NPS: नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) सरकार की एक बेहद खास स्कीम है। इसमें निवेश करने पर लोगों रिटारमेंट काफी फायदा मिलता है। यानी यह एक प्रकार से बुढ़ापे की लाठी है।
इसकी शुरुआत जनवरी 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई थी लेकिन 2009 में यह सभी लोगों को निवेश करने के लिए दरवाजे खोल दिए गए। इस योजना के तहत आप अपने कामकाजी उम्र के दौरान नियमित तौर पर कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं।
इसके बाद 60 साल की उम्र पूरी होने पर इकट्ठा हुई राशि के एक हिस्से को वह एक बार में निकाल सकते हैं और बची हुई राशि से वह नियमित तौर पर पेंशन के तौर पर ले सकते हैं। इसमें लॉन्ग टर्म में निवेश करने पर फायदा होता है और मोटी रकम कमाई जा सकती है।
खुशखबरी: NPS से पूरा पैसा निकाल सकेंगे सब्सक्राइबर्स, इन नियमों में आया बदलाव
इसके लिए आपको टियर-1 और टियर-2 अकाउंट में नियमित कॉन्ट्रिब्यूशन करने की जरूरत पड़ती है। NPS अकाउंट खोलते वक्त सब्सक्राइबर्स को विकल्प दिया जाता है। वे चाहें तो विभिन्न एसेट क्लास में खुद पैसा लगाएं या फिर ऑटो च्वाइस ऑप्शन का चयन कर सकते हैं। इसमें सब्सक्राइबर की उम्र के हिसाब से फंडों का आवंटन किया जाता है। अकाउंट खोलते समय फंड मैनेजमेंट की जरूरत होती है।
केंद्रीय कर्मचारी अब NPS और पुराने पेंशन स्कीम में से कोई विकल्प चुन सकेंगे, लेकिन ये है शर्त
टियर-1 अकाउंट में टैक्स बेनिफिट मिलता है। टियर-2 अकाउंट के लिए टियर-1 अकाउंट होना जरूरी है। टियर-1 अकाउंट में कम से कम 500 रुपये प्रति महीने निवेश करना अनिवार्य है। इस तरह, टियर-2 अकाउंट में 6000 रुपये सालाना निवेश करना जरूरी है।
टियर-1 अकाउंट पर टैक्स राहत
NPS के तहत इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80CCD(1B) के तहत 50 हजार रुपये तक के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। अगर आप सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की लिमिट पूरी कर चुके हैं तो NPS आपको एक्स्ट्रा टैक्स सेविंग्स में भी मदद कर सकता है। इस योजना की मेच्योरिटी पर 60 फीसदी तक रकम निकालने पर टैक्स नहीं लगता है।
जानें घर बैठे कैसे खोल सकते हैं NPS खाता, ये तरीका है बेहद आसान
NPS में अगर आप अकाउंट खोलना चाहते हैं तो आप 2 तरीके से अकाउंट खोल सकते हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन। आप पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कंपनी भी बदल सकते हैं। ये पेंशन फंड को मैनेज करते हैं।
ऑटो ऑप्शन में आप फंड मैनेजर निवेशक की उम्र के मुताबिक एसेट क्लास का चयन करते हैं। 18-35 साल के निवेशक का 50 फीसदी इक्विटी, 30 फीसदी कॉरपोरेट बॉन्ड्स और 20 फीसदी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है। 36 साल के बाद हर साल 2 फीसदी इक्विटी निवेश कम हो जाता है। 55 साल तक पहुंचने पर इक्विटी केवल 10 फीसदी रह जाएगा। ऑटो ऑप्शन में रिटायरमेंट तक इक्विटी में निवेश कम हो जाता है।
सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।
