दोस्त-रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने से पहले ठीक से सोच लें, नहीं तो बाद में बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं

लोन लेने वाला व्यक्ति बैंक से लिया गया पैसा नहीं चुकाता है तो उस पैसे को चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर की होती है। इसका मतलब है कि गारंटर बनने से व्यक्ति के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए रिस्क हो सकता है। इतना ही नहीं, लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है

अपडेटेड Aug 18, 2026 पर 7:11 PM
कई लोग सोचते हैं कि लोन का गारंटर बनने का मतलब सिर्फ डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करना है। लेकिन, यह सच नहीं है।

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने का फैसला जल्दबाजी में नहीं करें। इस बारे में बगैर सोचे फैसला लेने से आप बाद में मुश्किल में फंस सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन के गारंटर की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। कई लोग सोचते हैं कि लोन का गारंटर बनने का मतलब सिर्फ डॉक्युमेंट पर हस्ताक्षर करना है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

लोन के रीपेमेंट में डिफॉल्ट पर गारंटर मुश्किल में पड़ सकता है

अगर लोन लेने वाला व्यक्ति बैंक से लिया गया पैसा नहीं चुकाता है तो उस पैसे को चुकाने की जिम्मेदारी गारंटर की होती है। इसका मतलब है कि गारंटर बनने से व्यक्ति के फाइनेंशियल हेल्थ के लिए रिस्क हो सकता है। इतना ही नहीं, लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में गारंटर की क्रेडिट प्रोफाइल पर भी असर पड़ता है।


बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे की पूरी सुरक्षा चाहता है

एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनाने के पीछे बैंक का मकसद अपने पैसे की सुरक्षा है। बैंक लोन देने से पहले अपने पैसे को डूबने से बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाता है। इसलिए लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने की स्थिति में पहले वह लोन लेने वाले व्यक्ति से इसकी वजह पूछता है। अगर लोन लेने वाले व्यक्ति से संपर्क नहीं होता है तो वह गारंटर से संपर्क करता है।

लोन पर डिफॉल्ट की स्थिति में गारंटर को भी बैंक भेजता है नोटिस

लोन का पैसा नहीं चुकाए जाने पर बैंक पहले ग्राहक को नोटिस भेजता है। लगातार तीन ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक ग्राहक को रजिस्टर्ड नोटिस भेजता है। लगातार चार ईएमआई का पेमेंट नहीं करने पर बैंक बैंक ग्राहक और गारंटर दोनों को नोटिस भेजता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैंक के पास ग्राहक यानी लोन लेने वाले व्यक्ति और गारंटर के खिलाफ एक साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का अधिकार होता है।

पेमेंट में डिफॉल्ट का असर गारंटर के क्रेडिट प्रोफाइल पर भी पड़ता है

किसी दोस्त या रिश्तेदार के लोन का गारंटर बनने के बाद अगर लोन का रीपेमेंट बंद हो जाता है तो इसका खराब असर गारंटर के क्रेडिट स्कोर पर भी पड़ता है। इसका मतलब है कि इससे गारंटर को खुद के लिए लोन लेने में दिक्कत आ सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोन का गारंटर बनने से पहले आपको ठीक तरह से सोच समझ लेना चाहिए।

यह भी पढ़ें: मुसीबत में कौन सा फंड देगा आपका साथ? जानिए EPF, NPS, PPF और म्यूचुअल फंड्स से निकासी की पूरी टाइमलाइन

व्यक्ति की वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी होने पर ही बनें गारंटर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आपको लोन का गारंटर तभी बनना चाहिए, जब लोन लेने वाला व्यक्ति आपका बहुत करीबी है। उदाहरण के लिए पत्नी, भाई, बहन के लोन लेने पर आप गांरटर बन सकते हैं। इसकी वजह यह है कि आपको उनकी वित्तीय स्थिति और लोन चुकाने की क्षमता का पता होता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स लंबी अवधि वाले लोन का गारंटर बनने से बचने की सलाह देते हैं।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।