नटराजन टीजी अहमदाबाद रहते हैं और एक फाइनेंशियल कंसल्टेंट हैं। लोन चुकाने के मामले में उनका बेदाग रिकॉर्ड रहा है। वह कहते हैं कि उनका क्रेडिट स्कोर 830 से ऊपर रहा है। 900 का स्कोर अमूमन सबसे ज्यादा माना जाता है। हालांकि, 2018 में वह उस वक्त चौंक गए जब उन्हें पता चला कि उनका स्कोर लुढ़क गया है। उन्होंने एक होम लोन ट्रांसफर के लिए एप्लाई किया था।
नटराजन बताते हैं, "हालांकि, लोन पास हो गया, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि मेरा क्रेडिट स्कोर दो महीनों में गिरकर 810 पर पहुंच गया है। मैं यह जानकर हैरान रह गया क्योंकि न तो कभी भी किसी लोन पर मेरा डिफॉल्ट हुआ और न ही मैंने ईएमआई चुकाने में कभी देरी की।"
अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की पड़ताल करने पर वह उस बैंक तक पहुंचे जिसके डेटा ने उनका स्कोर गिरा दिया था। वह कहते हैं, "इस बैंक से मैंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए एजूकेशन लोन लिया था। डेटा से पता चला कि मैंने दो महीने तक ईएमआई नहीं भरी, जबकि ऐसा था नहीं। यहां तक कि उन दो महीनों में भी मेरे सेविंग्स अकाउंट से ईएमआई की रकम कटती रही।" जांच में पता चला कि हालांकि सेविंग्स अकाउंट से किस्त कटी, लेकिन यह लोन अकाउंट में नजर नहीं आई। इसकी वजह बैंक के सिस्टम्स में पैदा हुई गड़बड़ी थी जो कि सॉफ्टवेयर बदलने के चलते आई थी। उन्होंने बताया, "मैंने बैंक से संपर्क किया और एक पत्र हासिल किया जिसमें लिखा था कि ऐसा बैंक की गलती से हुआ है। बाद में यह मसला हल हो गया क्योंकि क्रेडिट ब्यूरो ने जरूरी बदलाव कर दिए थे।"
यह इस तरह का कोई इकलौता वाकया नहीं है। चेन्नई के मार्केटिंग कंसल्टेंट कन्नन श्रीनिवासन के लिए अपनी क्रेडिट हिस्ट्री की पड़ताल करना एक आम गतिविधि है। वह हर चौथे महीने अपनी क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर चेक करते है। आमतौर पर ज्यादातर लोग ऐसा नहीं करते हैं। कन्नन के मुताबिक उनका क्रेडिट स्कोर हमेशा 800 से ऊपर रहा है। इतनी सतर्कता के बावजूद 2019 में उन्हें पता चला कि उनका स्कोर 760 के भी नीचे चला गया है। अपनी रिपोर्ट को गहराई से जांचने पर उन्हें पता चला कि ऐसा एक 16 साल पुराने मसले की वजह से हुआ है। 2002 में उन्होंने एक पर्सनल लोन उसकी सभी 36 किस्तें चुकाने के बाद क्लोज किया था। श्रीनिवासन बताते हैं, "हालांकि, बैंक दावा कर रहा था कि मेरे ऊपर उनके करीब 4,000 रुपये बकाया हैं। मैंने वह रकम तभी चुका दी थी, बैंक से लेटर लिया था और तब वह मसला निपट गया था।" या ऐसा उन्हें लग रहा था। उन्हें बैंक की तरफ से 2019 में एक कोर्ट नोटिस मिला जिसमें उनसे 4,000 रुपये का बकाया चुकाने के लिए कहा गया था। इससे उनके क्रेडिट स्कोर पर बुरा असर पड़ा। उन्होंने बैंक को चिट्ठी लिखी और लोन क्लोजर के वक्त 2002 में बैंक से मिला लेटर भी भेजा। श्रीनिवासन बताते हैं, "बैंक ने मुझसे माफी मांगी, मुझे एक चिट्ठी दी जिसमें कहा गया था कि मुझ पर बैंक की कोई देनदारी नहीं है। साथ ही इसकी सूचना सिबिल को भी दी। उसके बाद से मेरा क्रेडिट स्कोर फिर से बढ़ने लगा।"
हालांकि, ऊपर बताए गए दोनों वाकयों का अंत सुखद रहा है, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है। अक्सर लोगों को अपने अधिकार पता नहीं होते हैं और वे गलतियों को सुधरवा भी नहीं पाते हैं।
सजग होने की जरूरत
क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर का असर न सिर्फ लोन आवेदन पर पड़ता है, बल्कि यह आपके इंश्योरेंस रिस्क असेसमेंट और यहां तक कि आपकी नौकरी की संभावनाओं पर भी असर डालता है। इस चीज को लेकर जागरुकता अब लगातार बढ़ रही है। हालांकि, गुजरे वक्त में की गई गलतियों को सुधारने के बारे में अभी भी जागरुकता की कमी है। इंडीविजुअल कस्टमर्स को अभी इस पर काफी काम करने की जरूरत है।
आपके सभी कर्जदाताओं को आपके रीपेमेंट पर आधारित क्रेडिट रिपोर्ट और स्कोर आपकी कर्ज लेने की योग्यता को बताते हैं। हालांकि, इस स्कोर को बनाने वाली क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियां इस स्कोर के आकलन के लिए बैंकों से आंकड़े लेती हैं और इंडीविजुअल कस्टमर्स से इस बाबत कोई सूचना नहीं ली जाती है, लेकिन अपनी ओर से सतर्क रहने से गलतियों को वक्त पर ही सुधारने में मदद मिलती है।
शिकायतों के आधार
चूंकि, बैंक क्रेडिट इंफॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया (लिमिटेड), इक्विफैक्स, एक्सपीरियन और सीआरआईएफ हाईमार्क जैसी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों को डेटा देने वाली इकाई होते हैं, ऐसे में किसी गलत जानकारी या अपडेट में चूक के चलते क्रेडिट हिस्ट्री गड़बड़ा सकती है।
क्लीयरस्कोर के कंट्री मैनेजर ऋषिकेश मेहता के मुताबिक, "फाइलों के एक-दूसरे में मिल जाने के वाकये भी आते हैं। इन मामलों में किसी और के खाते का डेटा आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखने लगता है। कई बार क्रेडिट ब्यूरो गलती से किसी एक क्रेडिट रिपोर्ट के लिए दो एक जैसे खाते तैयार कर देते हैं। इसमें यह होता है कि एक ही क्रेडिट कार्ड खाते को दो बार रिपोर्ट कर दिया जाता है, इससे आपका बकाया बढ़ जाता है और आपकी लोन लेने की हैसियत घट जाती है।"
कई मामलों में ऐसा होता है उधार लेने वाले को अपनी खराब क्रेडिट हिस्ट्री का तभी पता चलता है जब वह लोन का आवेदन करता है। रामचंद्र बताते हैं, "अक्सर यह कोई अनसुलझा मसला होता है। दुर्भाग्य से, कई दफा लोगों के पास दस्तावेज मौजूद नहीं होते हैं। मिसाल के तौर पर, वे लोन चुका चुके होते हैं या इसे सेटल कर चुके होते हैं, लेकिन इसके लिए नो-ड्यूज सर्टिफिकेट नहीं ले पाते हैं।"
इसके अलावा, फर्जी लेनदेन के मामले भी हो सकते हैं जो कि वक्त रहते निपटाए नहीं गए, इनके चलते भी आपकी क्रेडिट हिस्ट्री खराब होती है। मेहता के मुताबिक, "वीजा/मास्टरकार्ड की गाइडलाइंस के मुताबिक मर्चेंट्स को ग्राहक के दस्तखत या सामान या सेवा की डिलीवरी के सबूत देना अनिवार्य है। अगर वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो ट्रांजैक्शन को वैध नहीं माना जाता है। अगर आपके नोटिस में इस तरह का कोई फर्जी ट्रांजैक्शन आता है तो उसे बैंक को तुरंत सूचित करें और इसे रिवर्स कराएं।"
लोन और क्रेडिट कार्ड के नियम और शर्तों में जटिलताएं विवाद की एक और वजह बनती हैं। मेहता के मुताबिक, "अक्सर ग्राहकों को लेट फीस और पेनाल्टी के बारे में जानकारी ही नहीं होती है। उन्हें नहीं पता होता कि अगर ये लंबे वक्त तक पेंडिंग बनी रहें तो आगे चलकर एक बड़ा अमाउंट बनती हैं। बैंक या कार्ड कंपनी इन्हें माफ करती सकती है, लेकिन इसे सेटल हुआ दिखा सकती है। जब दूसरे बैंक यह देखते हैं तो वे लोन पास करने में आनाकानी कर सकते हैं।" इस तरह के मामले क्लोजर के तौर पर नहीं माने जाते हैं, ऐसे में ये आपके क्रेडिट स्कोर को नीचे ले जाते हैं।
रेक्टीफाईक्रेडिट सर्विसेज की फाउंडर अपर्णा रामचंद्र के मुताबिक, "बैंक ब्याज माफ करेगा और आपको एक सेटल्ड केस के तौर पर रिपोर्ट करेगा जिसमें बताया जाएगा कि आपका बकाया राइट ऑफ कर दिया गया है। जब कोई बैंक क्रेडिट रिपोर्ट देखता है तो वह उसमें आपत्तियां ही देखता है उसके ब्योरों में नहीं जाता है।"
साथ ही अगर आप गारंटर हैं और वास्तविक कर्जदार नहीं हैं तो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में यह चीज नजर आएगी। जब आपकी लोन लेने की योग्यता का आकलन होगा तो उसमें यह लोन भी जोड़ा जाएगा। रामचंद्र के मुताबिक, "आपको अचानक पता चलेगा कि आप जितना मांग रहे हैं उससे काफी कम लोन आपको मिल रहा है, भले ही आपने कोई लोन न लिया हो।"
सतर्क रहें
सबसे पहले आपको अपनी क्रेडिट हिस्ट्री को गहराई से मॉनिटर करना चाहिए। आप फ्री में क्रेडिट रिपोर्ट को साल में एक बार किसी भी क्रेडिट ब्यूरो से हासिल कर सकते हैं। साथ ही, अपने क्रेडिट और अकाउंट स्टेटमेंट्स पर नजर रखिए, खासतौर पर तब जबकि आप रीलोकेट हो रहे हों। अपने मोबाइल नंबर अपडेट कर दें और ई-बिल्स को सब्सक्राइब कर लें। मेहता के मुताबिक, "ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिनमें क्रेडिट कार्ड यूजर अपने कार्ड को बंद कराए बिना या कार्ड इश्यू करने वाले बैंक को बताए बिना विदेश चले गए। एनुअल मेंटेनेंस इन पर लगता रहा और सालों बाद उन्हें पता चलता है कि उनकी क्रेडिट हिस्ट्री पर बुरा असर पड़ा है।"
खासतौर पर उस वक्त बेहद सतर्क रहें जब आप बैंक के पास सेटलमेंट के लिए जा रहे हों। रामचंद्र के मुताबिक, "नो ड्यूज सर्टिफिकेट लेना न भूलें ताकि आप रिकॉर्ड को अपडेट करने में इसे इस्तेमाल कर सकें और यह आपके कोई बकाया न होने को साबित करे।" अगर कोई विवाद लेट फीस जैसी चीजों को लेकर होता है तो उसे चुका देना एक बेहतर विकल्प रहेगा। मेहता के मुताबिक, "मेरी सलाह है कि आपको सेटलमेंट की बजाय पूरी रकम चुका देनी चाहिए।"
आखिरी सहारा
विवाद की स्थिति में क्रेडिट ब्यूरो के दिए जाने वाले डिस्प्यूट रेजॉल्यूशन मेकेनिज्म का सहारा लें। आप ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर, सिबिल के मामले में इस तरह की एंट्रीज को अंडर डिस्प्यूट में डाला जाता है। इसके बाद वे संबंधित बैंक से उनकी प्रतिक्रिया लेते हैं। अगर बैंक आपके दावे को स्वीकार करता है तो रिकॉर्ड दुरुस्त हो जाता है। आप बैंक से भी रिकॉर्ड में गलती को हटाने की मांग कर सकते हैं। रामचंद्र बताती हैं, "हमने ज्यादातर मामलों में देखा है कि बैंक डॉक्युमेंट्स के वेरिफिकेशन के बाद रिकॉर्ड्स में मौजूद खामी को खत्म कर लेते हैं। इसी वजह से डॉक्युमेंटेशन का बड़ा महत्व है।"
अगर आपका अनुरोध खारिज हो जाता है तो आप बैंकिंग ओम्बड्समैन के दफ्तर में शिकायत कर सकते हैं। हालांकि, बैंकिंग ओम्बड्समैन किसी भी शिकायत को तब तक नहीं देखता जब तक कि आप पहले बैंक के पास इस शिकायत के निपटारे के लिए न गए हों। अगर आप बैंकिंग ओम्बड्समैन के आदेश से नाखुश हैं तो आप अपीलीय प्राधिकरण का दरवाजा खटखटा सकते हैं, जो कि इस मामले में आरबीआई का डिप्टी गवर्नर होता है। अगर आप तब भी असफल रहते हैं तो आप कंज्यूमर कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
सोशल मीडिया अपडेट्स के लिए हमें Facebook (https://www.facebook.com/moneycontrolhindi/) और Twitter (https://twitter.com/MoneycontrolH) पर फॉलो करें।
