PPF Investment: पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी पीपीएफ (PPF) देश में सुरक्षित और भरोसेमंद रिटर्न देने वाले सबसे लोकप्रिय स्मॉल सेविंग्स ऑप्शंस में से एक है। पीपीएफ में निवेश करते समय कंसिस्टेंसी काफी मायने रखती है। वैसे अगर आप सही समय पर निवेश की योजना बनाते हैं तो आप समान रकम जमा करके भी अपने पीपीएफ खाते पर एक लाख रुपये से अधिक का एक्स्ट्रा इंट्रेस्ट कमा सकते हैं। इसके लिए आपको बस पीपीएफ खाते में इंट्रेस्ट के कैलकुलेशन के नियम को समझना होगा और हर महीने की 5 तारीख के गोल्डन रूल का पालन करना होगा।
ये है हर महीने की 5 तारीख का गोल्डन रूल और इंट्रेस्ट गणित
पीपीएफ में निवेश की समय सीमा काफी फ्लेक्सिबल होती है, लेकिन आप पैसा कब जमा करते हैं इसका सीधा असर आपके रिटर्न पर पड़ता है। नियम के मुताबिक पीपीएफ खाते पर ब्याज की गणना महीने की 5 तारीख और उस महीने की अंतिम तारीख के बीच के न्यूनतम बैलेंस के आधार पर की जाती है।
इसका सीधा मतलब यह है कि अगर आप किसी महीने की 5 तारीख या उससे पहले अपने खाते में पैसा जमा कर देते हैं, तो वह जमा राशि उस पूरे महीने के ब्याज कैलकुलेशन में शामिल कर ली जाती है। इसके उलट अगर आप 5 तारीख के बाद पैसा जमा करते हैं, तो उस जमा राशि पर उस महीने का कोई ब्याज नहीं मिलता और वह केवल अगले महीने से इंट्रेस्ट के लिए गिनी जाती है। आपको बता दें कि अगस्त 2026 तक पीपीएफ पर मिलने वाली वार्षिक ब्याज दर 7.1 प्रतिशत है।
एकमुश्त बनाम मासिक निवेश: 15 साल के मैच्योरिटी पीरियड पर कितना आता है अंतर
पीपीएफ खाते में एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक जमा किए जा सकते हैं। अगर आपके पास वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही पूरी रकम उपलब्ध है तो 5 अप्रैल से पहले एकमुश्त (Lumpsum) 1.5 लाख रुपये जमा करना सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होता है। इससे आपकी पूरी राशि पर पूरे 12 महीनों के लिए 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है।
अगर किसी निवेशक के पास वित्तीय वर्ष की शुरुआत में एकमुश्त फंड नहीं है तो वह हर महीने 12500 रुपये की मासिक किश्त के रूप में 12 महीनों में कुल 1.5 लाख रुपये जमा कर सकता है। अगर 15 साल के मैच्योरिटी पीरियड पर तुलना की जाए तो वर्तमान 7.1% की ब्याज दर के हिसाब से हर साल 5 अप्रैल से पहले ₹1.5 लाख एकमुश्त जमा करने पर 15 साल बाद लगभग ₹40.68 लाख का मैच्योरिटी फंड तैयार होता है। वहीं हर महीने 5 तारीख से पहले ₹12500 जमा करने पर 15 साल बाद लगभग ₹39.44 लाख का फंड बनता है।
इस तरह सिर्फ वित्तीय वर्ष की शुरुआत में एकमुश्त निवेश करने के सही समय का चुनाव करने से निवेशक को 15 साल में लगभग ₹1.24 लाख का सीधा एक्स्ट्रा फायदा होता है।
सैलरीड क्लास के लिए मासिक SIP क्यों है बेहतर विकल्प
भले ही एकमुश्त निवेश करने पर थोड़ा अधिक रिटर्न मिलता है लेकिन नौकरीपेशा या सैलरीड क्लास निवेशकों के लिए मासिक किश्त (Monthly SIP) का विकल्प अधिक व्यावहारिक और सुविधाजनक माना जाता है। साल के अंत तक एकमुश्त 1.5 लाख रुपये का इंतजाम करने की चिंता करने के बजाय हर महीने अपनी सैलरी से एक निश्चित राशि बचाकर पीपीएफ में डालना आसान होता है।
मासिक निवेश का एक बड़ा व्यावहारिक फायदा यह भी है कि अगर पैसा कई महीनों तक बैंक खाते में पड़ा रहता है तो उसके घरेलू खर्चों, छुट्टियों या अन्य गैर-जरूरी चीजों में खर्च होने की आशंका बनी रहती है। हर महीने 5 तारीख से पहले ऑटो-डेबिट या बैंक ट्रांसफर सेट करने से बचत की एक अनुशासित आदत बनती है।
टैक्स छूट के फायदे और निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
पीपीएफ अपनी ईईई (EEE) टैक्स कैटेगरी के लिए भी जाना जाता है। इसके तहत पुरानी टैक्स व्यवस्था में धारा 80C के अंतर्गत सालाना 1.5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। इसके साथ ही इससे मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी की पूरी रकम भी पूरी तरह से टैक्स-फ्री होती है। नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) चुनने वाले निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे टैक्स छूट के दावों की जांच के बाद ही इसे टैक्स-सेविंग इंस्ट्रूमेंट के रूप में देखें।
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