FD strategy: एक FD या फिर कई सारी? ₹7 लाख को कैसे निवेश करने में होगा ज्यादा फायदा
Fixed Deposit strategy: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी भारत में निवेश के सबसे भरोसेमंद तरीकों में से एक है। अगर आपको ₹7 लाख की FD करनी हो, तो एक FD करना सही रहेगा या कई सारी। आइए समझते हैं दोनों के फायदे और नुकसान।
एक बड़ी FD की सबसे बड़ी समस्या तब आती है, जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए।
पैसा कमाने के लिए मेहनत और अनुशासन चाहिए, लेकिन उसे समझदारी से कहां निवेश किया जाए, यह फैसला उतना ही अहम होता है। आज के दौर में सिर्फ पैसे बचाकर रखना न तो सुरक्षित भविष्य की गारंटी देता है और न ही महंगाई को मात दे पाता है। मजबूत फाइनेंशियल कुशन बनाने के लिए जरूरी है कि निवेश आपके लक्ष्य, जोखिम लेने की क्षमता और समय के हिसाब से किया जाए।
शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, PPF और सरकारी बचत योजनाओं जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। लेकिन, इसके बावजूद बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) आज भी सुरक्षा और स्थिर रिटर्न चाहने वाले निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
FD पर क्यों है सबसे भरोसेमंद विकल्प
भारत में फिक्स्ड डिपॉजिट को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में गिना जाता है। क्योंकि इसमें पूंजी सुरक्षित रहती है और रिटर्न पहले से तय होता है। FD की ब्याज दर पर बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी नहीं पड़ता। साथ ही, DICGC इंश्योरेंस के तहत 5 लाख रुपये तक की जमा रकम सुरक्षित रहती है। इससे निवेशकों को अतिरिक्त भरोसा मिलता है।
बैंक और NBFCs 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए FD की सुविधा देते हैं। हालांकि, FD से बेहतर रिटर्न पाने के लिए सिर्फ पैसा जमा करना काफी नहीं होता, बल्कि सही अवधि और सही स्ट्रक्चर चुनना भी जरूरी होता है।
एक FD या कई FD, किसमें है फायदा?
निवेशकों के मन में अक्सर यह उलझन रहती है कि पूरी रकम एक ही FD में लगाई जाए या उसे कई FD में बांटा जाए। अब मान लीजिए आपके पास 7 लाख रुपये हैं, तो क्या 7 लाख की एक FD बेहतर है या 1-1 लाख की सात FD?
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर ब्याज दर समान है, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाली कुल रकम दोनों ही मामलों में बराबर रहेगी। फर्क सिर्फ सुविधा, लचीलापन और जरूरत पड़ने पर पैसे निकालने की आसानी में होता है।
एक बड़ी FD के फायदे क्या हैं
एक बड़ी FD का सबसे बड़ा फायदा इसकी सादगी है। इसमें आपको सिर्फ एक ही डिपॉजिट करना होता है, एक ही मैच्योरिटी डेट होती है और ब्याज भी एक जगह ही जुड़ता है। निवेश को ट्रैक करना आसान रहता है, न तो कई FD रसीदें संभालने की झंझट होती है और न ही अलग-अलग मैच्योरिटी याद रखने की जरूरत पड़ती है। जो निवेशक 'लगाओ और भूल जाओ' वाला तरीका पसंद करते हैं, उनके लिए यह विकल्प काफी सुविधाजनक माना जाता है।
लंबी अवधि के लिए पैसा लॉक करने से ब्याज दर स्थिर रहती है और निवेशक बिना किसी रुकावट के मैच्योरिटी तक बेहतर रिटर्न हासिल कर सकता है। खासकर रिटायर्ड लोग या ऐसे निवेशक, जिनके पास पहले से इमरजेंसी फंड मौजूद है, उनके लिए एक बड़ी FD मानसिक शांति देने वाला विकल्प बन सकती है।
एक बड़ी FD के नुकसान समझना जरूरी
एक बड़ी FD की सबसे बड़ी समस्या तब आती है, जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाए। अगर आपको सिर्फ 50,000 रुपये चाहिए, तो आप आंशिक निकासी नहीं कर सकते। पूरी FD तोड़नी पड़ेगी, जिस पर पूरे अमाउंट पर पेनल्टी लगेगी और कुल रिटर्न घट जाएगा।
इसके अलावा सुरक्षा का पहलू भी अहम है। भारत में DICGC नियमों के तहत एक बैंक में जमा राशि पर सिर्फ 5 लाख रुपये तक का ही इंश्योरेंस मिलता है। ऐसे में 7 लाख रुपये एक ही बैंक में रखने पर 2 लाख रुपये अनइंश्योर्ड रह जाते हैं।
क्यों कई FD को स्मार्ट रणनीति माना जाता है
जरूरत पड़ने पर पूरी रकम नहीं, सिर्फ एक FD तोड़नी पड़ती है, जिससे बाकी पैसा ब्याज कमाता रहता है।
प्रीमैच्योर विदड्रॉल की पेनल्टी सिर्फ उसी FD पर लगती है, पूरी रकम पर नहीं।
अलग-अलग बैंकों में FD करने से ₹5 लाख की डिपॉजिट इंश्योरेंस लिमिट का पूरा फायदा लिया जा सकता है।
ब्याज दर बढ़ने पर किसी एक FD को मैच्योर कराकर ऊंची दर पर दोबारा निवेश करने की सुविधा मिलती है।
इमरजेंसी, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म जरूरतों के हिसाब से पैसा बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
कई FD का एक बड़ा फायदा यह भी है कि ब्याज दरें बदलने पर निवेशक अपनी रणनीति बदल सकता है। अगर आपने आज 7 प्रतिशत पर FD कराई और अगले साल दरें 8 प्रतिशत हो जाती हैं, तो आप छोटी अवधि वाली FD तोड़कर नई दर पर निवेश कर सकते हैं। एक लंबी अवधि की FD में यह सुविधा नहीं मिलती।
कई FD बनाने का नुकसान यह है कि उन्हें मैनेज करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अलग-अलग मैच्योरिटी डेट, कई रसीदें और लगातार ट्रैकिंग कुछ निवेशकों को झंझट भरा लग सकता है।
आपको कैसी FD करनी चाहिए?
FD निवेश का कोई एक सही फॉर्मूला नहीं होता। अगर आपके पास पहले से इमरजेंसी फंड है, आपको बिना झंझट वाला निवेश चाहिए और आपको लंबे समय तक पैसों की जरूरत नहीं पड़ेगी, तो एक FD आपके लिए सही हो सकती है।
लेकिन अगर आप लचीलापन चाहते हैं, बदलते आर्थिक हालात के लिए तैयार रहना चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर बिना ज्यादा नुकसान के पैसा निकालना चाहते हैं, तो कई FD बनाना ज्यादा व्यावहारिक विकल्प माना जाता है।
आखिर में, सही FD रणनीति वही है जो आपके फाइनेंशियल लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप हो। सही ढंग से बनाई गई FD स्ट्रक्चर आपके पैसों को आपके लिए ज्यादा बेहतर तरीके से काम करने में मदद करती है।