MSME सप्लायर्स को 31 मार्च तक पेमेंट नहीं करने पर चुकाना होगा ज्यादा टैक्स
MSME को अक्सर पेमेंट में देरी का सामना करना पड़ता है। इससे उन्हें काफी मुश्किल होती है। इस प्रॉब्लम को दूर करने के लिए सरकार ने फाइनेंस एक्ट 2023 में एक नया सेक्शन जोड़ा है। इसके मुताबिक तय समय तक पेमेंट नहीं करने पर वह पैसा बिजनेस के रेवेन्यू में जोड़ दिया जाएगा, जिस पर उसे टैक्स चुकाना होगा
सभी बिजनेस एंटरप्राइजेज के लिए अपने ट्रांजैक्शन की समीक्षा जरूरी है ताकि वर्ष के अंत में इनकम टैक्स एक्ट के तहत जयादा टैक्स भरने से बचा जा सके।
एमएसएमई (MSME) को अक्सर कस्टमर्स से पेमेंट समय पर नहीं मिलता है। कुछ इंडस्ट्रीज में पेमेंट साइकिल बहुत लंबी है। 2023 के फाइनेंस एक्ट में समय पर एमएसएम को पेमेंट के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया। फाइनेंस एक्ट में सेक्शन 43B(h) को शामिल किया गया। 43B(h) के तहत एमएसएमई सप्लायर्स से खरीदारी के खर्च को पेमेंट्स के आधार पर क्लेम किया जा सकता है न कि जब एक्सपेंसेज या पर्चेस की एंट्री बुक्स ऑफ अकाउंट्स में की जाती है। यह नियम 1 अप्रैल, 2023 से लागू हो चुका है।
बिजनेस के लिए सभी ट्रांजेक्शन की समीक्षा जरूरी है
हम फाइनेंशियल ईयर 2023-24 के अंत के करीब हैं। इसलिए सभी बिजनेस एंटरप्राइजेज के लिए अपने ट्रांजैक्शन की समीक्षा जरूरी है ताकि वर्ष के अंत में इनकम टैक्स एक्ट के तहत जयादा टैक्स भरने से बचा जा सके।
इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 43B(h) क्या कहता है?
इस सेक्शन के अनुसार, पेमेंट्स एमएसएमई वेंडर्स को निर्धारित उधार की समय सीमा के मुताबिक किया जाना चाहिए। इस बारे में एमएसएमईडी एक्ट, 2006 के सेक्शन 15 में बताया गया है। अगर लिखित समझौता किया गया है, तो एमएसएमईडी एक्ट के अनुसार अधिकतम क्रेडिट अवधि 45 दिन है, और अगर कोई लिखित समझौता नहीं है तो ये 15 दिन होगा। इस प्रकार, अगर कोई खरीदार निर्धारित अवधि के अंदर सप्लायर को पेमेंट नहीं करता, तो उसको एमएसएमईडी एक्ट, 2006 के तहत तीन गुना बैंक दर के हिसाब से ब्याज देना होगा।
इनकम टैक्स की धारा 43B(h) के मुताबिक, एमएसएमई सप्लायर को अगर इस समय सीमा में पेमेंट नहीं किया जाता है तो ये राशि खरीदार अपने खर्च के रूप में नहीं दिखा पाएंगे। यह महत्वपूर्ण है कि 15 या 45 दिन की अवधि को सेक्शन 43B(h) के लिए माना जाएगा, चाहे बेचने की शर्तें कितनी भी लंबी हो।
उदाहरण से आसानी से समझें
इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए 1 जनवरी 2024 को कोई खरीदार एक एमएसएमई वेंडर से 5 लाख की खरीदारी करता है और लिखित में बेचने की शर्तों के अनुसार, 4 महीने की अवधि दी गई है, जिसके अनुसार, बिल का भुगतान 30 अप्रैल 2024 तक किया जा सकता है। अगर खरीददार 31 मार्च 2024 तक बिल का भुगतान नहीं करता है तो इस केस में, 5 लाख की रकम को व्यावसायिक खर्च के रूप में 2023-24 के वित्तीय वर्ष के लिए नहीं माना जाएगा, क्योंकि ये लिखित समझौते के तहत मिलने वाले 45 दिन की अवधि को पार कर जाता है।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि केवल उद्यम पोर्टल पर रजिस्टर्ड माइक्रो और छोटे उद्योग (एमएसएमई) ही एमएसएमईडी एक्ट के धारा 15 के अंतर्गत सप्लायर्स के रूप में माने जाते हैं। इसके अलावा, कौन-कौन से सप्लायर्स धारा 15 के अंतर्गत आते हैं या नहीं ये जानने के लिए आप अपने टैक्स या लीगल एडवाइजर से सलाह कर सकते हैं।
व्यापारी इन बातों का रखें ध्यान:
अगर आप अपने व्यापार के लिए सामान या सेवा खरीद रहे हैं, तो आपको सभी सप्लायर्स से उनके एमएसएमई सर्टिफिकेट्स लेना चाहिए और जिन्होंने एमएसएमई रजिस्ट्रेशन नहीं लिया है उनसे एक अंडरटेकिंग प्राप्त करनी चाहिए कि उन्होंने एमएसएमई रजिस्ट्रेशन नहीं लिया है। ये कार्य हर वित्तीय वर्ष में करना चाहिए।
अगर आप एमएसएमई में रजिस्टर्ड हैं तो, अपने लेटरहेड्स, सप्लाई ऑर्डर शीट्स, इनवॉइसेज, बिल्स, और उचित दस्तावेजों पर अपने एमएसएमई रजिस्ट्रेशन का ज़िक्र करना चाहिए।
यदि आपको एसएमई या एमएसएमई के रूप में रजिस्ट्रेशन प्राप्त करना है, तो आप इसे https://udyamregistration.gov.in/ पर उद्यम पोर्टल पर प्राप्त कर सकते है। मौजूदा रजिस्ट्रेशन का स्थिति https://udyamregistration.gov.in/udyam_verify.aspx पर देखा जा सकता है।
हालांकि, कई प्रस्ताव सरकार को दिए गए हैं कि धारा 43B(h) के लागू होने की अवधि को बढ़ाया जाए, लेकिन, इसमें सरकार ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं जताई है। आने वाले समय में ये देखना होगा कि सरकार इसमें कोई रिलैक्सेशन देती है या नहीं।
(लेखक सीए हैं। वह पर्सनल फाइनेंस खासकर इनकम टैक्स से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट हैं)