टैक्स लायबिलिटी कम करने में मदद मिलती है। इसके अलावा आपकी इनकम भले ही बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम हो, लेकिन आपका एंप्लॉयर हो सकता है कि उसने टीडीएस काटा हो। हो सकता है कि आपने फ्रीलांस के जरिए कुछ पैसे कमाए हो जिस पर टीडीएस काटा गया हो। लेकिन, चूंकि आपकी इनकम बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट से कम है तो आप रिफंड क्लेम नहीं कर सकते।
टैक्स एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आप लोन के लिए अप्लाई करते हैं तो ITR इसमें मददगार साबित होता है। कार लोन, होम लोन के लिए अप्लाई करने पर बैंक या एनबीएफसी आईटीआर मांगते हैं। अधिकतर बैंक पिछले तीन साल के इनकम का प्रूफ मांगते हैं। इससे इंडिविजुअल की पहले की इनकम के बारे में जानकारी मिलती है।
अगर आप आईटीआर फाइल नहीं करते हैं तो विदेश जाने में आपको दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। कई देश अपने यहां आने वाले लोगों के इनकम टैक्स रिटर्न की मांग करते हैं। इससे वीजा हासिल करने के आपके चांसेज बढ़ जाते हैं।
टैक्स रिफंड क्लेम करने या लॉसेज सेट-ऑफ करने के लिए भी आईटीआर जरूरी है। अगर आपको शेयरों में निवेश से लॉस हुआ है और आपको इसे अगले साल कैरी-फॉरवर्ड करना चाहते हैं तो इसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न जरूरी है। भले ही आपकी इनकम 2.5 लाख रुपये से कम हो।