सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देशभर में E20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य कर दी है। इसका मतलब है कि अब सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20 प्रतिशत तक एथनॉल मिला पेट्रोल बेचा जाएगा। साथ ही इस पेट्रोल का न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 होना जरूरी होगा। यह फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 फरवरी की अधिसूचना के जरिए लिया है।
सरकार के अनुसार तेल कंपनियां भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों के तहत ही यह पेट्रोल बेचेंगी। हालांकि खास परिस्थितियों में सरकार कुछ एरिया को सीमित समय के लिए छूट दे सकती है।
एथनॉल गन्ने, मक्का और अन्य अनाज से बनाया जाता है। सरकार पेट्रोल में एथनॉल मिलाने को इसलिए बढ़ावा दे रही है ताकि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हो और प्रदूषण में भी कमी आए। इससे देश को विदेशी मुद्रा की बचत होगी और पर्यावरण को भी फायदा होगा।
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि 2023-25 के बाद बनी ज्यादातर गाड़ियां ई20 पेट्रोल पर चलने के लिए डिजाइन की गई हैं। इसलिए नए वाहनों में कोई बड़ी समस्या नहीं आएगी। लेकिन पुराने वाहनों में माइलेज 3 से 7 प्रतिशत तक कम हो सकता है। कुछ मामलों में रबर या प्लास्टिक के पुर्जों पर असर पड़ने की भी संभावना है।
न्यूनतम 95 RON रखने का उद्देश्य इंजन को नुकसान से बचाना है। RON ईंधन की नॉकिंग के खिलाफ क्षमता को मापता है। नॉकिंग तब होती है जब ईंधन इंजन में असमान रूप से जलता है, जिससे आवाज आती है और लंबे समय में इंजन खराब हो सकता है। ज्यादा RON वाला पेट्रोल इंजन के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।