लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने में घटी है महिलाओं की दिलचस्पी, IRDAI की स्टडी के नतीजे

महिलाओं को बेची गई पॉलिसी में राज्य के लिहाज से कर्नाटक पहले पायदान पर रहा। करेल दूसरे और मिजोरम तीसरे पायदान पर रहा। सिक्किम चौथे और मेघालय पांचवें पायदान पर रहे। 2021-22 में लाइफ इंश्योरेंस पेनेट्रेशन (Life Insurance Penetration) 3.2 फीसदी थी, जो 2022-23 में गिरकर 3 फीसदी पर आ गई। नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के पेनेट्रेशन का डेटा भी उत्साहजनक नहीं था

अपडेटेड Dec 28, 2023 पर 4:21 PM
लाइफ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट रेशियो में हल्की गिरावट देखने को मिली। यह 2022-23 में 98.45 फीसदी थी, जबकि 2021-22 में 98.64 फीसदी थी। LIC का क्लेम सेटलमेंट रेशियो 98.52 फीसदी रहा, जबकि प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का क्लेम सेटलमेंट रेशियो 98.02 फीसदी रहा।

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने में महिलाओं की दिलचस्पी घट रही है। वित्त वर्ष 2021-22 में कुल बेची गईं लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में महिला ग्राहकों की हिस्सेदारी 34.7 फीसदी थी। यह वित्त वर्ष 2022-23 में घटकर 34.2 फीसदी पर आ गई। IRDAI की स्टडी से यह जानकारी मिली है। वित्त वर्ष 2022-23 में कुल 2.84 करोड़ लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी बेची गईं। इसमें से 97.38 लाख पॉलिसी महिलाओं ने खरीदी। इस स्टडी में सिर्फ इंडिविजुअल नए बिजनेस डेटा, पॉलिसी की संख्या और वित्त वर्ष 2022-23 के पहले साल के प्रीमियम को ध्यान में रखा गया।

LIC प्राइवेट बीमा कंपनियों से आगे

महिलाओं को पॉलिसी बेचने में लाइफ इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया (LIC) प्राइवेट जीवन बीमा कंपनियों से आगे रही। कुल बिक्री में LIC की हिस्सेदारी 35.81 फीसदी रही, जबकि प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस की हिस्सेदारी 30.31 फीसदी रही। महिलाओं को बेची गई पॉलिसी में राज्य के लिहाज से कर्नाटक पहले पायदान पर रहा। करेल दूसरे और मिजोरम तीसरे पायदान पर रहा। सिक्किम चौथे और मेघालय पांचवें पायदान पर रहे।


2047 तक सभी को इंश्योरेंस के दायरे में लाने का लक्ष्य

इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI ने 2047 तक हर व्यक्ति को इंश्योरेंस कवर के दायरे में लाने का लक्ष्य तय किया है। लेकिन, इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की पहुंच के डेटा उत्साहजनक नहीं हैं। 2021-22 में लाइफ इंश्योरेंस पेनेट्रेशन (Life Insurance Penetration) 3.2 फीसदी थी, जो 2022-23 में गिरकर 3 फीसदी पर आ गई। नॉन-लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के पेनेट्रेशन का डेटा भी उत्साहजनक नहीं था। Non-Life Insurance Penetration 1 फीसदी पर अपरिवर्तित रहा।

इंडिया में इंश्योरेंस पेनेट्रेशन बहुत कम

IRDAI ने अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा है, "2022-23 में इंडिया का ओवरऑल इंश्योरेंस पेनेट्रेशन घटकर 4 फीसदी पर आ गया। यह 2021-22 में 4.2 फीसदी था।" इंश्योरेंस पेनेट्रेशन का मतलब जीडीपी में टोटल प्रीमियम कलेक्टेड की हिस्सेदारी से है। इससे किसी देश में इंश्योरेंस सेक्टर के डेवलपमेंट के बारे में पता चलता है। Insurance Density (बीमा घनत्व) से भी किसी देश में इंश्योरेंस इंडस्ट्री के डेवलपमेंट के बारे में पता चलता है। इंश्योरेंस डेंटिसिटी से इंश्योरेंस इंडस्ट्री के डेवलपमेंट की ज्यादा सटीक जानकारी मिलती है। डॉलर में 2022-23 में लाइफ इंश्योरेंस डेंटिसिटी बढ़कर 70 डॉलर हो गई। 2021-22 में यह 69 डॉलर थी। नॉन-लाइफ इंश्योरेंस डेंटिसिटी में किसी तरह का बदलाव नहीं हुआ। ओवरऑल इंश्योरेंस डेंटिसिटी 2021-22 में 91 डॉलर से बढ़कर 2022-23 में 92 डॉलर हो गई।

क्लेम सेटलमेंट में LIC आगे

लाइफ इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट रेशियो में हल्की गिरावट देखने को मिली। यह 2022-23 में 98.45 फीसदी थी, जबकि 2021-22 में 98.64 फीसदी थी। LIC का क्लेम सेटलमेंट रेशियो 98.52 फीसदी रहा, जबकि प्राइवेट लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का क्लेम सेटलमेंट रेशियो 98.02 फीसदी रहा। अगर हेल्थ इंश्योरेंस की बात की जाए तो 2022-23 में जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों ने 85.66 फीसदी दावों का पेमेंट किया।

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