म्यूचुअल फंड कंपनियां इनवेस्टर्स को रिटर्न के बारे में किसी तरह का वादा नहीं कर सकेंगी। SEBI ने म्यूचुअल फंड हाउसेज को रिटर्न के बारे में किसी तरह का आश्वासन देने से मना किया है। इस बारे में एक लेटर एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (AMFI) को भेजा गया है। इसमें एंफी को एडवर्टाइजमेंट कोड का पालन करने को कहा है। SEBI के म्यूचुअल फंड्स रेगुलेशन में यह कोड शामिल है। सेबी ने लेटर में कहा है कि उसने ऐसे कुछ मामले पाए हैं, जिसमें म्यूचुअल फंड कंपनियों ने कुछ ब्रोशर सर्कुलेट किए हैं। इनमें जो जानकारी दी गई है, उसे पढ़ने के बाद इनवेस्टर्स यह उम्मीद कर सकता है कि SIP और Systematic Withdrawal Plan (SWP) के कंबिनेशन का इस्तेमाल करने के बाद उन्हें एक निश्चित अमाउंट मिलेगा।
SWP ऐसी फैसिलिटी है, जिसमें आप हर महीने एक फिक्स्ड अमाउंट निकाल सकते हैं। SIP के जरिए आप हर महीने के निश्चित अमाउंट इनवेस्ट करते हैं। कानून के मुताबिक, म्यूचुअल फंड्स रिटर्न की गारंटी नहीं दे सकते। लेकिन, SWP रेगुलर रिटर्न पाने का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। खासकर पिछले कुछ सालों में यह रिटायर्ड लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुका है।
म्यूचुअल फंड हाउसेज इनवेस्टर्स को रिटर्न का भरोसा दिला रहे हैं
रिटर्न का वादा करना या यह उम्मीद पैदा करना कि यह रेगुलर इनकम पाने का पक्का तरीका है-एक दूसरा मसला है। समस्या की शुरुआत यहीं से होती है। सेबी को जो ब्रोशर मिले हैं, उसमें इस तरह का भरोसा दिलाया गया है कि अगर आप SIP शुरू करते हैं और तीन साल या इससे ज्यादा समय के बाद SWP शुरू करते हैं तो आपको एश्योर्ड रिटर्न मिलेगा। सच्चाई यह है कि अगर आपकी स्कीम की नेट एसेट वैल्यू नहीं बढ़ती है तो SWP से आप अपना पैसा निकाल सकते हैं।
क्या कहता है सेबी का नियम?
SEBI के MF Regulations के मुताबिक, कोई म्यूचुअल फंड रिटर्न का आश्वासन नहीं दे सकता। चूंकि सभी म्यूचुअल फंड्स इक्विटी और डेट फंड्स में निवेश करते हैं तो इसलिए मार्केट चढ़ने-उतरने पर NAV भी बढ़ती-घटती है। इसलिए रिटर्न का वादा करना समझ में नहीं आता।
SEBI ने फ्यूचर रिटर्न के बारे में बताने के लिए इलेस्ट्रेशन दिखाने पर भी नाराजगी जताई है। SBI के लेटर में कहा गया है, "आपको यह सलाह दी जाती है कि आपको सभी AMC को म्यूचुअल फंडों को भविष्य में इस तरह की प्रैक्टिस से दूर रहने को कहा गया है।"