NPS New Rules: नेशनल पेंशन सिस्टम में बड़ा बदलाव! रिस्क से लेकर मर्जर तक... जानिए 5 बड़े अपडेट
NPS New Rules PFRDA Scheme: नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करने वालों के लिए PFRDA ने बड़ा फरमान जारी किया है। नए बदलाव का मुख्य मकसद सभी पेंशन फंड्स की स्कीम्स में एकरूपता लाना और सब्सक्राइबर्स के लिए रिस्क व रिटर्न की तुलना करना बेहद आसान बनाना है। समझिए PFRDA के इस नए आदेश के बाद NPS में क्या-क्या बदलने वाला है और आपके निवेश पर इसका क्या असर पड़ेगा
अब कोई भी पेंशन फंड एक ही कैटेगरी में Tier-I या Tier-II के तहत अधिकतम 2 स्कीम्स ही चला सकता है
NPS Schemes New Changes: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वाले करोड़ों नौकरीपेशा और पेंशन सब्सक्राइबर्स के लिए बेहद अहम खबर है। पेंशन फंड नियामक PFRDA ने NPS स्कीम्स के वर्गीकरण, नामकरण और प्रेजेंटेशन के लिए एक नया और पारदर्शी फ्रेमवर्क पेश किया है।
इस नए बदलाव का मुख्य मकसद सभी पेंशन फंड्स की स्कीम्स में एकरूपता लाना और सब्सक्राइबर्स के लिए रिस्क व रिटर्न की तुलना करना बेहद आसान बनाना है। आइए समझते हैं PFRDA के इस नए आदेश के बाद NPS में क्या-क्या बदलने वाला है और आपके निवेश पर इसका क्या असर पड़ेगा।
5 हिस्सों में बांटी गईं NPS की सभी स्कीम्स
PFRDA के नए फ्रेमवर्क के तहत अब नेशनल पेंशन सिस्टम की सभी मौजूदा और नई स्कीम्स को मुख्य रूप से 5 श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा:
1- लाइफसाइकिल बेस्ड स्कीम्स: इसमें पहले की तरह LC-Aggressive, LC-50 Moderate और LC-25 Low जैसे विकल्प रहेंगे, जहां उम्र के साथ इक्विटी और बॉन्ड्स का रेश्यो अपने आप बदलता है।
2- एक्टिव चॉइस: इसमें निवेशक अपनी पसंद से इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में अलॉटमेंट तय करते हैं।
3- एनपीएस संचय: यह अनफॉर्मल सेक्टर के लिए डिजाइन किया गया है, जो सरकारी सेक्टर के एनपीएस पैटर्न पर आधारित है।
4- 4A स्कीम्स: इसमें विशेष रूप से NPS वात्सल्य, NPS स्वास्थ्य और NPS MSME जैसी स्कीम्स शामिल होंगी।
5- मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF): इसमें इक्विटी के एक्सपोजर के हिसाब से स्कीम्स तय होंगी।
MSF स्कीम्स का नया रिस्क और इक्विटी मॉडल
सबसे बड़ा बदलाव 'मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क' (MSF) के तहत आने वाली स्कीम्स में किया गया है। अब इन्हें शेयर बाजार में निवेश के आधार पर 5 सब-कैटेगरी में बांटा गया है:
MSF स्कीम्स का नया रिस्क और इक्विटी मॉडल
कैटेगरी
इक्विटी में निवेश
रिस्क प्रोफाइल
कैटेगरी A
80% से 100% एग्रेसिव ग्रोथ
बहुत ज्यादा रिस्क
कैटेगरी B
60% से 80% हाई ग्रोथ
ज्यादा रिस्क
कैटेगरी C
35% से 60% बैलेंस्ड ग्रोथ
मध्यम रिस्क
कैटेगरी D
10% से 35% कंजर्वेटिव
कम रिस्क
कैटेगरी E
0% से 10% डेट
न्यूनतम रिस्क
खास बात यह है कि अब कोई भी एक स्कीम एक साथ कई कैटेगरी की सीमाओं को पार कर शेयर बाजार में पैसा नहीं लगा सकेगी।
30 दिनों के भीतर बदल जाएंगे कई एनपीएस स्कीम्स के नाम
निवेशकों को गुमराह होने से बचाने के लिए PFRDA ने एक स्टैंडर्ड नेमिंग फॉर्मेट तय किया है। अब हर MSF स्कीम के नाम में फंड हाउस का नाम + NPS + कैटेगरी कोड + स्कीम का नाम लिखा होना अनिवार्य होगा। अगर यह Tier-2 अकाउंट है, तो नाम के अंत में 'Tier 2' भी जोड़ना होगा। पेंशन फंड्स को सर्कुलर जारी होने के 30 दिनों के भीतर अपनी मौजूदा स्कीम्स का नाम इस नए नियम के तहत बदलना होगा।
स्कीम्स का होगा मर्जर: 45 दिनों में करना होगा पुनर्गठन
अब कोई भी पेंशन फंड (जैसे- SBI, LIC, HDFC Pension Fund) एक ही कैटेगरी में Tier-I या Tier-II के तहत अधिकतम 2 स्कीम्स ही चला सकता है। अगर किसी फंड हाउस के पास एक ही कैटेगरी में 2 से ज्यादा स्कीम्स हैं, तो उन्हें 45 दिनों के भीतर मर्जर (विलय) या रीस्ट्रक्चर करना होगा। किसी भी मर्जर या बदलाव से पहले सब्सक्राइबर्स को इसकी पूर्व सूचना दी जाएगी।
स्कीम चुनने से पहले दिखेगा 'Risk-o-meter' और AUM
अब एनपीएस प्लेटफॉर्म्स पर स्कीम का चुनाव करते समय निवेशकों को पारदर्शी जानकारी मिलेगी। किसी भी पेंशन फंड को चुनने से पहले आपको ये डिटेल्स दिखेंगी:
फंड हाउस और स्कीम का नाम
लॉन्च की तारीख और पिछला रिटर्न
बेंचमार्क और लागू होने वाले चार्जेस
Risk-o-meter और कुल फंड साइज
इसके अलावा, हर MSF स्कीम के लिए 'NPS Scheme Essentials Document' जारी किया जाएगा, जिसमें टैक्स, विड्रॉल नियम, रिस्क लेवल और स्कीम के उद्देश्य की पूरी जानकारी होगी।
स्कीम बदलने और बंद होने पर क्या होंगे नियम?
फंड बदलने की छूट: निवेशक एक वित्त वर्ष में अपने अकाउंट में अधिकतम 2 बार पेंशन फंड या इन्वेस्टमेंट स्कीम बदलने की रिक्वेस्ट डाल सकते हैं। अगर आप फंड या स्कीम बदलते हैं, तो इससे आपका ओरिजिनल वेस्टिंग पीरियड नहीं बदलेगा।
अगर कोई MSF स्कीम बंद होती है, तो सब्सक्राइबर्स को दूसरी स्कीम में शिफ्ट होने का मौका दिया जाएगा। अगर निवेशक कोई विकल्प नहीं चुनता, तो उसे अपने आप उसी फंड की LC 50 – मॉडरेट (10E/55Y) स्कीम में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
आम निवेशकों के लिए क्या हैं इसके मायने?
अगर आपकी मौजूदा स्कीम में इक्विटी लिमिट पार हो रही है या एक ही कैटेगरी में कई स्कीम्स हैं, तो आपकी स्कीम का नाम बदल सकता है या वह किसी दूसरी स्कीम में मर्ज हो सकती है। नए निवेशकों के लिए किसी भी पेंशन फंड के रिस्क और रिटर्न की तुलना करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो जाएगा।
(नोट: PFRDA का यह नया क्लासिफिकेशन फ्रेमवर्क केवल रिटेल/आम नागरिकों के NPS अकाउंट पर लागू होगा, यह सरकारी कर्मचारियों के NPS अकाउंट्स पर लागू नहीं होगा।)