कई लोग नौकरी तो इंडिया में शुरू करते हैं, लेकिन बाद में उनका ट्रांसफर विदेश हो जाता है। खासकर आईटी कंपनियों में ऐसा देखने को मिलता है। इंडिया में नौकरी के दौरान इंप्लॉई पीपीएफ (PPF) अकाउंट खोल लेता है। हर महीने वह इसमें इनवेस्ट भी करता है। लेकिन, विदेश ट्रांसफर होने के बाद उसे मुश्किल आती है। NRI बन जाने के बाद तो उसे लगता है कि वह इंडिया में अपने PPF अकाउंट में कंट्रिब्यूशन जारी नहीं रख सकता। आइए जानते हैं इस बारे में क्या नियम है।
अगर इंडिया में रहते आपने PPF Account खोला था, और अब विदेश चले गए हैं तो आपका पीपीएफ एकाउंट एक्टिव बना रहेगा। आपके NRI बन जाने के बाद भी यह एक्टिव बना रहेगा। आप पहले की तरह इसमें इनवेस्टमेंट जारी रख सकते हैं।
NRI बनने के बाद भी आप अपने पीपीएफ अकाउंट में एक फाइनेंशियल ईयर में 1.5 लाख रुपये तक निवेश कर सकते हैं। ऐसा आप तब तक कर सकते हैं, जब तक पीपीएफ अकाउंट मैच्योर नहीं हो जाता। अगर आप इंडिया में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं तो सेक्शन 80सी के तहत पीपीएफ में कंट्रिब्यूशन पर डिडक्शन भी क्लेम कर सकते हैं।
यह याद रखें कि नॉन-रेजिडेंट इंडियन (NRI) को पीपीएफ अकाउंट खोलने की इजाजत नहीं है। पहले एनआरआई को अपने एनआरओ अकाउंट के जरिए पीपीएफ में इनवेस्ट करने की इजाजत थी। लेकिन, अब ऐसा नहीं है।
PPF रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बहुत जरूरी है। अगर इसमें हर साल इनवेस्ट किया जाए तो मैच्योरिटी तक अच्छा फंड तैयार हो जाता है। इसलिए यह आपके फाइनेंशियल गोल (Financial Goal) को हासिल करने में भी मददगार हो सकता है।
PPF की कई खासियतें हैं। पहला, इसमें इनवेस्टमेंट पर आपको इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी के तहत टैक्स छूट मिलती है। सिर्फ यहीं नहीं, इसमें एग्जेम्पट-एग्जेम्पट-एग्जेम्पट (EEE) बेनिफिट भी मिलता है। इसका मतलब है कि आपके कंट्रिब्यूशन पर टैक्स नहीं लगता है। आपके डिपॉजिट पर मिलने वाले इंट्रेस्ट पर टैक्स नहीं लगता है।
आखिर में मैच्योरिटी पर मिलने वाला टोटल अमाउंट पर भी किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है। ऐसे बहुत कम इनवेस्टमेंट ऑप्शन हैं, जिनमें EEE का बेनिफिट मिलता है।