New Labour Codes: देश भर में नये लेबर कोड लागू होने का इंतजार लंबा हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए लेबर कोड नियमों को लागू करने में अभी समय लगेगा। ये 1 अक्टूबर से लागू करना मुश्किल लग रहा है। दरअसल, राज्यों से मिले इनपुट पर अभी चर्चा होनी बाकी है। इस चर्चा के बाद ही नए लेबर कोड नियम लागू हो पाएंगे। सरकार मौजूदा वित्त वर्ष में नए लेबर कोड लागू करना चाहती है।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो केंद्र सरकार नए लेबर कोड को नोटिफाई (New Wage Code Notification) करने को तैयार है। अब राज्यों से मिले इनपुट पर चर्चा होनी बाकी है। राज्यों को सितंबर 2021 तक वक्त दिया गया था। शुक्रवार को श्रम मंत्रालय में बैठक होनी है। इस बैठक के बाद ही साफ हो पाएगा कि लेबर कोड के नियम कब लागू हो पाएंगे। उसके बाद ही इन्हें नोटिफाई किया जा सकेगा।
श्रम कानून लागू होने से आएंगे ये बदलाव
हाथ में आने वाला वेतन घट जाएगा
श्रम कानून लागू होने से कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन घट जाएगा और कंपनियों को ऊंचे पीएफ दायित्व का बोझ उठाना पड़ेगा। नए ड्राफ्ट रूल के अनुसार, मूल वेतन कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन का स्ट्रक्चर में बदलाव आएगा। बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी के लिए कटने वाला पैसा बढ़ जाएगा क्योंकि इसमें जानें वाला पैसा बेसिक सैलरी के अनुपात में होता है। अगर ऐसा होता है जो आपके घर आने वाली सैलरी घट जाएगी रिटायरमेंट पर मिलने वाला PF और ग्रेच्युटी का पैसा बढ़ जाएगा।
नए ड्राफ्ट कानून में कामकाज के अधिकतम घंटों को बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव है। हालांक, 12 घंटे काम करने पर आपको हफ्ते में 4 दिन काम करना होगा और 3 दिन की छुट्टी मिलेगीष कोड के ड्राफ्ट नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त कामकाज को भी 30 मिनट गिनकर ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है। मौजूदा नियम में 30 मिनट से कम समय को ओवरटाइम योग्य नहीं माना जाता है। ड्राफ्ट नियमों में किसी भी कर्मचारी से 5 घंटे से ज्यादा लगातार काम कराने की मनाही है। कर्मचारियों को हर पांच घंटे के बाद आधा घंटे का रेस्ट देना होगा।
संसद में हो चुका है पारित
संसद द्वारा इन चार संहिताओं को पारित किया जा चुका है, लेकिन केंद्र के अलावा राज्य सरकारों को भी इन संहिताओं, नियमों को अधिसूचित करना जरूरी है। उसके बाद ही ये नियम राज्यों में लागू हो पाएंगे। ये नियम 1 अप्रैल 2021 से लागू होने थे लेकिन राज्यों की तैयारी पूरी नहीं होने के कारण इन्हें टाल दिया गया।