कायजाद ई अदाजानिया
पाठकों के लिए संदेशः किन्हीं दो लोगों के फाइनेंशियल प्लान कभी भी एक जैसे नहीं हो सकते हैं।
हमारी आमदनी, खर्च, लक्ष्य, महत्वाकांक्षाएं और वित्तीय जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं। लेकिन, फाइनेंशियल प्लानिंग के शुरुआती सिद्धांत आपकी उम्र के हिसाब से तकरीबन एक जैसे होते हैं। मनीकंट्रोल पर्सनल फाइनेंस की नई सीरीज ‘लाइफ स्टेज फाइनेंशियल प्लानिंग’ में इन्हीं व्यापक सिद्धांतों के बारे में बताया जाएगा।
आप उम्र के 20वें, 30वें या 60वें किसी भी पड़ाव पर हों, उसके हिसाब से इन सिद्धांतों के बारे में हम इस सीरीज में आपको बताएंगे।
आज की स्टोरी इस बारे में है कि उम्र के 20वें पड़ाव पर मौजूद लोग कैसे अपना निवेश शुरू कर सकते हैं या निवेश पर कैसे रिटर्न हासिल कर सकते हैं। उम्र के 20वें दशक में लिए गए कुछ सही फैसले आपको आगे की जिंदगी में वित्तीय रूप से सुरक्षित करने में बड़े तौर पर मददगार साबित होते हैं।
पहली तनख्वाह हमेशा खास होती है। अगर आप उम्र के 20वें दशक में हैं तो रुपयों से भरा पर्स और अपनी मर्जी से खर्च करने की आजादी बेपनाह सुकून देती है। निश्चित तौर पर आप खर्च करें, लेकिन यही वह समय भी है जबकि आपको बचत भी शुरू कर देनी चाहिए। यहां हम आपको बता रहे हैं कि कैसे उम्र के 20वें दशक में चल रहे युवाओं को पैसे इकट्ठा करना शुरू कर देना चाहिए।
अपने खर्चों पर लगाम लगाइए
जब हमारी पहली नौकरी लगती है तो उस वक्त आमतौर पर शुरुआती सैलरी कम होती है। अगर आपको दूसरे शहर जाकर नौकरी करनी पड़ती है तो जिंदगी शायद वैसी आसान नहीं रहती है। बड़े शहरों में किराए भी ज्यादा होते हैं। खाने-पीने और ग्रोसरी के खर्चों से बचा नहीं जा सकता है।
साथ ही अगर आपने एजूकेशन लोन लिया था, तो जैसे ही आपकी पहली नौकरी लगती है, आपके लिए यह कर्ज चुकाना भी जरूरी हो जाता है।
वीकेंड्स दोस्तों के साथ पार्टी करने, घूमने-फिरने, मूवीज देखने और बाहर खाने-पीने में गुजरता है। ऐसे में महीने के अंत में आपकी जेब में कम ही पैसे बचते हैं।
एक्सपर्ट्स कड़ाई से खर्चों को नियंत्रण में रखने की सलाह देते हैं। सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर और प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के फाउंडर सीईओ विशाल धवन इसके लिए दो मद बनाने की सलाह देते हैं।
पहले मद में ऐसे खर्च आते हैं जिन्हें आप दरकिनार नहीं कर सकते हैं। मसलन, इसमें एजूकेशन लोन का रीपेमेंट, ग्रोसरी पर होने वाला खर्च और किराया जैसे आइटम आते हैं।
दूसरे मद में आपके मनमर्जी के खर्च आते हैं। इसमें मनोरंजन, मूवी स्ट्रीमिंग और सब्सक्रिप्शन से जुड़े खर्च शामिल होते हैं।
धवन कहते हैं, “अपने साधनों में रहना सीखिए। अगर आपके सामने किराए के घर पर रहने की मजबूरी है तो ऐसी जगह पर रहिए जहां किराया थोड़ा सस्ता हो, भले ही इसके लिए आपको थोड़ा ट्रैवल करना पड़े।”
विशाल मानते हैं कि जिन तरीकों से खर्चों को नियंत्रित रखा जा सकता है उनमें से एक यह है कि हर महीने आप एक निश्चित रकम, मान लीजिए कि आपकी कमाई का करीब 30 फीसदी हिस्सा, दूसरे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दें। वे कहते हैं, “इस बैंक अकाउंट को हाथ मत लगाइए। यह अमाउंट आपके खर्चों के लिए नहीं होना चाहिए।”
क्या मैं निवेश कर सकता हूं?
अपनी उम्र के 20वें दशक में हम में से कई लोगों को लगता है कि निवेश के लिए पैसे अलग रखना आसान नहीं है।
पीकअल्फा इनवेस्टमेंट सर्विसेज की डायरेक्टर प्रिया सुंदर कहती हैं, “यह एक भ्रम है। जो लोग ऐसा कहते हैं कि हमारे पास निवेश करने के लिए पैसा नहीं है, उनसे हम सिर्फ यही कहते हैं कि वे हर महीने 1,000 रुपये बचाएं।”
1,000 रुपये के साथ आप एक सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) शुरू कर सकते हैं। एसआईपी ऐसे प्लान होते हैं जिनमें आप हर महीने एक निश्चित रकम निवेश करते हैं।
आप पोस्टल टाइम डिपॉजिट्स जैसी स्मॉल सेविंग स्कीमों में भी पैसा लगा सकते हैं। इसके अलावा आप 1,000 रुपये जितनी कम रकम के नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) भी खरीद सकते हैं।
सेबी में बतौर रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर किरन तेलंग कहती हैं, “इस उम्र में हर महीने निवेश करने के लिए पैसे अलग रखना आसान नहीं होता है। लेकिन, कुछ साल बाद जब आप अपने पैसे को बढ़ता हुआ देखते हैं तो आपको खुशी होती है।”
अगर आप 23 साल की उम्र में निवेश शुरू करते हैं और हर महीने 1,000 रुपये बचाते हैं तो 60 साल की उम्र में आपके पास करीब 83 लाख रुपये होंगे। लेकिन, इस निवेश में देरी करने और 30 साल की उम्र से निवेश शुरू करने पर आप केवल 35 लाख की पूंजी ही इकट्ठा कर पाएंगे।
अब एक कदम आगे की बात सोचते हैं। आपकी पहली सैलरी कम हो सकती है। लेकिन, अगर आप आने वाले वर्षों में अच्छी प्रगति करते हैं तो आपकी सैलरी में भी तगड़ी बढ़ोतरी होगी। फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि साल में कम से कम एक बार आपको अपने एसआईपी में निवेश को या तो टॉप अप करना चाहिए या फिर इसे बढ़ाना चाहिए।
अगर आप 23 साल की उम्र से महज 1,000 रुपये के साथ एसआईपी शुरू करते हैं और हर साल अपनी किस्त को केवल 100 रुपये ही बढ़ाते जाते हैं तो जब आप 60 साल की उम्र पर पहुंचेंगे तो उस वक्त आपके पास 1.38 करोड़ रुपये होंगे। इस कैलकुलेशन में यह मानकर चला गया है कि आपका इक्विटी फंड हर साल 12 फीसदी की दर से बढ़ेगा।
हेल्थ इंश्योरेंस
ज्यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों को हेल्थ इंश्योरेंस देती हैं। यह मुमकिन है कि आपको भी अपनी पहली नौकरी में बीमा मिले। लेकिन, यह पर्याप्त नहीं है। अपना खुद का हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लीजिए। विशाल कहते हैं, “दूसरे खर्चों के मुकाबले मेडिकल कॉस्ट में ज्यादा तेज बढ़ोतरी हो रही है। हर किसी को एक हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत है।” इस साल कोरोना वायरस महामारी के फैलने के साथ ही ज्यादातर लोगों को अपनी नौकरियों से भी हाथ धोना पड़ा है।
अगर आपकी नौकरी जाती है तो कंपनी से मिलने वाला इंश्योरेंस भी खत्म हो जाता है। इसी वजह से आपको एक अपना हेल्थ इंश्योरेंस ले लेना चाहिए। यह हमेशा मददगार साबित होगा। साथ ही अगर आप उम्र के 20वें दशक में हैं तो हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम सबसे कम होते हैं क्योंकि इस उम्र में आप आमतौर पर स्वस्थ होते हैं। आमतौर पर ज्यादातर बीमा कंपनियां इस उम्र में मेडिकल चेकअप के लिए भी नहीं कहती हैं।
मेरे पास कितने क्रेडिट कार्ड होने चाहिए?
जब पहली नौकरी लगती है और बैंक में सैलरी अकाउंट खुलता है तो अक्सर बैंक लोगों को क्रेडिट कार्ड लेने के लिए उत्साहित करते हैं। हर महीने न्यूनतम बकाया का भुगतान करने और जमकर खर्च करने की आजादी से आप कर्ज के जाल में फंस सकते हैं। किरन कहती हैं कि उम्र के 20वें दशक में आपके पास केवल एक क्रेडिट कार्ड होना चाहिए। वे कहती हैं, “क्रेडिट कार्ड एक ऐसा साधन नहीं है जिससे आप बिना किसी हद के अपनी मनमर्जी से खर्च करते चले जाएं। इसे जेब में कैश न रखने के बदले एक सुविधा के तौर पर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।”
यह सुनिश्चित कीजिए कि आप वक्त पर अपना पूरा मंथली बिल चुकाते रहें। अपने क्रेडिट कार्ड के कर्ज को रोल ओवर मत कीजिए। किसी भी तरह के कर्ज के मुकाबले यह सबसे महंगा होता है। क्रेडिट कार्ड कंपनियां आप पर मौजूद बकाया रकम पर 40 फीसदी सालाना जितना बड़ा ब्याज वसूलती हैं।
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