CEA V Nageswaran: मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पेंशन फंड्स को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि एक बेहतर तरीके से संचालित होने वाला पेंशन पूल भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है। यह न केवल देश के विकास से जुड़े निवेशों को सहारा देगा, बल्कि पेंशनधारकों को सुरक्षित रिटर्न भी सुनिश्चित करेगा।
पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने पेंशन सिस्टम की चुनौतियों और शॉर्ट-टर्म निवेशकों के बढ़ते ट्रेंड पर चिंता जताई। आइए समझते हैं कि उन्होंने पेंशन को लेकर क्या चेताया है और एक विकसित समाज का असली पैमाना किसे बताया है।
विकसित भारत का असली पैमाना क्या है?
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी देश को सिर्फ उसके आर्थिक आंकड़ों या नेशनल इनकम चार्ट के नंबरों से विकसित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा, 'विकसित भारत का मतलब सिर्फ नेशनल इनकम चार्ट पर दिखने वाला कोई बड़ा नंबर नहीं है। ऐसा हो सकता है कि कोई देश बहुत अधिक आर्थिक उत्पादन कर रहा हो, लेकिन फिर भी वहां के बुजुर्ग मानसिक रूप से परेशान और चिंतित हों। किसी विकसित समाज का असली पैमाना यह है कि वहां बुढ़ापे में सुरक्षा और सम्मान सबको समान रूप से मिले।'
शॉर्ट-टर्म निवेशकों के बढ़ते दबदबे पर जताई चिंता
सीईओ नागेश्वरन ने वित्तीय बाजारों में शॉर्ट-टर्म निवेश करने वालों के बढ़ते प्रभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जो निवेशक पारंपरिक रूप से लंबे समय के लिए निवेश करते थे, अब उनके निवेश करने की समय सीमा भी छोटी होती जा रही है।अधिक रिटर्न पाने की अंधी दौड़ में पेंशन के वादों और सुरक्षा के साथ समझौता करना एक ऐसा जोखिम है, जिसे देश का पेंशन सिस्टम बर्दाश्त नहीं कर सकता।
वैश्विक पेंशन फंड्स और सोने का उदाहरण
उन्होंने पश्चिमी देशों के पेंशन फंड्स का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे समय से वे फंडिंग की कमी से जूझ रहे हैं। जब ब्याज दरें बहुत कम थीं, तब ज्यादा मुनाफे के चक्कर में निवेशकों ने जोखिम भरी संपत्तियों में पैसा लगाया।
पेंशन फंड्स का झुकाव अब ऐसी संपत्तियों की तरफ बढ़ रहा है जो जोखिम भरी हैं और जिन पर मैक्रोइकोनॉमिक बदलावों का तुरंत असर पड़ता है। उन्होंने 'सोने' का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत जैसे देश के लिए सोने में अत्यधिक निवेश करने से भुगतान संतुलन पर सीधा असर पड़ता है, जिससे घरेलू लायबिलिटी फंड्स को समझदारी से निपटने की जरूरत है।
भविष्य की बुजुर्ग आबादी के लिए अभी से तैयारी जरूरी
आने वाले समय में देश की बुजुर्ग होती आबादी को सुरक्षित रखने के लिए आज ही से मजबूत और लचीला पेंशन ढांचा तैयार करना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने तीन मुख्य बातें बताईं:
प्रोडक्ट की सादगी: अनौपचारिक क्षेत्र तक पेंशन की पहुंच बढ़ाने के लिए योजनाओं का बेहद सरल होना जरूरी है।
डिजिटल डिलीवरी: पेंशन सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाए।
जनता का भरोसा: लंबे समय के लिए जनता का भरोसा जीतना और उसे बनाए रखना सबसे अहम है।
NPS के बाद ये है अगला बड़ा चैलेंज
कार्यक्रम में मौजूद PFRDA के चेयरमैन एस. रमन ने कहा कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ने रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए एक बेहतरीन ढांचा तैयार कर लिया है। अब सबसे बड़ी चुनौती 'डिक्युमुलेशन फेज' यानी रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि के प्रबंधन को बेहतर बनाने की है। इसके लिए PFRDA और इंस्टीट्यूट ऑफ एक्चुअरीज ऑफ इंडिया (IAI) मिलकर रिसर्च आधारित और लचीले वित्तीय साधन तैयार कर रहे हैं।